Wednesday, January 29

ब्रजभाषा साहित्य एवं लोककला संस्थान ने उठायी ब्रजभाषा अकादमी बनाने की माँग

नेशनल एक्सप्रेस ब्यूरो
मथुरा । ब्रजभाषा साहित्य एवं लोककला संस्थान ने ब्रजभाषा कवि सम्मेलन का एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कवि एवं साहित्यप्रेमियों ने ब्रजभाषा को क्षरण से बचाने तथा संरक्षण संवर्द्धन के उद्देश्य से ब्रजभाषा अकादमी बनाये जाने की माँग उठाई । इस अवसर पर काव्यपाठ से ब्रजभाषा एवं ब्रज संस्कृति का प्रचार प्रसार करने वाले कवियों को संस्थान द्वारा सम्मानित किया गया ।
रविवार को गोविन्द नगर स्थित सर्वेश्वरी सदन में पदमश्री मोहन स्वरूप भाटिया माँ सरस्वति के समक्ष ने दीपप्रज्वलन कर आयोजन का शुभारम्भ किया । अपने उद्बोधन में श्री भाटिया ने मथुरा के जनप्रतिनिधियों के ब्रजसंस्कृति के प्रति उदासीन होने पर दुख व्यक्त किया । उन्होने कहा कि मुख्यमंत्री ने लाखो करोणों की धनराशि ब्रज विकास पर दी लेकिन ब्रज साहित्य, संस्कृति के संवर्धन एवं संरक्षण पर कुछ भी कार्य नहीं हुआ । ब्रज के गावों में लोक संस्कृति की अमूल्य धरोहर शनैः शनैः समाप्त हो रही हैं ।
कवि सम्मेलन में बलदेव से पधारे ब्रजभाषा के कवि राधा गोविंद पाठक ने ‘प्रेम की भाषा जि मंजू मनोहर, चित्त हरै हुलसै ब्रजभाषा, धैंनुऔ कल्प समान अनूठी, मान गुमान नसै ब्रजभाषा’’ कविता पढ़ी । मोहनलाल मोही ने ‘सावन झूला वृन्दावन, फागुन बरसाने की होरी, लठ्ठ मारके प्रीत लुटावे, ब्रज में गामन की गोरी’ गीत गाया । कवि अनुपम गौतम ने ‘ब्रज की रज में जिन वास कियो कछु संत भये कछु ईष भये’ पढ़कर ब्रजरज की महिमा को गया । कवि चन्द्र प्रकाश शर्मा, नारायण सिंह, गोपाल गोप, जितेंद्र विमल, रेणु उपाध्याय, अंजू शर्मा, गोपाल गोप आदि ने अपनी रचनाये पढीं । इन्हें ब्रजभाषा की उत्कृष्ट सेवा के लिए ब्रज भाषासाहित्य सेवा सम्मान से अलंकृत किया गया।
संस्थान की निदेशक एवं लोकगायिका डॉ0 सीमा मोरवाल ने अपने वक्तव्य में कहा ही ब्रजभाषा अत्यंत समृद्ध रही है । देश के विभिन्न राज्यों के कवियों व संतों ने इस भाषा का प्रयोग अपनी वाणी में किया है । पंजाब में गुरु नानक जी, राजस्थान की मीराबाई, पूरब में तुलसीदास जी तथा उर्दू भाषा के कवि रसखान एवं ताजबीवी आदि ने भी अपने काव्य मैं इसे अपनाया। देश मे जब पिंडारी हुआ करते थे तब भी इस भाषा मे कविता लिखी गयी हैं । उन्होने कहा कि आज ब्रज की पहचान इस मीठी भाषा पर अपना अस्तित्व बचाये रखने का संकट आ गया है। शासन और प्रशासन का कोई ध्यान इस ओर नही है।
कहा कि ब्रज की जनता ने अनेकों मंत्री विधायक सांसद दिए हैं लेकिन ब्रज में आज तक ब्रजभाषा अकादमी नहीं बन सकी । सब दौड़ में लगे हैं पर जब हमारी बोली ही नही बचेगी तो ब्रज संस्कृति का ह्रास होने से कोई नहीं बचा सकता। तीर्थ बिकास परिषद दीवारों को रंगवाने का कार्य कर रहे हंै उस पर कृष्ण लीला के साथ यदि ब्रज के कवियों जैसे सूरदास आदि के पद लिखवाये जाए तो जनमानस उनको पढेगा । संस्कृति विभाग मयूर नृत्य, फूलों के होली के अलावा किसी और लोकविधा पर ध्यान ही नहीं दे रहा है ।
कार्यक्रम मे संजय सिंह, हरीश ठाकुर, डॉ राजेन्द्र कृष्ण अग्रवाल, चंद्रशेखर शर्मा, विवेक मथुरिया, रजत शुक्ला संजय शर्मा अखिलेश गौड़ भरत खण्डेलवाल, माधुरी शर्मा, अनिल गौतम, महेश शर्मा, गंगाधर अरोड़ा, डॉ दीपक गोस्वामी आदि उपस्थित रहे।