Saturday, March 28

सीएमओ बोले बी.ई.एम.एस कोई डिग्री नहीं डाक्टर बोला एम.बी.बी.एस से कम नहीं

नेशनल एक्सप्रेस ब्यूरो
मथुरा। तीन लोक से न्यारी कान्हा की नगरी में कुछ भी हो सकता है। यहां तक कि नई डिग्री इजाद कर लोगों का इलाज किया जा सकता है। चाहे विभाग माने या न माने लेकिन विभाग में सैटिंग सब कुछ मानने मनवाने और मनमानी करने का हौंसला दे सकती है। बहुचर्चित इलाज करने वालों का लेखा जोखा रखने वाले विभाग के हाल तो ऐसा है कि विभाग के मुखिया कह रहे हैं कि बीईएमएस कोई डिग्री नहीं होती है जबकि इलाज करने वालों का कहना है कि यह डिग्री न केवल मान्य है बल्कि एमबीबीएस से कम नहीं है। अब ऐसे में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले खुल कर ऐसा कर रहे हैं।
मामला कृष्णा नगर क्षेत्र की कालोनी राधा नगर में डा.एस.के शर्मा का क्लीनिक है। क्लीनिक पर आये दिन झगडे होना आम बात हो गई है। चिकित्सक के इलाज ये कई बार मरीज ठीक होने की बजाय दूसरी कई तरह की परेशानियों में घिर जाते हैं। चिकित्सालय तक मरीजों को लाने के लिए बाकायदा नर्स और ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय झोला झाप चिकित्सक लगे हैं। हर्षित अग्रवाल ने बताया कि इसके लिए इन लोगों को कमीशन भी मिलता है। जब इस बारे में चिकित्सक एसके शर्मा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उनके पास सभी डिग्री ठीक हैं। किसी तरह का वह धोखा मरीजों के साथ नहीं कर रहे हैं। उन्होंने अपने क्लिीनिक के बाहर लगे बोर्ड पर बीईएमएस, एमडी, ईएच एमईडी इलैक्ट्रोपैथी की योग्यता लिख रखी है। जब इस बारे में मुख्य जिला चिकित्साधिकारी डा. शेर सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि बीईएमएस जैसी कोई डिग्री ही डाक्टरी की पढाई में नहीं होती है। उन्होंने कहाकि यह कोई डिग्री या डिप्लोमा नहीं है। अगर किसी ने इस तरह की डिग्री का उल्लेख किया है तो यह लोगों के साथ धोख है। इस तरह के लोगों के खिलाफ समय समय पर अभियान चलाकर सख्त कार्यवाही की जाती रही है। उन्होंने कहाकि फर्जी डिग्री के साथ प्रेक्टिस करने वाले लोग तो पकड़ में आते रहे हैं लेकिन अपनी नई डिग्री इजाद करने का यह नया मामला सामने आया है। इसकी जांच करा कर आवश्यक कार्यवाही अमल में जाई जाएगी। शहर से देहात तक ऐसे चिकित्सकों का जालफैला हुआ है जो बिना किसी मान्य डिग्री या फिर उल्टे सीधे नाम की डिग्री लिख कर लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। हाद तो यह है कि सीएमओ कार्यालय में बाकादा झोलाझाप चिकित्सकों का लेखाजोखा रखने के लिए एक विभाग बनाया हुआ है। इस पटल पर जनपद भर के उन तमाम झोलाछाप चिकित्सकों का हिसाब किताब है जो वर्षों से प्रेक्टिस कर रहे हैं। विभाग हर साल ऐसे चिकित्सकों के खिलाफ अभियान चलाता है, लेकिन ऐसे लोगों पर लगाम कभी नहीं लग पाती है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह अभियान सिर्फ उगाही तक सीमित है। सीएमओ कार्यालय के इस पटल पर महीनेदारी दिये बिना कोई भी झोलाछाप अपनी प्रेक्टिस जारी नहीं रख सकता है। अभियान के नाम पर सिर्फ इस महीनेदारी को पुख्ता करने के लिए दस्तक दी जाती है।

दूसरी ओर विभाग यह लाचारी भी जताता है कि झोलाछापों की प्रेक्टिस को अगर पूरी तरह से बंद करा दिया जाए तो मरीजों को इलाज नहीं मिल सकेगा। सरकारी अस्पतालों की क्षमता इतनी ज्यादा नहीं हैं, संसाधन सीमित हैं और शहर के निजीचिकित्सालयों का खर्चा उठाना हर किसी के बस की बात नहीं है। ऐसे में विभाग चाहकर भी इन लोगों पर नकेल कसना नहीं चाहता है। दूसरा कारण आमदनी का भी है। झोलाछापों पर अंकुष लगने के बाद इस आमदीन पर भी अंकुष लग जाएगा। हालांकि यह फर्जी चिकित्सक कई बार आम आदमी के लिए जानलेवा साबित होते रहे हैं। यहां तक कि अवैधरूप से होने वाले गर्भपात बडी संख्या में ऐसे चिकित्सकों द्वारा ही कराए जाते हैं।
गोवर्धन परिक्रमा मार्ग में ऐसे ही एक चिकित्सक द्वारा एक युवती का गर्भपात किये जाने के मामले में युवती की मौत हो गई थी। बाद में थाना मगोर्रा पुलिस ने चिकित्सक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। दूसरे कई मामले भी इसी तरह के सामने आते रहे हैं।