Friday, November 15

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रामहि केवल प्रेमु पिआरा।  जानि लेउ जो जान निहारा॥

रामहि केवल प्रेमु पिआरा। जानि लेउ जो जान निहारा॥

Delhi, National, Uncategorized, UttarPradesh
विपिन गुप्ता (संस्थापक / प्रधान संपादक: नेशनल एक्सप्रेस) विश्व के सबसे महत्वपूर्ण विवादास्पद मुकदमे वह परमपिता परमात्मा मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्म स्थल से जुड़े हुए 400 साल पुराने ऐतिहासिक व देश की आजादी के 70 वर्ष पुराने मुकदमे का फैसला 9 नवंबर को यानि भगवान राम की हिंदू पंचांग के अनुसार नवमी तिथि के जन्म के अंक के पक्ष वाले दिन ही संयोग से इसका फैसला रामलला विराजमान के पक्ष में आने से जहां हिंदू सनातन धर्मी तथा सर्व धर्मों में आस्था रखने वाले विश्व की सारी जनता के लिए यह एक ऐतिहासिक सेकुलर जीत है। इस मुकदमे का पटाक्षेप करने का सौभाग्य एवं श्रेय देश के मुख्य न्यायाधीश श्री रंजन गोगोई के नेतृत्व में गठित पांच सदस्यीय पीठ को जाता है जिन्होंने देश के इस सबसे लंबे व विवादित मुकदमे का निस्तारण करने का दृढ़ संकल्प लेते हुए इसकी सुनवाई प्रतिदिन करते हुए अथक प्रयास से

दूषित हरी सब्जियों से बीमारियां

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मैं एक दिन सुबह सोकर उठा तो पूर्ण उज्ज्वल सूरज और नीला आसमान लिए धौलाधर मेरे सामने झिलमिला उठा। बर्फ से ढकी चोटियां विज्ञापनों में एक साफ पॉलिश वाले दांतों की छवि की तरह थीं। जब मैंने हिमाचल के स्वास्थ्यप्रद वातावरण को देखा तो मुझे दिल्ली के एक मित्र ने एक अजीब सा झटका दिया, जिसने मुझे मास्क पहने एक तस्वीर भेजी जो स्क्रीन पर भयंकर लग रही थी। पहले उसने मुझे झटका दिया क्योंकि वह एक आतंकवादी की तरह लग रहा था, लेकिन बाद में मैंने नेट और टेलीविजन पर कई और खोज की, जो अपने चेहरों को मुखौटों से ढक रहे थे और अपने सबसे प्यारे शहर दिल्ली की सड़कों पर चल रहे थे जहां मैं बड़ा हुआ और जिसे मैंने दस साल पहले अपने आप को हिमाचल के हरे-भरे जंगलों के बीच स्थानांतरित करने के लिए छोड़ दिया था। इसी तरह शहरों से गांवों की ओर लोग क्यों नहीं आते तथा शहरों के बढ़ते प्रदूषण से बचते क्यों नहीं, विशेषतः तब जब उनके पास

घंटी चढ़ाने की है मान्यता

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कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा कार्तिक पूर्णिमा कही जाती है। इस दिन महादेवजी ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का संहार किया था। इसलिए इसे ‘त्रिपुरी पूर्णिमा’ भी कहते हैं। इस दिन यदि कृतिका नक्षत्र हो तो यह ‘महाकार्तिकी’ होती है, भरणी नक्षत्र होने पर विशेष फल देती है और रोहिणी नक्षत्र होने पर इसका महत्त्व बहुत अधिक बढ़ जाता है। इस दिन संध्या समय भगवान का मत्स्यावतार हुआ था। इस दिन गंगा स्नान के बाद दीप-दान आदि का फल दस यज्ञों के समान होता है। इस दिन गंगा-स्नान, दीपदान, अन्य दानों आदि का विशेष महत्त्व है। ब्रह्मा, विष्णु, शिव, अंगिरा और आदित्य ने इसे ‘महापुनीत पर्व’ कहा है। इसलिए इसमें गंगा स्नान, दीपदान, होम, यज्ञ तथा उपासना आदि का विशेष महत्त्व है। इस दिन कृतिका पर चंद्रमा और विशाखा पर सूर्य हो तो ‘पद्मक योग’ होता है जो पुष्कर में भी दुर्लभ है। इस दिन कृतिका पर चंद्रमा और बृहस्पति हो तो य

