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लगता है आज भी जिंदा है गांधी !

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-डॉ गोपाल नारसन
सड़कों से माल ढुलाई का काम तो होता ही है। देश में सबसे बड़ा हाईवे का नेटवर्क उत्तर प्रदेश में है। राज्य में 8,483 किलोमीटर लंबा हाईवे है। उसके बाद नंबर आता है बिहार का। वहां राष्ट्रीय राजमार्ग की लंबाई 4,967 किलोमीटर है। बाकी राज्यों में भी हाईवे की लंबाई अच्छी खासी है। भारत में आज के दिन करीब एक लाख किलोमीटर लंबा नेशनल हाईवे का जाल बिछा हुआ है।
मोहन दास कर्मचन्द गांधी के शरीर की तो नाथूराम गोड्से ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।लेकिन गांधी की आत्मा को न तो वह हत्यारा मार सका और न ही मार सकता था।हम सब जानते है आत्मा अजर अमर है।गांधी की भी है और हमारी भी।फिर गांधी कैसे मर सकता है।शरीर से गांधी जी भले ही हमारे बीच न हो लेकिन विचारों से वे पिछले डेढ़ सौ वर्षों से भारत ही नही दुनिया को राह दिखा रहे है।दरअसल गांधी के विचार ही गांधीवाद है और यही गांधी की पहचान भी। ‘गांधी जी एक ऐसे महान व्यक्ति हुए, जिन्हें मानवता की समझ थी। उनकी जिंदगी ने सबको ही किसी न किसी रूप में प्रेरित किया । ‘ अल्बर्ट आइंस्टीन के शब्दों में,’ आने वाली पीढ़ियों को इस बात पर विश्वास करना मुश्किल होगा कि गांधी जैसा कोई व्यक्ति इस धरती पर चला करता था। डॉक्टर मार्टिन लूथर किंग जूनियर का भी मानना था कि अगर मानवता को आगे बढ़ाना है तो गांधी बहुत ही जरूरी हैं। दुनिया में शांति और सद्भाव के लिए ही वह जीते, सोचते और काम करते हैं। हम अपने जोखिम पर ही उन्हें नजरअंदाज कर सकते हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराकओबामा के विचारों में,’ अपनी जिंदगी में प्रेरणा के लिए मैं हमेशा गांधी की तरफ देखता हूं क्योंकि वह बताते हैं कि खुद में बदलाव कर साधारण व्यक्ति भी असाधारण काम कर सकता है। इसी तरह रबिंद्रनाथ टैगोर का कहना था कि महात्मा गांधी लाखों बेसहारा लोगों के दरवाजे पर पहुंच जाते हैं, उनसे उन्हीं की भाषा में बात करते हैं। आखिर और कौन है, जो इतनी सहजता से इस बड़े वर्ग को अपना रहा है। प्रथम प्रधानमंत्री पंडित
जवाहर लाल नेहरू की सोच रही कि इस देश में जो लौ महात्मा गांधी के रूप में रोशन हुई, वह साधारण नहीं थी। यह लौ आने वाले हजारों सालों तक भी राह दिखाती रहेगी। इतिहास में महात्मा गांधी को गौतम बुद्ध और ईसा मसीह के बराबर देखा जाएगा। लॉर्ड माउंटबेटन गांधी जी के बारे में यही कहा करते थे । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी महात्मा गांधी के जीवन और उनके विचारों से प्रभावित रहे,उन्ही के शब्दों में, गुजरात के पोरबंदर में एक व्यक्ति ने जन्म नहीं लिया था बल्कि एक युग की शुरुआत हुई थी। मुझे इस बात पर पूरा विश्वास है कि वह आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने अपने समय में थे। सच यही है कि डेढ़ सौ बरस के स्वतंत्रता के आंदोलन में महात्मा गांधी की गिनती नरम नेता के रूप में होती थी।लेकिन उक्त आन्दोलन के गरम दल के नेता भी उनका उतना ही सम्मान करते थे जितना नरम दल के लोग उनका आदर भाव करते थे।
