Home Articles प्रिय बन्धुवर जय श्री बालाजी सरकार।

प्रिय बन्धुवर जय श्री बालाजी सरकार।

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गाँधी जी के तीन बन्दरों की कहानी हम सभी ने लगभग सुन रखी है – पहले पाठ्यक्रम में पढ़ाई जाती थी – एक बन्दर ने दोनों हाथों से आँख बंद कर रखीं है – दूसरे ने कान और तीसरे ने मुँह – और लिखा रहता था – बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो और बुरा मत बोलो । व्यक्ति का मन बन्दर का प्रतीक है जो बन्दर करता है – उछलता कूदता रहता है – हमारा मन भी ठीक उसी प्रकार है – शान्त नहीं रहता है ।

उक्त प्रतीक आज के समय में कितना प्रासंगिक है । यदि हम आज भी किसी की बुराई को न देखकर उसकी अच्छाईयों को देखने का अभ्यास कर लें तो हमारी उस व्यक्ति के प्रति धारणा बदल जाएगी- सामान्यतः व्यक्ति मे अच्छाई ज़्यादा होती है परन्तु उसकी कोई कमजोरी उसकी अच्छाइयों को ढक लेती है – जैसे अग्नि को धुआँ ढक लेता है । अगर हम बुरा सुनने लग जाते हैं तो हमारा बुराई सुनने का अभ्यास बन जाता है और धीरे-धीरे हमारे विचारों में नकारात्मकता आने लग जाती हैं । इसलिए हमें बुराई सुनने से बचना चाहिए ।

इसी प्रकार अनेक घटनाएँ घटती हैं जिनके देखने से हमारे मन मस्तिष्क पर ग़लत प्रभाव पड़ता है – बन्दर जिस प्रकार हमेशा उछल कूद करता है उसी प्रकार अप्रिय घटनाएँ हमारे मन को विचलित करती रहती है – रास्ते में चलते समय हम चारों तरफ़ अधिकांश ऐसे विज्ञापन देखते हैं जो हमारे मन को प्रभावित करते है- अश्लील भी होते है – उत्तेजक भी होते है – अत: अन्त:कर्ण को शुद्ध रखने हेतु, हमें इन सब से बचना चाहिए- बहुत से विज्ञापन तो भ्रामक होते ही हैं- कितना कचरा दिमाग़ से चला जाता है । गांधी जी के दूसरे बन्दर बनने से बहुत कुछ बचा जा सकता है ।

तीसरा बन्दर बड़ा सन्देश दे रहा है – अधिकांश हमारे झगड़ों की जड़ तो – हमारी अप्रिय वाणी ही तो है – बुरा न बोलने का मतलब प्रिय बोलने से है – कड़वा बोलना ही तो अधिकांश विवादों के मूल में है । अनर्गल न बोलना – चुप रह जाना – हमारे पारिवारिक जीवन में – सामाजिक जीवन में कितना महत्वपूर्ण है – इसका आभास तब होता है जब हमारा, हमारे शब्दों पर नियंत्रण नहीं रहता है और फिर हम सोचते हैं कि अगर चुप रह जाते तो इस अप्रिय स्थिति से बच सकते थे – परन्तु आपके अप्रिय बोल की कई बार बड़ी क़ीमत लग जाती है – बड़ी मुश्किल से छुटकारा मिल पाता हैं ।

अत: यह हमारे सुखी व शान्त जीवन के लिए आवश्यक है कि हम गांधी जी के तीनों बंदरों 🐒 के माध्यम से दी गई सीख का पालन करें- अनर्गल देखना – सुनना व बोलना तीनों ही हमारे व्यक्तित्व को प्रभावित करते है – हमें अनेक परेशानियों से बचाते हैं । जहां बोलना आवश्यक न हो- चुप रहें।

सस्नेह
कृष्णा- सन्तोष अग्रवाल