नानक देव के नाम पर पाकिस्तान न कर दे कोई खेल

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निश्चित रूप से यह खुशनुमा अहसास है कि गुरु नानकदेव जी के जन्मोत्सव पर पाकिस्तान स्थित दरबार साहिब में अब सालभर भारत से श्रद्धालु जा सकेंगे। भारतीय सीमा से महज चार किलोमीटर दूर इस पवित्र स्थली पर सरहदी बंदिशें फिलहाल हट गयी हैं। भारत सरकार ने तनावपूर्ण माहौल के बीच अपनी ओर से किसी तरह की हीलाहवाली भी नहीं की। पाकिस्तान पहले से ही दावा करता रहा है कि उसने अतिरिक्त बजट रखकर गलियारे के काम को तय समय पर पूरा किया है। हालांकि यह बात किसी से नहीं छिपी है कि अतीत में पाकिस्तान ने खालिस्तान का खुलकर समर्थन किया है। उसने इसकी आड़ में आतंकवाद को प्रश्रय दिया है। पाकिस्तान से हमें सतर्क रहने की जरूरत है। करतारपुर गलियारे को लेकर जहां उत्साह का माहौल है, वहीं सीमापार से बार-बार विवादों का उठना भी बेहद चिंताजनक है। इस गलियारे की परियोजना की घोषणा के बाद से ही कभी बयानों के जरिये तो कभी फैसलों से पाकिस्त

क्षेत्रों में करोड़ों की संख्या में नौकरियां, व्यापार ठप्प हुआ और उद्योग धंधों पर ताले लटके: अशोक बुवानीवाला

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भिवानी। नोटबंदी के काले अध्याय की तीसरी बरसी पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को देश से माफी मांगनी चाहिए क्योंकि केन्द्र सरकार के नोटबंदी के जो उद्देश्य गिनवाऐं थे उनमें से एक भी पूरा नहीं हुआ बल्कि इस फैसले ने देश की अर्थव्यवस्था को ही बर्बाद कर दिया। ये बात हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता अशोक बुवानीवाला ने आज अर्थव्यवस्था को बर्बादी की कगार पर पहुंचाने वाली नोटबंदी के तीन वर्ष पूरे होने पर कही। बुवानीवाला ने कहा कि सेंटर फॉर मॉनिटरिंग के भयावह आंकड़े लगातार बता रहे हैं कि नोटबंदी के बाद संगठित और असंगठित क्षेत्रों में करोड़ों की संख्या में नौकरियां गई हैं। व्यापार ठप्प हो गया और उद्योग धंधों पर ताले लटक गए। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि व दिहाड़ी-मजदूरी करने वाले गरीब लोग भी इससे अछूते नहीं रहें और उनका काम-धंधा भी चौपट हो गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा की गई नोटबंदी देश की

पीएम मोदी ने करतारपुर गलियारे का उद्घाटन किया, तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को किया रवाना

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डेरा बाबा नानक (पंजाब)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को यहां करतारपुर गलियारे का उद्घाटन किया और 500 भारतीय श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को रवाना किया। यह गलियारा पाकिस्तान में स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब को पंजाब के इस जिले में स्थित डेरा बाबा नानक से जोड़ता है। गुरुद्वारा दरबार साहिब में ही सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव ने अपने जीवन के अंतिम वर्ष गुजारे थे। मोदी ने अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने नेतृत्व में 500 भारतीय श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को गलियारे के रास्ते गुरुद्वारा दरबार साहिब के लिये रवाना किया। यह गलियारा गुरुनानक देव के 550वें प्रकाश पर्व के अवसर पर आम लोगों के लिये खोला गया है। प्रधानमंत्री ने गलियारे में भारत की तरफ यात्री टर्मिनल की इमारत का भी उद्घाटन किया जिसे एकीकृत जांच चौकी के तौर पर भी जाना जाएगा जहां तीर्थयात्रियों को नए बने साढ़े चार किलो

महात्मा गांधी जी की नजर में पर्यावरण

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गांधी जी के समय में न तो पर्यावरण शब्द इतना प्रचलित था और न पर्यावरण की समस्याएं ही इतनी गंभीर थीं जितनी आज हैं। गांधी जी ने पर्यावरण की जगह प्रकृति शब्द का उपयोग किया था। उनके द्वारा व्यक्त विचारों तथा लेखों में भविष्य की पर्यावरणीय समस्याओं के प्रति उनकी चिंता झलकती थी। उन्होंने इन पर न केवल चिंता जताई अपितु समझाइश देकर चेतावनी भी दी। वर्तमान में पर्यावरण से जुड़ी सारी चिंताएं मानव केंद्रित हैं क्योंकि मानव आज अपने तथा कथित विकास के नाम पर पर्यावरण को जीवन-दाता मानने के बजाय एक दास या सेवक मानने लगा है। गांधी जी की सोच जीव-केंद्रित पर्यावरण की थी जिसमें मानव के साथ-साथ पेड़-पौधों एवं जीव-जंतुओं को भी समाहित कर महत्त्व दिया जाता है। संभवतः गांधी जी के इसी विचार से प्रेरित होकर हमारे देश में ‘पर्यावरण संरक्षण अधिनियम-1986’ में पर्यावरण में हवा, पानी व भूमि के साथ-साथ पेड़-पौधों एवं जीव-जं

