Saturday, March 28

आखिर न्यूज चैनल क्यों दिखाते हैं नेताओं के भड़काऊ बयान-भाषण?

नेशनल एक्सप्रेस ब्यूरो
नई दिल्ली। 26 फरवरी को भी न्यूज चैनलों पर नेताओं के भड़काऊ बयान और भाषण प्रसारित होते रहे। वहीं कफ्र्यू के बाद भी दिल्ली में हिंसा का दौर जारी रहा। लापता आईबी अधिकारी अंकित शर्मा का शव भी मिल गया है।
हिंसा में अब तक 20 से भी ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। देश की राजधानी के हालात कैसे हैं, यह किसी से छिपा नहीं है। सोशल मीडिया पर साम्प्रदायिकता फैलाने की पोस्ट नहीं डालने की अपील की जाती है, लेकिन न्यूज चैनलों पर नेताओं के भड़काऊ भाषण और बयान पर रोक नहीं लगाई जाती। ऐसे नेता खुलेआम एक दूसरे समुदाय के विरुद्ध गैर जरूरी टिप्पणियां करते हैं। नेताओं के बयान न केवल जहरीले होते हैं, बल्कि धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाले भी होते हैं। राजनेता तो वोटों के खातिर कुछ भी बोल सकते हैं, लेकिन न्यूज चैनलों की भी तो कोई जिम्मेदारी होगी? जब भड़काऊ पोस्ट सोशल मीडिया पर डालना अपराध है तो भड़काऊ भाषण प्रसारित करना अपराध क्यों नहीं है? दिल्ली हिंसा के दौरान जिस प्रकार नेताओं के बयान चैनलों पर दिखाए जा रहे हैं उससे माहौल और बिगड़ रहा है।
अधिकांश चैनल हिंसा को लेकर रिपोर्टिंग भी देशहित और शांति बहाली के लिए नहीं कर रहे है। माना कि लोकतंत्र में मीडिया को आजादी मिली हुई है, लेकिन ऐसी आजादी किस काम की कि जिससे देश ही खतरे में पड़ जाए? हालांकि अभी मीडिया पर कोई प्रतिबंध लगाने का सवाल नहीं है, लेकिन मीडिया को भी में देशहित में अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। पत्रकारिता ऐसी हो, जिससे दिल्ली में जल्द से जल्द शांति हो सके। मीडिया को उन चेहरों को उजागर करना चाहिए जो हिंसा के लिए जिम्मेदार है।