Home Bihar बिहार: अभी से BJP-JDU में स्ट्राइक रेट पर गुपचुप बहस तेज़, नीतीश...

बिहार: अभी से BJP-JDU में स्ट्राइक रेट पर गुपचुप बहस तेज़, नीतीश चेहरा हैं, नतीजों के बाद वादे टूट भी जाएंगे!

0
बिहार चुनावों में जेडीयू और बीजेपी में सीटों के बंटवारे पर एक फ़ार्मूला तो बन गया है. इस चुनाव में जेडीयू ही बड़े भाई के रोल में दिखेगी.
बिहार: बीजेपी और जेडीयू साथ तो हैं लेकिन एक बात को लेकर दोनों बहुत परेशान भी हैं. अंदर ही अंदर ये चिंता दोनों पार्टियों को मथ रही है. चुनाव नतीजों में बड़ा भाई कौन? मतलब ये कि चुनाव के बाद किस पार्टी के विधायकों की संख्या अधिक रहेगी. जिसके साथ ये आंकड़ा होगा, उस पार्टी का पलड़ा भारी रहेगा. भले ही नैतिक आधार पर क्यों न हो. इससे दोनों पार्टियों के रिश्तों पर दूरगामी असर पड़ सकता है.
जेडीयू और बीजेपी में सीटों के बंटवारे पर एक फ़ार्मूला तो बन गया है. इस चुनाव में जेडीयू ही बड़े भाई के रोल में रहेगी. मतलब ये कि जेडीयू हर हाल में बीजेपी से अधिक सीटों पर लड़ेगी. ये अंतर एक ही सीट का क्यों न हो. आपको याद होगा कि पिछले लोकसभा चुनाव में मामला बराबरी पर छूटा था. बीजेपी और जेडीयू 17-17 सीटों पर लड़ी थी. बाक़ी 6 सीटें चिराग़ पासवान की पार्टी को मिली थीं. बिहार में लोकसभा की कुल 40 सीटें हैं.
सीटों की संख्या का सीधा कनेक्शन स्ट्राइक रेट से है. कितने सीटों पर चुनाव लड़ कर जीते, वो स्ट्राइक रेट कहलाता है. बीजेपी को लगता है जेडीयू के मुक़ाबले उसका ये रेट बेहतर होगा. नीतीश कुमार के ख़िलाफ़ थोड़ी ऐंटीइनकमबेंसी है. पंद्रह सालों के राज के बाद ऐसा हो जाता है. बिहार में इन दिनों इसकी बड़ी चर्चा है. विपक्ष के साथ साथ बीजेपी कैंप के कुछ लोग भी इसे हवा दे रहे हैं. कहा जा रहा है कि नीतीश ने इसीलिए नरेन्द्र मोदी के साथ वाले पोस्टर लगवाए हैं. जिससे मोदी के नाम पर नुक़सान की भरपाई हो सके.
पीएम नरेन्द्र मोदी अपने हर भाषण में नीतीश कुमार की तारीफ़ करते नहीं थकते. उन्होंने तो ये तक कह दिया कि नीतीश हैं तो बिहार में कुछ भी संभव है. अमित शाह से लेकर बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा भी कहते रहे हैं कि बिहार में नीतीश ही गठबंधन के चेहरे हैं. नतीजे चाहें जैसे भी हों, सीटों की संख्या जो भी हो, नीतीश ही सीएम बनेंगे. बीजेपी यही कह रही है. लेकिन राजनीति में वादे और इरादे कब बदल जायें, किसी के नहीं पता. नीतीश बाबू ये जानते हैं और नरेन्द्र मोदी भी.
लोकसभा चुनाव में मामला फ़िफ़्टी फ़िफ़्टी पर छूटा था. लेकिन विधानसभा में जेडीयू अब बीजेपी से अधिक सीटों पर लड़ना चाहती है. जब पिछली बार नीतीश और लालू साथ थे. जेडीयू और आरजेडी, दोनों के खाते में 101 सीटें गई थीं. बाक़ी 41 सीटों पर कांग्रेस लड़ी थी. नतीजे आए तो लालू की पार्टी के  80 और नीतीश की पार्टी के 71 विधायक चुने गए. सीएम तो नीतीश ही बने लेकिन हमेशा उन पर इस बात का जवाब रहा कि आरजेडी के पास अधिक विधायक हैं. इस बार भी अगर बीजेपी का रिकार्ड जेडीयू से बेहतर रहा तो फिर वही कहानी दुहराई जायेगी. बीजेपी नेताओं का एक बड़ा गुट अब एकला चलो के मूड में है. उन्हें लगता है बिहार में पैर पसारने का यही सबसे बढ़िया मौक़ा है. लेकिन ये भी सच है कि पार्टी के पास नीतीश के मुक़ाबले में कोई चेहरा नहीं है. नीतीश भी बीजेपी की इस कमजोरी से वाक़िफ़ हैं. यही उनकी सबसे बड़ी ताक़त है. नीतीश के ख़िलाफ़ और बीजेपी के साथ का माहौल बना कर चिराग़ पासवान भी इसी मुद्दे को हवा दे रहे हैं.