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अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद

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डा. जयंतीलाल भंडारी
ऐसे में शहरों में नए रोजगार अवसर निर्मित करने के साथ-साथ गांवों में भी मनरेगा के तहत रोजगार अवसर बढ़ाए जाने होंगे। यहां यह उल्लेखनीय है कि मनरेगा पर चालू वित्त वर्ष 2020-21 के पिछले पांच महीनों में योजना पर कुल आबंटित रकम 101500 करोड़ रुपए का करीब 60 फीसदी खर्च हो चुका है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इसका लाभ भी दिखाई दे रहा है। ऐसे में चालू वित्त वर्ष के सात महीनों के लिए मनरेगा के लिए अतिरिक्त धनराशि के आबंटन से रोजगार अवसर के साथ-साथ जीडीपी भी बढ़ते हुए दिखाई देगी । इसी तरह देश में बढ़ते हुए आर्थिक सुधारों और मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति के कारण दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियां भारत की ओर तेजी से आकर्षित हो रही हैं। सरकार के द्वारा उद्योग-कारोबार और निर्यात संबंधी और अधिक सुधारों से भारतीय बाजार में रोजगार के नए मौके निर्मित किए जाने होंगे…। हाल ही में सात सितंबर को प्रकाशित गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में लॉकडाउन के शुरुआती हिस्से में वित्तीय स्थिति चुनौतीपूर्ण रही थी, लेकिन सरकार ने जिस तरह असाधारण राजकोषीय समर्थन पैकेज और आर्थिक सुधार लागू किए हैं, उससे वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की तुलना में बाद वाली तिमाहियों में जीडीपी में सुधार की पूरी संभावनाएं हैं। इसी तरह भारतीय रिजर्व बैंक की विशेषज्ञ समिति के चेयरमैन केवी कामत ने कहा कि जीडीपी की वृद्घि दर में वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में गिरावट के बाद आगामी तिमाहियों में जीडीपी की स्थिति में तेजी से बेहतर सुधार की उम्मीद है। इसमें कोई दो मत नहीं हैं कि इस समय पूरी दुनिया के विभिन्न देशों की तरह भारत में भी कोविड-19 के कारण सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में भारी गिरावट का परिदृश्य दिखाई दे रहा है। भारत में भी केंद्र सरकार द्वारा कोरोना वायरस महामारी का प्रसार रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन ने देशभर की आर्थिक गतिविधियों को बुरी तरह प्रभावित किया है। परिणामस्वरूप 31 अगस्त को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-जून 2020 की तिमाही में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में .23.9 फीसदी की बड़ी गिरावट आई है। यह गिरावट कंसट्रक्शन सेक्टर ट्रेड, ट्रांसपोर्ट, होटल सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में, फायनेंशियल सर्विस सेक्टर और उपयोगी सेवाओं के सेक्टर में दिखाई दी है। कृषि ही एकमात्र ऐसा सेक्टर है, जिसमें 3.4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। ऐसे में दुनिया के आर्थिक एवं वित्तीय संगठनों का मानना है यद्यपि वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में जीडीपी में भारी गिरावट आई है, लेकिन संपूर्ण वर्ष की जीडीपी में इतनी बड़ी गिरावट नहीं होगी। इस समय जब देश कोविड-19 की आर्थिक चुनौतियों का रणनीतिपूर्वक मुकाबला करते हुए दिखाई दे रहा है, तब विभिन्न वैश्विक आर्थिक संगठनों की रिपोर्टों में आगामी वित्त वर्ष 2021-22 में भारत की तेज विकास दर बढ़ने की संभावनाओं की रिपोर्टें प्रकाशित हो रही हैं। इंडिया रेटिंग्स का मानना है कि आगामी वित्त वर्ष 2021-22 में अर्थव्यवस्था पटरी पर आ जाएगी और आगामी वित्त वर्ष में वास्तविक जीडीपी की वृद्धि दर 9.9 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। निःसंदेह सरकार की ओर से जून 2020 के बाद अर्थव्यवस्था को धीरे-धीरे खोलने की रणनीति के साथ राजकोषीय और नीतिगत कदमों का अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ा है। अब आने वाली तिमाहियों में अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन बेहतर रहने की संभावनाएं हैं। स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि भारत में अनलॉक की घोषणा के बाद संतोषप्रद आर्थिक गतिविधियां