Thursday, September 19

पेट के रोग : कारण और उपचार

पेट ही हर बीमारी की जड़ होता है। ज्यादातर रोग पेट की खराबी की वजह से होते हैं। यदि पेट बिगड़ता है तो सारा शरीर गड़बड़ा जाता है। पेट में ही भोजन पचाने वाल जटारग्नि भी होती है। जब यह मंद पड़ती है तब पेट फूलनाए पेट दर्द, अफरा, अर्जीण, पेट में गैस, वायु गोला, खूनी दस्त,अतिसार और पेचिश व मरोड़ होने लगती है। कैस आप इन सभी रोगों को दूध और घी के बताए जाने वाले प्रयोगों से कर सकते हो वैदिक वाटिका आपको बता रही है।
सामान्य पेट का दर्द
पेट में सामान्य दर्द होने का मुख्य कारण है अधिक चटपटी चीजें खाने व पीने से पेट में गैस होने की वजह से, मल के रूकने के कारण और आंतों में खराबी आदि होने की वजह से होता है।
पेट दर्द के मुख्य लक्षण
4मल का त्याग न हो पाना
4पेट में गुड़गुडाहट होना
4अफारा होना
4खट्टी डकारें आना
4पेट का फूलना
4पेट में तेज दर्द होना आदि मुख्य लक्षण होते हैं।
पेट के रोग का उपचार
4वैदिक उपचार पेट के रोगों से मुक्त होने के लिए
4पेट पर हमेशा देसी घी की मालिश करें।
4रात को सोते समय में दूध में शहद को मिलाकर सेवन करें।
4रात के समय में एक चम्मच इसबगोल की भूसी को दूध में मिलाकर पीना चाहिए।
4एक गिलास दूध में लहुसुन की पंद्रह बूंदों को डालकर पीने से वायु गोले यानि पेट की गैस से निजात मिलता है।
4 हमेशा खाना हल्का ही खाएं।
4चटपटी चीजों का सेवन बहुत ही कम कर दें।
अधिक मात्रा में पानी का सेवन करें। इससे पेट की गंदगी मल के रास्त बाहर चली जाती है।

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