Friday, November 15

आयुष्मान, आवास, उज्ज्वला की कछुआ गति सौभाग्य योजना दौड़ी खरगोश की चाल

सरकारी लोकहित की योजनाओं का अखिरी पंक्ति के अखिरी व्यक्ति तक पहुंचना हुआ नामुमकिन

नेशनल एक्सप्रेस ब्यूरो
मथुरा। आयुष्मान, प्रधानमंत्री आवास, उज्ज्वला योजनाएं कछुआ गति से चल रही हैं जबकि सौभाग्य योजना खरगोश की गति से दौड़ लगाती हुई हर घर यहां तक कि बिना घर की दीवार तक जा पहुंची। महात्मा गांधी ने कहा था जब भी आप कोई फैसला लें तो पंक्ति में खड़े आखिरी व्यक्ति के बारे में एक बार जरूर सोच लें। शायद हमारे हुक्मरानों के राष्ट्रपिता की ये लाइनें प्रासंगिकता खो चुकी हैं। यही वजह है कि तमाम सरकारी योजनाएं उस व्यक्ति तक नहीं पहंुच रही हैं जिन्हें इनकी सबसे ज्यादा आवश्यकता है। आखिरी पंक्ति में आखिरी व्यक्ति को ध्यान में रख कर सरकार अगर योजना बना भी रही है तो उसी आखिरी व्यक्ति तक इन योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित नहीं हो पा रही है। ताजुब्ब तब होता है जब सरकारी की आयुष्मान, प्रधानमंत्री आवास, सौभाग्य जैसी योजनाएं इस आखिरी पंति के आखिरी व्यक्ति तक नहीं पहुंचीं लेकिन उज्जवला योजना में मीटर बिना मकान की दीवार पर भी ठोक दिये गये। इसके पीछे तर्क है कि राशन के साथ मिलने वाला मिट्टी का तेल बंद है इस लिए कोई अंधेरे में कैसे रह पाएगा।
शनिवार को नगर निगम की टीम ने यमुनापार स्थित अयोध्या नगर कालोनी में कई झौंपड़ीनुमा मकानों को ध्वस्त कर दिया। यहां नगर निगम अपनी जमीन बता रही है जिस पर सैकड़ों मकान बन गये हैं। इनमें से कुछ बहुमंजिला, कुछ एक मंजिला तो कुछ झोंपड़ीनुमा मकान हैं। नगर निगम ने इनमें से किसी को कोई नोटिस नहीं दिया और सीधे ध्वस्तीकरण की कार्यवाही कर दी लेकिन यह कार्यवाही सिर्फ उन झौंपड़ीनुमा मकानों पर हुई जो बेहद गरीब लोगों के थे, जिनके पास आजीविका के साधन नहीं है, इनकी कहीं कोई पहुंच नहीं है।