Tuesday, October 15

आरे कॉलोनी : न्यायालय ने और पेड़ों के काटने पर रोक लगाई

नयी दिल्ली : मुंबई, (भाषा)। उच्चतम न्यायालय ने मुंबई की आरे कॉलोनी में मेट्रो ट्रेन के डिब्बों का शेड बनाने के लिए और पेड़ काटे जाने पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस बीच महाराष्ट्र सरकार ने स्वीकार किया कि जितने पेड़ काटने की आवश्यकता थी, पहले ही उनकी कटाई की जा चुकी है। पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने की मांग करते हुए कानून के छात्र रिषभ रंजन ने प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई को एक पत्र लिखा था। उच्चतम न्यायालय ने इस पत्र पर स्वत: संज्ञान लिया और विशेष पीठ का गठन किया था। उसी पीठ ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। दशहरा के अवसर पर न्यायालय में एक सप्ताह का अवकाश है। बंबई उच्च न्यायालय ने चार अक्टूबर को आरे कॉलोनी को वन घोषित करने से इनकार कर दिया और मेट्रो शेड स्थापित करने के लिए हरित क्षेत्र में 2,600 से अधिक पेड़ों की कटाई की अनुमति देने के मुंबई नगर निगम के फैसले को खारिज करने से इनकार कर दिया।
हरित कार्यकताओं और स्थानीय निवासियों ने पेड़ों की कटाई का विरोध किया है। फैसले को चुनौती देने वाली गैर सरकारी संगठनों और कार्यकर्ताओं की चार याचिकाओं को उच्च न्यायालय द्वारा खारिज करने के कुछ घंटों बाद मुंबई मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने पेड़ों की कटाई शुरू कर दी थी। इसको लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। पेड़ों की कटाई के दौरान कथित रूप से बाधा डालने और पुलिसकर्मियों पर हमला करने के आरोप में 29 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया था। अधिकारियों ने बताया कि स्थानीय अदालत से जमानत मिलने के बाद उन्हें सोमवार सुबह जेल से रिहा कर दिया गया। महाराष्ट्र और मुंबई के नागरिक निकाय की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की विशेष पीठ के समक्ष कहा कि मेट्रो शेड के लिए जितनी पेड़ों की कटाई करनी थी, वह पहले ही की जा चुकी है और वे और पेड़ नहीं काटेंगे।
पीठ ने कहा, ‘‘हम इसका फैसला करेंगे। अब और पेड़ नहीं काटें।’’ पीठ ने सुनवाई की अगली तारीख तक यथास्थिति बनाए रखने को कहा। पीठ ने कहा कि महाराष्ट्र राज्य की ओर से पेश तुषार मेहता, सॉलिसिटर जनरल ने कहा है कि सुनवाई की अगली तारीख तक और पेड़ नहीं काटे जाएंगे। इस स्थिति में यह बयान काफी उचित है। इस मामले में अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को होगी। विपक्षी राकांपा नेता सुप्रिया सुले ने न्यायालय के फैसले का स्वागत किया लेकिन कहा कि महाराष्ट्र सरकार का यह मानना चिंताजनक बात है कि जरूरी पेड़ों की कटाई पहले ही की चुकी है। शिवसेना ने कहा कि अदालत का आदेश पर्यावरणविदों के लिए ‘‘नैतिक जीत’’ है। शिवसेना की प्रवक्ता मनीषा कायंदे ने कहा कि आरे क्षेत्र को जंगल नहीं घोषित करना सरकार की गलती थी और अफसोस जताया कि दो दिनों में करीब 2100 पेड़ काट दिए गए। विधान पार्षद ने कहा, ‘‘आरे में यथास्थिति बनाए रखने का उच्चतम न्यायालय का निर्देश परियोजना का विरोध कर रहे पर्यावरणविदों और मुंबई के बाशिंदों की नैतिक जीत है।’’

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