Wednesday, January 29

असम विधानसभा में कांग्रेस, एआईयूडीएफ विधायकों ने सीएए के खिलाफ किया प्रदर्शन

गुवाहाटी, (भाषा)। विवादित संशोधित नागरिकता कानून को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों की गूंज सोमवार को असम विधानसभा में सुनाई दी जब विपक्षी दल कांग्रेस और एआईयूडीएफ के सदस्यों ने इस कानून के खिलाफ नारेबाजी की जिससे उस वक्त हंगामे की स्थिति बन गई जब राज्यपाल जगदीश मुखी ने अभिभाषण शुरू ही किया था। सदन का एक दिवसीय विशेष सत्र उस संविधान संशोधन विधेयक को मंजूरी देने के लिये बुलाया गया था जिसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एससी/एसटी आरक्षण को अगले 10 साल तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। संसद ने इस विधेयक को पिछले साल 11 दिसंबर को पारित किया था। राज्यपाल मुखी का अभिभाषण शुरू हुए अभी दो मिनट ही हुए थे कि विधायक रूपन कुर्मी अपने स्थान पर खड़े होकर कहने लगे कि राज्यपाल के भाषण में सीएए या इस कानून के खिलाफ पिछले साल दिसंबर में हुए प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पुलिस गोलीबारी में मारे गए पांच छात्रों के बारे में कोई जिक्र नहीं है।
विपक्षी सदस्यों ने भी कुर्मी का साथ देते हुए सीएए के खिलाफ हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी शुरू कर दी और वे अध्यक्ष के आसन के पास आकर इन मौतों की जांच कराए जाने की मांग करने लगे। राज्यपाल ने अपना अभिभाषण जारी रखा लेकिन शोरगुल के बीच कुछ भी सुना नहीं जा सका।
इस दौरान सत्ता पक्ष में बैठे भाजपा विधायक राज्यपाल के अभिभाषण पर मेजें थपथपा रहे थे। इस बात का संकेत देने के लिये राष्ट्रगान की धुन बजायी गयी कि राज्यपाल जा रहे हैं और अध्यक्ष हितेन गोस्वामी ने घोषणा की कि मुखी के बयान को पढ़ा हुआ माना जाए। गोस्वामी ने इसके बाद सदन की कार्यवाही को विधायकों के लिये आयोजित विशेष चाय सत्र के लिए 45 मिनट के लिये स्थगित कर दिया। कांग्रेस विधायकों ने संवाददाताओं को बताया कि उन्होंने चाय सत्र का बहिष्कार किया है।