Home Bihar बार लाइसेंसधारियों को शुल्क में राहत दी जाय-चैंबर

बार लाइसेंसधारियों को शुल्क में राहत दी जाय-चैंबर

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नेशनल एक्सप्रेस ब्यूरो,
झारखंड:1 नवम्बर 2020 से कंटेनमेंट जोन के बाहर स्थित होटल,रेस्तरां एवं बार के आरंभ होने के साथ ही संचालकों पर एकमुश्त बार लाईसेंस शुल्क जमा कराने के बोझ से उत्पन्न होनेवाली कठिनाईयों के समाधान हेतु आज फेडरेशन ऑफ झारखण्ड चैंबर ऑफ काॅमर्स एण्ड इन्डस्ट्रीज ने उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के सचिव विनय कुमार चौबे को पत्राचार किया।
चैंबर महासचिव धीरज तनेजा ने कहा कि बार लाईसेंसधारियों को मौखिक रूप से पूरे एक वित्तिय वर्ष का लाईसेंस शुल्क जमा करने की बात कही गई है जिस कारण बार संचालक अपना व्यापार आरंभ करने में असमर्थता महसूस कर रहे हैं।
यह देखें तो लाॅकडाउन के उपरांत अर्थात् 22 मार्च से 31 अक्टूबर 2020 तक सरकार की अनुमति से ही ये व्यापार बंद रहे हैं,ऐसे में जिन्होंने पूर्व में वित्तिय वर्ष 2020-21 का लाईसेंस शुल्क जमा नहीं कराया है,उन्हें लाॅकडाउन की अवधि का भी (1अप्रैल से अक्टूबर 2020 तक) शुल्क जमा कराने की बात करने से व्यापारी चिंतित हैं।
यह भी कहा गया कि सरकार की अनुमति से ही पिछले छह माह से बंद रहे बार के संचालकों द्वारा इस अवधि में भी बिना किसी व्यापार के दुकान का किराया,अपने कर्मचारियों का वेतन, बिजली बिल खर्च सहित अन्य दैनिक खर्चों का वहन किया गया है,ऐसे में व्यापार आरंभ करने के साथ ही एकमुश्त लाईसेंस शुल्क का भुगतान करना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है, जिसपर सरकार को सहानुभूतिपूर्वक चिंतन करने की आवश्यकता है।
श्री तनेजा ने कहा कि लाॅकडाउन के उपरांत अर्थव्यवस्था को गति देने के उद्देश्य से केंद्र व राज्य सरकार द्वारा हर क्षेत्र में व्यापार व उद्योग जगत को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ऐसे में बार संचालकों को भी प्रोत्साहन देने पर विचार करना हितकर होगा।यह आग्रह किया गया कि जिन अनुज्ञप्तिधारियों ने वित्तिय वर्ष 2020-21 का शुल्क जमा नहीं कराया है,ऐसे बार संचालकों से केवल 1 नवम्बर 2020 से 31 मार्च 2021 तक ही अनुज्ञप्ति शुल्क लेने का निर्देश जारी करें।
साथ ही जिन अनुज्ञप्तिधारियों ने वित्तिय वर्ष 2020-21 का शुल्क पूर्व में ही विभाग में जमा करा दिया है,उनके लाॅकडाउन की अवधि के(दो त्रैमासिक अवधि) शुल्क का समायोजन अगले वित्तिय वर्ष 2021-22 के लाईसेंस नवीनीकरण के दौरान करने की व्यवस्था की जाय। सरकार के इस प्रयास से बार संचालकों को पुनः व्यापार आरंभ करने में सुविधा होगी तथा वे निर्बाध रूप से सरकार को राजस्व भी दे पायेंगे।