Saturday, August 15, 2020
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जेएनयू हिंसा: डेटा सुरक्षित रखने की याचिका पर अदालत ने पुलिस, व्हाट्सऐप, गूगल से जवाब मांगा

नयी दिल्ली, (भाषा)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में पांच जनवरी को हुई हिंसा की घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज, डेटा और अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखने की मांग करने वाली विश्वविद्यालय के तीन प्रोफेसरों की याचिका पर दिल्ली पुलिस, दिल्ली सरकार, व्हाट्सऐप, ऐपल और गूगल कंपनी से सोमवार को जवाब मांगा।
पुलिस ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि उसने जेएनयू प्रशासन से हिंसा की सीसीटीवी फुटेज संभाल कर रखने और उसे सौंपने को कहा है। न्यायमूर्ति ब्रृजेश सेठी ने कहा कि इस मामले पर सुनवाई मंगलवार को होगी। दिल्ली सरकार के स्थायी अधिवक्ता (अपराध) राहुल मेहरा ने उच्च न्यायालय को बताया कि हिंसा की सीसीटीवी फुटेज संरक्षित रखने के पुलिस के अनुरोध पर जेएनयू प्रशासन की ओर से अभी तक कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है। मेहरा ने अदालत को बताया कि पुलिस ने जेएनयू हिंसा के संबंध में व्हाट्सऐप को भी लिखित अनुरोध भेज दो ग्रुपों का डेटा सुरक्षित रखने को कहा है। इन व्हाट्सऐप ग्रुप के नाम हैं ‘यूनिटी अगेंस्ट लेफ्ट’ और ‘फ्रेंड्स ऑफ आरएसएस’। इन समूहों के संदेश, तस्वीरें और वीडियो तथा सदस्यों के फोन नंबर सुरक्षित रखने का अनुरोध किया गया है।
याचिका जेएनयू के प्रोफेसर अमीत परमेश्वरन, अतुल सूद और शुक्ला विनायक सावंत ने दायर की। याचिका में दिल्ली पुलिस आयुक्त और दिल्ली सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश देने की मांग की गई। याचिका में दिल्ली पुलिस को जेएनयू परिसर के सभी सीसीटीवी फुटेज प्राप्त करने का निर्देश देने की भी मांग की गई। पांच जनवरी को नकाबपोश लोगों की भीड़ ने जेएनयू परिसर में घुसकर तीन हॉस्टलों के छात्रों को निशाना बनाया था। उन लोगों के हाथों में लाठियां और लोहे की छड़ें थीं। उन्होंने छात्रों को पीटा और परिसर में तोड़फोड़ की। इस घटना के सिलसिले में वसंत कुंज (उत्तर) पुलिस थाने में तीन प्राथमिकी दर्ज करवाई गई थी।
याचिका में दावा किया गया कि हिंसा की घटना से संबंधित डेटा, जानकारी, साक्ष्य और सामग्री का व्हाट्सऐप प्लेटफॉर्म के जरिए आदान-प्रदान हुआ। इस घटना के जिम्मेदार लोगों के पंजीकृत फोन नंबर भी इसमें शामिल हैं। इसका डेटा बैक-अप महत्वपूर्ण सबूत है। इसमें कहा गया कि घटना से संबंधित साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए जेएनयू शिक्षक संघ ने पुलिस आयुक्त, व्हाट्सऐप और गूगल को अनुरोध भेज इस सभी सामग्री को जांच उद्देश्य के लिए सुरक्षित प्राप्त करने का अनुरोध किया है।
याचिका में कहा गया कि पुलिस ने इस अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया है। ऐसे में याचिकाकर्ताओं को संदेह है कि अदालत या पुलिस आयुक्त के निर्देश के अभाव में संबद्ध साक्ष्यों को उचित तरीके से सुरक्षित नहीं रखा जाएगा।
इसमें यह भी दावा किया गया कि जहां तक याचिकाकर्ताओं को जानकारी है या समाचारों में जो कुछ आया है उससे ऐसा लगता है कि पुलिस ने अब तक सीसीटीवी फुटेज प्राप्त नहीं की है,जो कि बेहद महत्वपूर्ण साक्ष्य है।

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