Thursday, May 28

दिल्ली की शिखा मल्होत्रा को मिला फिल्म ‘काँचली’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का ख़िताब

मुम्बई। प्रसिद्ध लेखक विजयदान देथा की कहानी ‘केंचुली’ पर आधारित हिंदी फिल्म ‘कांचली’ रिलीज़ होने के मात्र एक महीने में ही पुरस्कारों की श्रेणी में शामिल हो गई है। गत रात मुम्बई में आयोजित हुए ‘सिनेमा आजतक अचीवर्स अवार्ड 2020’ (CINEMA AAJTAK -Achievers award 2020) में फिल्म की नायिका सुश्री शिखा मल्होत्रा को ‘श्रेष्ठ नवोदित अभिनेत्री’ (Best Debut Actress) के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ‘कांचली’ फिल्म को मिलने वाला यह पहला पुरस्कार है, फिल्म के लेखक-निर्देशक देदीप्य जोशी भी इस मौके पर मौजूद थे।

शिखा मल्होत्रा ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि कांचली फ़िल्म और उससे जुड़ी सभी बातें उन्हें बहुत ही प्रिय है क्योंकि ये उनकी डेब्यू फिल्म है और हमारे जीवन के हर क्षेत्र में हर पहली बात जो घटती है वो यादगार ही रह जाती है, तो कांचली मेरे लिए वही है और रही इस पुरस्कार की बात तो यह तो मेरे अंत समय तक दिल के करीब रहेगा क्योंकि कांचली के लिए मिलने वाला यह मेरा पहला पुरस्कार है! देदीप्य जोशी ने बताया कि कजरी किरदार को जिस प्रकार शिखा ने जीवंत किया है और पर्दे पर साकार किया है उसके लिए वो बेस्ट डेब्यू एक्ट्रेस की हकदार तो हैं ही लेकिन मुझे लगता है उनको जल्द इस साल की श्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार भी कहीं ना कहीं मिलने वाला है। आपको बता दें कि कांचली से पहले भी कई वरिष्ठ फिल्मकार विजयदान देथा की कहानियों पर फिल्में बना चुके हैं जिसमे सबसे चर्चित शाहरुख खान द्वारा निर्मित-अभिनीत एवं अमोल पालेकर निर्देशित फिल्म ‘पहेली’ सबसे मुख्य नाम है। कांचली 7 फरवरी 2020 को भारत के 45 शहरों में रिलीज़ हो चुकी है और जहां आजकल की फिल्में एक हफ्ते में ही सिनेमा घरों से उतर जाती है वहीं कांचली 2 हफ्ते तक बॉक्स ऑफिस की खिड़की पर जमी रही है। यह पूछने पर कि जो दर्शक कांचली को देखने से वंचित रह गए हैं वो कैसे इस फ़िल्म को देख सकते है तो जोशी ने बताया कि कांचली शीघ्र ही डिजिटल प्लेटफार्म पर आ रही है और मुझे लगता है जिस प्रकार सिनेमा प्रेमी दर्शकों ने बॉक्स ऑफिस पर फिल्म को सराहा है उसी प्रकार हमारी यह फ़िल्म डिजिटली भी खूब देखी और पसंद की जाएगी। जाते-जाते अभिनेत्री शिखा ने कहा यहां मैं एक बात जोड़ना चाहूंगी कि हमारी फिल्म काँचली, छपाक व थप्पड़ की तरह ही महिलाओं स्वतंत्रता की बात करती है और इसे महिलाओं को तो देखना ही चाहिए और साथ ही पुरुषों को भी देखना जरूरी है क्योंकि कांचली से उन्हें समझ आएगा कि सामाजिक जीवन में जीवन जीने के लिए क्या करना है और क्या नहीं।