सफलता और असफलता

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युवा जीवन में कई उतार-चढ़ाव आते हैं और वह इसका तत्काल समाधान चाहते हैं। वह चाहते हैं कि उनके लिए सब कुछ अभी इसी पल में हो जाए। जब तक वह अपनी इच्छाओं और आकांक्षाओं को संभालना नहीं सीखेंगे, तब तक वह कुछ गलत रास्तों का भी चुनाव करते रहेंगे। दरअसल, हर युवा खुशी और उत्साह के लिए तरसता रहता है। अध्यात्म वह है, जो मन में उत्साह को प्रज्वलित करता है। हमारे युवाओं को यह एहसास करने की जरूरत है कि वे मानवीय गुणों के साथ ही रचनात्मक कार्य कर सकते हैं। उन्हें यह भी एहसास करने की जरूरत है कि उनमें बहुत क्षमता है और वे जो कुछ भी हासिल करना चाहते हैं, उसे पाने की शक्ति भी उन में है। वास्तव में सिर्फ भौतिक वस्तुएं या सुविधाएं किसी को आराम नहीं दे सकती हैं। हर कोई शांति, स्थिरता, चैन और सच्चे प्रेम के लिए तरस रहा है। आध्यात्मिकता उन्हें यह सब प्रदान कर सकती है। सेवा भारतीय अध्यात्म का एक महत्त्वपूर्ण अंग है

नदी संरक्षण के अधूरे कदम

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कुंभ मेले के दौरान केंद्र सरकार ने टिहरी बांध से पानी अधिक मात्रा में छोड़ा था जिससे प्रयागराज में पानी की मात्रा एवं गुणवत्ता दोनों में सुधार हुआ था। इस कदम के लिए सरकार को साधुवाद, अधिक पानी आने से प्रदूषण का घनत्व कम हो गया और तीर्थ यात्रियों को पूर्व की तुलना में अच्छा पानी उपलब्ध हुआ, लेकिन कुंभ मेले के बाद परिस्थिति पुन: पुरानी चाल पर आ गई दिखती है। उद्योगों और नगरपालिकाओं से गंदा पानी गंगा में अभी भी छोड़ा ही जा रहा है। यद्यपि मात्रा में कुछ कमी आई हो सकती है। देश की नदियों को स्थायी रूप से साफ करने के लिए हमें दूसरी रणनीति अपनानी पड़ेगी। पर्यावरण मंत्रालय ने कुछ वर्ष पहले आईआईटी के समूह को गंगा नदी के संरक्षण का प्लान बनाने का कार्य किया था। आईआईटी ने कहा था कि उद्योगों पर प्रतिबंध लगा दिया जाए कि वे एक बूंद प्रदूषित पानी भी बाहर नहीं छोड़ेंगे। जितने पानी की उन्हें जरूरत है, उतना ल

पश्चिम बंगाल में वकील गुरुवार को ‘कलमबंद’ प्रदर्शन करेंगे

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कोलकाता, (भाषा)। पश्चिम बंगाल बार काउंसिल ने वर्द्धमान में महिला वकील की हुई हत्या के विरोध में गुरुवार को राज्य की सभी अदालतों में कलम बंद प्रदर्शन का ऐलान किया है। पश्चिम बंगाल बार काउंसिल के उपाध्यक्ष सिद्धार्थ मुखोपाध्याय ने बताया कि बार काउंसिल की बुधवार को हुई बैठक में वर्द्धमान में महिला अधिवक्ता मिताली घोष की हत्या के विरोध में प्रदर्शन करने का फैसला किया गया। 57 वर्षीय घोष को 27 अक्टूबर को पूर्वी वर्द्धमान के अझापुर स्थित उनके घर में मृत पाया गया था। मुखोपाध्याय ने कहा कि हमारी मांग है कि इस हत्याकांड की सही और तीव्र जांच की जाए। उन्होंने बताया कि कलकत्ता उच्च न्यायालय और अंडमान निकोबार द्वीप स्थित उसकी सर्किट पीठ सहित राज्य की सभी अदालतों के वकील इस प्रदर्शन में शामिल होंगे।