शुरू हो गई हैं। लॉकडाउन के महीनों की तुलना में अब प्रमुख क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ रहा है। यही कारण है कि एक सितंबर 2020 को अर्थव्यवस्था में सुधार दिखाने वाले आंकड़े भी सामने आ गए हैं। स्थिति यह है कि अगस्त 2020 में ज्यादातर कार कंपनियों की बिक्री ने पिछले साल 2019 में इसी महीने में हुई बिक्री को पीछे छोड़ दिया है। बढ़ती हुई रेलवे माल ढुलाई आर्थिक गतिविधियों की बेहतर संकेतक है। साथ ही बिजली की खपत में भी अच्छा सुधार दिखाई दे रहा है। इसी तरह एक सितंबर को जारी आईएचएम मार्किट इंडिया के मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) अगस्त 2020 में 52 दर्ज हुआ है। पीएमआई इंडेक्स जुलाई में 46 दर्ज हुआ था, जबकि अप्रैल में लॉकडाउन के दौरान यह 27.4 तक नीचे आ गया था। पीएमआई इंडेक्स के 50 से ऊपर होने का तात्पर्य मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों का बढ़ना होता है। स्पष्ट है कि मार्च 2020 के बाद पहली बार अगस्त 2020 में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की गतिविधियों में वृद्धि हुई है। इसकी मुख्य वजह उत्पादन में सुधार और नए ऑर्डर मिलने के साथ उपभोक्ता मांग का बेहतर होना है। ऐसे में वित्त वर्ष 2020-21 की दूसरी तिमाही में भी सालाना आधार पर गिरावट आ सकती है, लेकिन यह गिरावट उतनी नहीं होगी जितनी कि लॉकडाउन के चरम पर रहने के दौरान देखने को मिली है। ऐसे में अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और जीडीपी बढ़ाने के लिए कई कारगर कदम जरूरी हैं। जरूरी है कि देश के उद्योग-कारोबार सेक्टर को आगे बढ़ाने के लिए उद्योग-कारोबार की सरलता के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएं। कम ब्याज दर पर ऋण एवं वित्तीय सुविधा तथा जीएसटी संबंधी रियायत और निर्यात को बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रोत्साहन और सुविधाएं देकर कारोबार माहौल बेहतर बनाना होगा। यद्यपि लॉकडाउन के कारण ग्रामीण भारत में रोजगार की चिंताएं कम हो चुकी हैं, लेकिन शहरी भारत में निर्मित हुए रोजगार के चिंताजनक परिदृश्य को बदलने के लिए सरकार के द्वारा अतिरिक्त रोजगार प्रयासों की आवश्यकता अनुभव की जा रही है। ऐसे में शहरों में नए रोजगार अवसर निर्मित करने के साथ-साथ गांवों में भी मनरेगा के तहत रोजगार अवसर बढ़ाए जाने होंगे। यहां यह उल्लेखनीय है कि मनरेगा पर चालू वित्त वर्ष 2020-21 के पिछले पांच महीनों में योजना पर कुल आबंटित रकम 101500 करोड़ रुपए का करीब 60 फीसदी खर्च हो चुका है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इसका लाभ भी दिखाई दे रहा है। ऐसे में चालू वित्त वर्ष के सात महीनों के लिए मनरेगा के लिए अतिरिक्त धनराशि के आबंटन से रोजगार अवसर के साथ-साथ जीडीपी भी बढ़ते हुए दिखाई देगी । इसी तरह देश में बढ़ते हुए आर्थिक सुधारों और मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति के कारण दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियां भारत की ओर तेजी से आकर्षित हो रही हैं। सरकार के द्वारा उद्योग-कारोबार और निर्यात संबंधी और अधिक सुधारों से भारतीय बाजार में रोजगार के नए मौके निर्मित किए जाने होंगे। इसमें कोई दोमत नहीं है कि जैसे-जैसे वैश्विक अर्थव्यवस्था डिजिटल होती जा रही है, वैसे-वैसे रोजगार बाजार का परिदृश्य बदलता जा रहा है। ऐसी डिजिटल इकोनॉमी में भारत की नई पीढ़ी के मौके बढ़ते जा रहे हैं। इन मौकों को मुठ्ठियों में लेने की रणनीति के साथ नई नौकरियां भी पैदा करनी होंगी। हम उम्मीद करें कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और जीडीपी बढ़ाने के लिए सरकार कोविड-19 के बीच अर्थव्यवस्था में लगातार प्राप्त हो रहे विदेशी निवेश से विकास को नए आयाम देगी। हम उम्मीद करें कि सरकार उद्योग-कारोबार में सरलता तथा रोजगार अवसर बढ़ाने की डगर पर आगे बढ़ेगी। साथ ही हम उम्मीद करें कि सरकार जीडीपी में अच्छा प्रदर्शन कर रहे कृषि सेक्टर को और अधिक गतिशील करके देश की अर्थव्यवस्था में कृषि की अहमियत बढ़ाएगी। निश्चित रूप से ऐसे रणनीतिक प्रयत्नों से वर्ष 2020-21 की आगामी तिमाहियों में देश की जीडीपी में सुधार आ सकेगा।