गरम दल के नेता सुभाष चन्द्र बोश तक उन्हे अपना नेता मानते थे। यही गांधी जी की अहिंसा की सबसे बडी कामयाबी थी। बैरिस्टर सम्मानजनक व्यवसाय को छोडकर देश के लिए वे आजादी के आन्दोलन में कूद पडे थे। उनका एक ही नारा था कि जैसे भी हो हम हथियार नही उठायेगे और बिना हथियार ही भारत मां को आजादी दिलायेगें। इसके लिए उन्होने स्वयं भी अंगे्रजो की लाठिया खायी और उन्हे बहुत सी यातना भी सहन करनी पडी। लेकिन देश की खातिर उन्होने कभी उफ तक नही की।कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने महात्मा गांधी को दुनिया को अहिंसा,सत्यता,राष्ट्रभक्ति की राह दिखाने वाली एक महान आत्मा बताया।
देदी हमें आजादी बिना खडग बिना ढाल साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल” ये पंक्तिया चरितार्थ कर दिखाने वाले महात्मा गांधी के प्रति दुनियाभर के लोगों ने बेहद सम्मान के भाव अभिव्यक्त किये। महात्मा गांधी को करोडों देशवासी महान सन्त मानते रहे है। लक्ष्य साधन में उनकी सच्चाई और निष्ठा पर कोई प्रश्न चिन्ह कभी नही लगा।कह सकते है कि महात्मा गांधी के जीवित रहने से सारा संसार सम्पन्न था और उनके निधन से दुनिया भर को आभास हुआ कि पूरा संसार ही विपन्न हो गया है।
महात्मा गांधी ने बल प्रयोग का सदा खण्डन किया ।वह बुद्धिमान ,नम्र, द्रढसंकल्पी और निश्चय के धनी महान व्यक्ति रहे। आधुनिक इतिहास में किसी भी एक व्यक्ति ने अपनी चरित्र की वैयक्तिक शक्ति, ध्येय की पावनता और अंगीकृत उद्ेश्य के प्रति निस्वार्थ निष्ठा से लोगों के दिमागों पर इतना असर नहीं डाला, जितना महात्मा गांधी का असर संसार भर में हुआ। संसार के लिए महात्मा गांधी उन महान व्यक्तित्वों में से एक थें जो अपने विश्वास पर अटल और द्रढ रहते थे। ससांर का प्रत्येक व्यक्ति सोचता है कि गांधी जी एक उत्तम व्यक्ति थें तोे उन्हे क्यों मार डाला गया यह सवाल अनेक लोगों ने उठाया लेकिन इसका जवाब है कि कुछ लोग नही चाहते कि देश दुनिया में भले लोगो का वजूद कायम रहे इसी कारण कुछ सिरफिरे ऐसे महानतम लोगो के भी दुश्मन बन जाते है। महात्मा गांधी की यह भी विषेशता थी कि वह चाहे कही भी रहे और चाहे जिस तरह के काम व्यस्त हो लेकिन हर रोज सुबह सबसे पहले प्रार्थना जरूर करते थे। अपने देश के लोगों में भी महात्मा गांधी शीर्ष स्तर पर छाये रहे। गांधी जी जनता की नब्ज को खूब पहचानते थे, वे कहा करते थे कि वास्तव में यदि कोई सार रूप में भारत का प्रतिनिधित्व करने में योग्य सिद्ध हुआ तो वह सिर्फ और सिर्फ महात्मा गांधी थे। कुछ विचारों में लोगों का गांधी जी से मतभेद हो सकता है और बहुत से लोग उनसे अधिक विद्वान हो सकते थे, परन्तु उनमें चरित्र की जो महानता है, उसके कारण वह सब लोगों के आदर्श बन गये थे।
