Sunday, November 17

आरएसएस के विजय रूपाणी को दूसरी बार मिली गुजरात की सत्ता

अहमदाबाद भाषा। राषंीय संियं
सेिक संघ (आरएसएस) के डिजय
रंपाणी गुजरात में सतंा संबंिी परेशाडनयों
और डहंसक पाटीदार आंदोलन का सामना
करने के बाद एक डफर आज पंदेश के
मुखंयमंतंी बन गए । उनंहें भाजपा अधंयकं
अडमत शाह का डिशंास हाडसल है।
रंगून (मौजूदा समय में यंगून) में
जनंमे रंपाणी (61 िरंज) एक छातं के रंप
में ही आरएसएस शाखा में शाडमल हुये।
इसके बाद, िह आरएसएस की छातं
शाखा -अडखल भारतीय डिदंाथंी पडररद
(एबीिीपी) से भी जुडंे रहे। डििानसभा
चुनाि में रंपाणी के गृहनगर में पंिानमंतंी
नरेंदं मोदी चुनाि पंचार का चेहरा थे। जैन
समुदाय से तासंलुक रखने िाले रंपाणी ने
पाटंी की मशीनरी को सडंिय करते हुए
अपनी सरकार के डखलाफ सतंा डिरोिी
कारकों को डनषंडंिय कर डदया और राजंय
में पाटंी के िोटों के सबसे बडंे आिार रहे
पाटीदार समुदाय के आरकंण की मांग को
लेकर आंदोलन के नकारातंमक पंभाि को
भी खतंम डकया। उनंहोंने राजंय के डिडभनंन
डहसंसों में कृडर से जुडंी समसंयाओं,
नोटबंदी तथा जीएसटी की िजह से
कारोबार के कंेतं में आई सुसंी से उपजे
मोहभंग पर भी पार पा डलया।
राजंय में लंबे समय बाद डििानसभा
चुनाि में भाजपा की सीटें कम आने के
बािजूद पाटंी नेतृतंि दंारा रंपाणी का
मुखंयमंतंी के रंप में चुना जाना यह बताता
है डक साल 2019 के लोकसभा चुनाि
तक भाजपा राजंय में यथालंसथडत बरकरार
रखना चाहती है। हालांडक रंपाणी दूसरी
बार ही डििायक बने हैं लेडकन उनंहोंने यह
साडबत डकया है डक िह कुशल पंशासक
हैं। रंपाणी पहले गुजरात में जंयादातर पाटंी
के संगठन से संबंडित जुडंे काम करते थे।
उनंहोंने अपना पहला डििानसभा चुनाि
साल 2014 में लडंा। राजकोट िेसंट
डििानसभा सीट खाली हुई थी और
उपचुनाि में रंपाणी को जीत डमली। इस
बार भी उनंहें इस सीट पर 53,000 से
जंयादा मतों से जीत डमली है। कानून से
संनातक रंपाणी साल 2006-2012 के
बीच राजंयसभा के भी सदसंय चुके हैं।
गुजरात पयंजटन डिकास डनगम के अधंयकं
के रंप में रंपाणी ने 2006 में ‘खूशबू
गुजरात’ का सफल डिजंापन अडभयान
चलाया था। इस डिजंापन में मेगासंटार
अडमताभ बचंन थे और यह डिजंापन राजंय
को पयंजटन के बडंे संथल के रंप में पंचार
के डलए बनाया गया था। िह साल 2013
में गुजरात मंयूडनडसपल फाइनेंस बोडंज के
अधंयकं भी थे।
डििानसभा अधंयकं िाजुभाई िाला
को अकंतूबर 2014 मे कनंाजटक का
राजंयपाल बनाए जाने के बाद राजकोट
िेसंट का सीट खाली हो गयी थी। रंपाणी
को यहां से डििानसभा उपचुनाि में
सफलता डमली। रंपाणी को 19 फरिरी
2016 को गुजरात में भाजपा अधंयकं
बनाया गया। इस कदम को राजंय इकाई में
अडमत शाह के िडंे की जीत बताई गई थी।
राजंय की पहली मडहला मुखंयमंतंी
आनंदीबेन पटेल के 2016 में अपने पद से
इसंीफा देने के बाद रंपाणी राजंय के
मुखंयमंतंी बने थे। आनंदीबेन पर पाटीदार
और दडलत आंदोलन को संभालने में
डिफल रहने का आरोप था। रंपाणी ने
अपनी राजनीडतक कुशलता का पडरचय
1974 के सामाडजक राजनीडतक
आंदोलन गुजरात निडनमंाजण आंदोलन के
दौरान डदया था।
यह आंदोलन आडंथजक संकटों और
सािंजजडनक जीिन में भंषंाचार के
डखलाफ छातंों और मधंय िगंज ने डकया था।
यह आंदोलन शीघं ही अनंय संथानों पर भी
फैलने लगा खासकर के समाजिादी नेता
जयपंकाश नारायण की ‘संपूणंज िंांडत’ की
मांग के बाद यह डबहार में बडंे पैमाने पर
फैला। इस आंदोलन की िजह से इंडदरा
गांिी की सरकार डगर गई और पहली बार
मोरारजी देसाई के नेतृतंि में केंदं में गैर-
कांगंेस सरकार बनी। आपातकाल के
दौरान एबीिीपी के नेता के रंप में रंपाणी
करीब एक साल तक जेल में रहे थे।
रंपाणी की राजनीडतक कुशलता और
नेतृतंि कंमता की दुबारा परीकंा साल
2019 के चुनाि में होगी।