Tuesday, October 15

अन्याय पर न्याय की विजय का प्रतीक दशहरा पूरी आस्था के साथ मना

रुड़की। असत्य पर सत्य व अन्याय पर न्याय की विजय का प्रतीक दशहरा पर्व पूरी आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया। नवरात्र सम्पन्न होते ही रामलीलाओं का मंचन कल अपने अन्तिम दौर मे पहुंच गया और समस्त रामलीला कमेटियां दशहरा आयोजनों में जुट गई थी। दशहरे पर्व के दौरान जहां प्राचीन रामलीला समिति बीटी गंज द्वारा रावण, कुम्भकर्ण पुतलों का दहन नेहरु स्टेड़ियम में किया गया। वही सनातन धर्म रामलीला समिति रामनगर द्वारा मूलराज इन्टर काॅलेज रामनगर में रावण दहन कार्यक्रम बडे हर्ष उल्लास के साथ किया गया। नगर में दोनों ही जगहों असत्य पर सत्य की विजय को देखने के लिए जनसैलाब उमडा हुआ था। वहीं शासन प्रशासन द्वारा तीनों ही मैदानों पर सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किये गये।
शहर में रामलीला समितियों द्वारा दशहरा पर्व का शुभारंभ स्थानीय अपने अपने आयोजन स्थल पर दशहरा पूजन के साथ किया गया। जिसमें सभी रामलीला के पात्रों सहित आयोजक मंच समिति के लोगों द्वारा पायते का पूजन किया गया। इसके उपरान्त समितियों द्वारा भव्य विजय दशमी शोभायात्रा का प्रारंभ किया गया। जो कि नगर में भ्रमण करती हुई सायं काल पुतले दहन स्थलों पर पहंुची। आयोजन स्थालों पर राम रावण की सेना के बीच घंटो चले युद्व के बाद आखिर भगवान श्री राम ने रावण को मार गिराया और अन्याय पर न्याय, असत्य पर सत्य की पताका फहराते हुए खडे विशालकाय रावण, कुम्भकरण व मेघनाद के पुतलों को अग्नि के सुपुर्द किया। दोनों स्थलों पर भारी भीड़ देखी गई। मैदानों में खडे तीनों ही पुतले नगर की जनता में अपना खूब रंग जमा रहे थे। वहीं खचाखच भरे मैदानों में हजारों की भीड से उस समय भगवान श्रीराम के जयकारे से समूचा स्टेडियम गूँज उठा जब भगवान श्रीराम ने रावण को ढेर किया। इसके बाद माता सीता को लंका से मुक्त करा भगवान श्रीराम की सवारी पुनः नगर के मार्गों से होकर अपने प्रारम्भिक स्थानों पर पहुंची। शोभायात्रा के दौरान लगातार आतिशबाजी होती रही जो कि अपने अलग ही अंदाज में रंग बिखेर रही थी। साथ ही विजय शोभायात्रा नगर के भिन्न भिन्न मार्गों से नगरवासियों द्वारा भारी मात्रा में भगवान श्रीराम माता जानकी, लक्ष्मण, हनुमान आदि पर नोरतों की बरसात कर भव्य अभिनंदन शोभायात्रा का किया जा रहा था। शोभायात्रा पर छतों से गिर रहे नौरते ऐसे प्रतीत हो रहे थे कि मानों आकाश से पुष्प वर्षा का नजारा रहा हो।
बच्चों ने जमकर खरीदे तीर, तलवार
रुड़की। पुतले दहन को लेकर लगे मेलों में छोटे छोटे बच्चे यही कहते नजर आये कि मम्मी-पापा मुझकों भी दिलाओं धनुष बाण। मेले में विभिन्न धुनष-बाण, त्रिशुल, तलवार व गदा खरीदने को लेकर बच्चे उत्साहित रहे। बच्चें कोई पीपी व कोई सीटी बजाते नजर आये। वही बच्चों के साथ बडे भीे राम-रावण के मुखोटे के साथ अन्य मुखोटों में भी पहने नजर आये। मेले में दुकानों पर भी भारी भीड़ लगी रही।
घरों में हुई शस्त्रों, पुस्तकों की पूजा
रुड़की। विजय दशमी यानि दशहरे पर श्रद्धालुओं ने जहा भगवान राम की पूजा अर्चना की वहीं बुराई के प्रतीक रावण का दहन भी किया। दशहरा पूजन में शस्त्रों के साथ पुस्तकों की भी पूजा की गई। इस अवसर पर रायते का प्रसाद बनाया गया। दशहरा पर्व पर नवरात्रों में उगाए गए जौ की पौध यानि नोरतो को विधिविधान के साथ उखाड़कर बहनों ने अपने भाइयों के कानों पर नोरते रखकर भाइयों की खुशहाली की कामना की।

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