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डॉ. हर्ष वर्धन ने कोविड-19 आपात तैयारियों पर मंत्रियों की गोलमेज बैठक को किया संबोधित

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नीति गोपेन्द्र भट्ट
नई दिल्ली।
केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से विश्व स्वास्थ्य संगठन दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र के 73वें सत्र में भाग लिया। इस अवसर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय की निदेशक डॉ. पूनम खेत्रपाल सिंह, विश्व स्वास्थ्य सगंठन के भारत में प्रतिनिधि और डब्ल्यूएचओ स्वास्थ्य आपात कार्यक्रम के क्षेत्रीय आपात निदेशक डॉ. रोडरिको ओफरिन भी उपस्थित रहे। भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए डॉ. हर्ष वर्धन ने कोविड-19 आपात तैयारियों पर मंत्रियों की गोलमेज बैठक में दो बार विचार व्यक्त किए। पहली बार उन्होंने उन तीन महत्वपूर्ण हस्तक्षेप पर चर्चा की, जिनका इस्तेमाल भारत में कोविड-19 के प्रबंधन और गैर-कोविड स्वास्थ्य सेवाएं जारी रखने के लिए किया गया था। बाद में दूसरे दौर में उन्होंने स्वास्थ्य में अधिक निवेश और स्वास्थ्य आपात तैयारियों तथा अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों की क्षमता सुनिश्चित करने के लिए रणनीति पर चर्चा की। भारत में सार्स – सीओवी-2 के फैलाव को जनवरी, 2020 से रोकने तथा बचाव के जन-स्वास्थ्य उपायों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने यात्रा परामर्श जारी करने, विदेशों से आने वाले यात्रियों में से कोविड-19 के पुष्ट पाए गए लोगों की क्वारंटीन सुविधाओं के विकास, सामुदायिक स्तर पर दिशा-निर्देश जारी करने और जांच केन्द्रों की वृद्धि करने, सभी संदिग्ध मामलों की पहचान और जांच करने, लक्षण रहित से लेकर हल्के, मध्यम और गंभीर मामलों के उपचार के लिए कोविड केयर सेंटर विशेष कोविड स्वास्थ्य केन्द्र और विशेष कोविड अस्पताल के रूप में त्रिस्तरीय स्वास्थ्य उपचार केन्द्र स्थापित करने जैसे उपाय किए। डॉ. हर्ष वर्धन ने कोविड-19 के रोगियों के उपचार के लिए आवश्यक पीपीई, वेंटीलेटर और अन्य चिकित्सा मदों का देश में विनिर्माण क्षमता बढ़ाने को उजागर करते हुए कहा कि इससे भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र को फायदा हुआ। उन्होंने कहा कि भारत ने संक्रमण नियंत्रण और रोकथाम, जांच प्रोटोकॉल, नैदानिक प्रबंधन और जैव चिकित्सा कचरा प्रबंधन तथा कोविड और गैर-कोविड स्वास्थ्य केन्द्रों में अपनाए जाने वाले दिशा-निर्देश विकसित किए। उन्होंने राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के लिए वेब आधारित पोर्टल के विकास का उल्लेख किया, जिनसे जांच, अस्पताल में भर्ती, मरीजों को छुट्टी देने, मृत्यु और कोविड-19 के रोगियों के लिए चिकित्सा मदों की आवश्यकता के भावी अनुमान की सूचना और जानकारी तेजी से दी जा सकती है। सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को गैर-कोविड आवश्यक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं की सूचना प्रदान करने के लिए निर्देश भी जारी किए गए। कोविड के प्रबंधन और गैर-कोविड स्वास्थ्य सेवाओं को जारी रखने के लिए किए गए तीन हस्तक्षेप की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया-

  1. भारत में जनवरी, 2020 में जांच प्रयोगशालाओं की संख्या केवल एक थी, जो बढ़ाकर इस समय 1,678 की गई है, जिससे प्रतिदिन 10 लाख नमूनों की जांच की जा सकी।
  2. त्रिस्तरीय कोविड स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों द्वारा प्रदान किया गया अद्वितीय प्रभावी नैदानिक प्रबंधन जिनमें लक्षण रहित से हल्के, मध्यम और गंभीर मामलों के लिए दिशा-निर्देश विकसित किए गए, जिनका उपयोग चिकित्सा समुदाय कर रहा है और इनकी निरंतर समीक्षा, उन्नयन और प्रैक्टिशनरों के बीच इसका प्रसार किया गया।
  3. पुराने रोगों, मैलिजिनेंसी, रक्त व्याधियों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्ग मरीज तथा तत्काल उपचार की आवश्यकता वाले रोगियों को गैर-कोविड आवश्यक देखभाल प्रदान कर उनकी जीवन रक्षा का काम किया गया। सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के लिए निर्देश दिया गया है कि वे अपने स्वास्थ्य केन्द्रों को केवल कोविड-19 के लिए विशेष रूप से निर्धारित न करें, उनमें से कुछ स्वास्थ्य केन्द्रों को गैर-कोविड रोगियों के लिए भी रखा जाए, ताकि तत्काल चिकित्सा उपचार की आवश्यकता वाले रोगियों को स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं मिलती रहें।
    सत्र के दौरान डॉ. हर्ष वर्धन ने भारत में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने, स्वास्थ्य आपात तैयारियों, भावी महामारियों के दुष्प्रभाव को रोकने की कार्रवाई के उद्देश्य से विश्व स्वास्थ्य संगठन के अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों के अंतर्गत शीर्ष क्षमताओं को मजबूत बनाने के लिए मध्यम से दीर्घकालिक रणनीतियों के अमल पर विचार रखे। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू की गई भारत की महत्वपूर्ण ‘प्रधानमंत्री-आत्म निर्भर स्वस्थ भारत योजना’ का भी स्पष्ट उल्लेख किया। इस योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं, स्वास्थ्य आपात तैयारियों और कार्रवाई तथा इसके फलस्वरूप अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों की शीर्ष क्षमता को मजबूत बनाकर बढ़ाया गया है। इससे जन-स्वास्थ्य ढांचे का विस्तार होगा, स्वास्थ्य देखभाल सेवा प्रदान करने में गुणवत्ता और सुधार आएगा, रोग निगरानी प्रणाली मजबूत होंगी तथा रोग के फैलाव पर कार्रवाई सुचारू होगी, जैव सुरक्षा तैयारियां मजबूत होंगी तथा जनसंख्या स्वास्थ्य अनुसंधान का विस्तार होगा।
    डॉ. हर्ष वर्धन ने इन सभी प्रयासों को आत्म निर्भर भारत बनाने के लक्ष्य के साथ जोड़ते हुए कहा कि राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वित दृष्टिकोण अपनाकर साझा संरचना बनाने का काम किया जाएगा। जैव चिकित्सा अनुसंधान और जैव सुरक्षा नीतियों, खाद्य और ड्रग सुरक्षा के विस्तार तथा निजी क्षेत्र के सहयोग समेत बहुक्षेत्रीय आवश्यकताओं पर कार्रवाई के लिए समन्वित कार्यान्वयन प्लेटफॉर्म के विकास के लिए उठाए गए कदमों पर चर्चा की। आत्म निर्भर भारत का स्मरण कराते हुए उन्होंने कहा कि सरकार और निजी क्षेत्र के निकट सहयोग से पीपीई, एन-95 मास्क तथा अन्य चिकित्सा मदों का देश में विनिर्माण किया गया है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर मेक-इन-इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा देने में आने वाली बाधाओं की पहचान करने के प्रयास कर रहा है, ताकि अवरोध दूर किए जा सके।