Sunday, November 17

आईडीबीआई बैंक में 9,300 करोड़ रुपये की पूंजी डालने को मंत्रिमंडल की मंजूरी

नयी दिल्ली। सरकार ने मंगलवार को आईडीबीआई बैंक में 9,300 करोड़ रुपये की पूंजी डालने की मंजूरी दे दी। इसका मकसद बैंक का पूंजी आधार बढ़ाना और इसे मुनाफे में लाना है। मंत्रिमंडल के निर्णयों के बारे में मीडिया से बातचीत करते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि इससे आईडीबीआई बैंक का कायाकल्प करने की प्रक्रिया पूरी होगी। बैंक को वापस लाभ में लाने के साथ ही बैंक सामान्य तौर पर कर्ज वितरण कार्य कर सकेगा। वहीं सरकार को उपयुक्त समय पर अपना निवेश वापस लेने का विकल्प भी इसमें होगा।
उन्होंने कहा कि कुल 9,300 करोड़ रुपये की पूंजी जरूरत में भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) अपनी 51 प्रतिशत हिस्सेदारी के अनुरूप 4,743 करोड़ रुपये का निवेश करेगा। शेष 49 प्रतिशत 4,557 करोड़ रुपये की राशि एक बारगी आधार पर सरकार इसमें डालेगी। उल्लेखनीय है कि आईडीबीआई बैंक में एलआईसी ने अपनी हिस्सेदारी जनवरी में बढ़ाकर 51 प्रतिशत कर दी। इसके बाद बैंक में सरकार की हिस्सेदारी 86 प्रतिशत से घटकर 46.46 प्रतिशत पर आ गयी। एलआईसी बैंक में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ नियंत्रक भागीदार बन गयाय।  पूंजी डालने के बाद आईडीबीआई बैंक खुद धन जुटाने में सक्षम होगा। इससे उसके अगले साल तक भारतीय रिजर्व बैंक के त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) के दायरे से बाहर आने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, ‘‘ पूंजी डालने का यह काम एकदम नकदी रहित होगा। यह पूंजी पुनर्पूंजीकरण बॉंड के जरिये डाली जायेगी। सरकार बैंक में पूंजी डालेगी और बैंक उसी दिन उस पूंजी से सरकार के पुनर्पूंजीकरण बांड की खरीदारी करेंगे। इसका तरलता और चालू वर्ष के बजट पर भी कोई असर नहीं होगा।’’ आईडीबीआई बैंक में एक बारगी पूंजी डालने की जरूरत है ताकि उसके पुराने फंसे हुए कर्ज के हिसाब-किताब को साफ सुथरा किया जा सके। जून 2018 में इसका शुद्ध फंसा कर्ज 18.8 प्रतिशत था जो जून 2019 में घटकर आठ प्रतिशत रह गया है। इसके लिए पूंजी शेयरधारकों से आएगी। एलआईसी की इसमें 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है और बीमा नियामक उसे इससे अधिक की अनुमति नहीं देता है। पिछले साल अगस्त में मंत्रिमंडल ने बैंक में नियंत्रक हिस्सेदारी एलआईसी को बेचने की अनुमति दी थी। आईडीबीआई बैंक की देशभर में 800 शाखाएं और करीब डेढ़ करोड़ खुदरा ग्राहक हैं। बैंक के कर्मचारियों की संख्या 18,000 है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में बैंक का शुद्ध घाटा 3,801 करोड़ रुपये रहा। यह 2018-19 की अप्रैल-जून तिमाही में 2,410 करोड़ रुपये था।