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ममता को हराने के लिए भाजपा जमीनी स्तर पर कर रही काम, 83 फीसदी मतदान केंद्रों तक पहुंची पार्टी: दिलीप घोष

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नेशनल एक्सप्रेस,
नयी दिल्ली, पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने बुधवार को कहा कि पार्टी ने राज्य के 83 प्रतिशत मतदान केंद्रों तक अपनी उपस्थिति दर्ज करा ली है और अगले विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बेदखल करने के लिए जमीनी स्तर पर लगातार काम रही है।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा के लगातार राज्य के दौरे से जहां कायर्कर्ताओं का उत्साह बढ़ेगा वहीं इससे पार्टी के पक्ष में माहौल भी बनेगा।

बिहार विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन से उत्साहित भाजपा ने अगले साल होने वाले बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी है। पार्टी ने इस बार चुनाव में ‘‘एई बार बांग्ला, पारले सामना’’ (अब बंगाल की बारी है, रोक सको तो रोक लो) का नारा दिया है।

घोष ने पीटीआई-भाषा से बातचीत में कहा कि कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों का दमखम समाप्त हो चुका है वहां इस बार के चुनाव में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस की सीधी टक्कर है।

उन्होंने संकेत दिया कि चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के नेता भाजपा में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी की पार्टी के कई नेता वहां घुटन महसूस कर रहे हैं और ‘‘स्वतंत्रता के लिए ऑक्सीजन’’ की तलाश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा एक लोकतांत्रिक पार्टी है जिसके पास कई सारे ‘‘ऑक्सीजन सिलिंडर’’ हैं।

घोष ने बताया कि चुनाव अभियान के प्रभावी प्रबंधन के लिए भाजपा ने स्थानीय मुद्दों और उनकी विशेषताओं के अनुरूप राज्य को पांच क्षेत्रों में बांटा है। इनमें मेदिनीपुर, उत्तर बंगाल, कोलकाता, नबद्वीप और रढ़ बंगा(दक्षिण पश्चिम जिलों) शामिल है।

उन्होंने बताया कि भाजपा ने राज्य में अपने दायरे का विस्तार करते हुए कुल 78,000 में से 65,000 मतदान केंद्रों तक अपनी पहुंच बना ली है।

उन्होंने कहा कि शाह और नड्डा सहित अन्य केंद्रीय नेता हर महीने राज्य का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘अमित शाह जी के हर महीने दौरा करने की संभावना है और उनकी उपस्थिति से कार्याकर्ताओं का उत्साहवर्धन होगा।’’

भले ही राज्य विधानसभा में भाजपा की मौजूदगी बेहद कम है लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और वामपंथी दलों को पीछे छोड़ते हुए भाजपा बंगाल में एक प्रमुख ताकत के रूप में उभरी। उसने राज्य की 42 लोकसभा सीटों में 18 पर जीत दर्ज की थी। तृणमूल कांग्रेस को 22 सीटें मिली थी।