गांधी जी निसंदेह उस धातु के बने हुए है जिस धातु से शुरमा और बलिदानी लोगों का निर्माण होता हैं आत्मिक शक्ति के बल पर महात्मा गांधी विश्व भर में छाये रहे।लेकिन दुर्भाग्य है कि देश को आजाद कराने का प्रबल आधार स्तभ बने महात्मा गांधी के प्रति कृज्ञता अभिव्यक्त करने के बजाए कुछ लोग उनके हत्यारे को महिमा मंडित करने का निदंनीय प्रयास कर रहे है। ऐसे लोगो को देश कभी माफ नही करेगा। महात्मा गांधी के जीवन, धर्म, राजनीति, चिंतन में, स्वतंत्रता संघर्ष में या कह लें कहीं भी, उनका हर क्षण धर्म से प्रच्छन्न था. उसी से प्रेरित-निर्देशित था. उनके पास धर्मविहीन या धर्म से परे कुछ भी नहीं था. गांधी का यह धर्म, उनके व्यक्तिगत जीवन में असंदिग्ध रूप से हिंदू था और अन्य दूसरे धर्मों के प्रति पूरी तरह सहिष्णु और विनीत था. इस धर्म का ‘ईश्वर’, इसकी ‘आध्यात्मिकता’, ‘आत्मा’ और ‘नैतिकता’ उनकी अपनी गढ़ी हुई या चुनी गई परिभाषाओं से तय होती थी. उनकी व्यक्तिगत जीवन शैली और आचरण से परिभाषित होती है।
महात्मा गांधी के जीवन के संस्कार अस्तेय, सत्य, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य से बने थे। गांधी कमोबेश इन् गुणों को अपने जीवन में, अपने कर्म और दर्शन में हमेशा उतारने की कोशिश करते रहे. गांधी ने जब 1920 में अपनी पहली बड़ी राजनैतिक लड़ाई शुरू की, तब तक वे देश के पारंपरिक और कट्टर हिंदुओं के लिए भी, राष्ट्रीयता, स्वतंत्रता संघर्ष और अंग्रेजों के शासन से मुक्ति की आकांक्षा के साथ-साथ, उनकी हिंदू आस्था के रक्षक और हिंदू धर्म के पुनरुद्धार का प्रतीक भी बन चुके थे. गांधी ने खुद भी, 12 अक्तूबर, 1921 के यंग इंडिया में घोषणा की थीः ”मैं अपने को सनातनी हिंदू कहता हूं क्योंकि मैं वेदों, उपनिषदों, पुराणों और समस्त हिंदू शास्त्रों में विश्वास करता हूं और इसीलिए अवतारों और पुनर्जन्मों में भी मेरा विश्वास है. मैं वर्णाश्रम धर्म में विश्वास करता हूं. इसे मैं उन अर्थों में मानता हूं जो पूरी तरह वेद सम्मत हैं लेकिन उसके वर्तमान प्रचलित और भोंडे रूप को नहीं मानता.
मैं प्रचलित अर्थों से कहीं अधिक व्यापक अर्थ में गाय की रक्षा में विश्वास करता हूं. मूर्तिपूजा में मेरा विश्वास नहीं है. बावजूद इस सबके, गांधी का यह हिंदू धर्म या उनका हिंदुत्व, देश के तत्कालीन प्रमुख हिंदू संगठनों, ‘हिंदू महासभा’ और ‘राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ’ के हिंदुत्व से पूरी तरह अलग था. गांधी की प्रार्थना सभाओं में कुरआन का पाठ होता था. बाइबल और गीता उनके लिए बराबर का महत्व रखती थीं. गांधी का भारत हिंदू भारत न हो कर वह भारत था, जिसमें समस्त स्तरों पर समानता के साथ, देश के समस्त धर्मों, जीवन पद्धतियों, उपासना पद्धतियों, रीति-रिवाजों का समावेश हो,यह आवश्यक है।महात्मा गांधी निर्वाण के डेढ़ सौ वर्ष पूरे हो चुके है लेकिन आज भी गांधी को हम पूरी तरह से आत्मसात नही कर पाए है। जिस गांधी के नाम पर हम स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतिफल आजादी के रूप में चख रहे है।जिस फल को लोकतांत्रिक व्यवस्था के सहारे सत्ता प्राप्त करके चखा जा रहा है।जिस फल को गांधी जी के चित्र छपे नोटों के माध्यम से हम सुख भोग रहे है,उस महान आत्मा के प्रति जब कुछ सिरफिरे बेहूदी टिप्पणी करते है।जब कुछ नेता अपनी कुर्सी की चाहत में महात्मा गांधी के हत्यारे का महिमा मंडन करते तो रोना आता है।इस तरह की घिनौनी राजनीति से तौबा करने पर ही वास्तविक सहिष्णुता व गांधीवाद जिंदा रह सकते है।
(लेखक विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ के अवैतनिक उपकुलसचिव है।)