Home Bihar बेटियों से गैंगरेप में अपनी आदतें बदले सरकारें

बेटियों से गैंगरेप में अपनी आदतें बदले सरकारें

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सन्देश तिवारी

नेशनल एक्सप्रेस 
हाथरस। उत्तार प्रदेश के हाथरस के बेटी के साथ चार चार दरिंदों ने दरिंदगी के सभी हदें पार की । हैवानों ने उसे अपनी हवस का शिकार बनाया । जब इतने से दिल नहीं भरा तो उसकी कमर तोड़ दी । फिर उसकी जुबान बंद करने के लिए पीड़िता की जीभ काट दी । हाथरस की ये पीड़ित बेटी जिंदगी की जंग हार गई । दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उसने आखिरी साँस ली । गैंगरेप और उस पर क्रूरता की इस घटना ने लोगों को एक फिर दिल्ली के निर्भया कांड की याद दिलाई है । आपको याद होगा कैसे निर्दोष निर्भया ने अपने साथ हुई दरिंदगी के बाद पीड़ा, सन्ताप और आरोपियों के लिए दंड की जंग लड़ी थी । आखिर कब तक देश में निर्भया जैसी बैचैन करने वाली घटनाएं होती रहेगी । सरकारें ऐसी घटनाएं रोकने में क्यों सक्षम नहीं है । यूपी में बीते सालों में कई ऐसी दरिन्दगी हुई है । आखिर सरकार के हुक्मरान किस मर्ज़ की दवा है ? आखिर कब तक आरोपियों को अंजाम तक ले जाने लिए माँ बाप धरना देंगे ? क्या ये सवाल सरकारों की आदतें है ? बता दें कि यूपी के हाथरस के थाना चंदपा इलाके के गांव में १४ सितंबर को एक १९ साल की दलित युवती के साथ गांव के रहने वाले चार दबंग युवकों पर गैंगरेप का आरोप था। पीड़िता के साथ हैवानियत की गई थी। अस्पताल में भर्ती बेटी को ९ दिन बाद होश आया। होश में आने के बाद उसकी कटी जुबान से वह कुछ बोल न सकी। इशारों में अपने साथ हुई दरिंदगी बयां की। ६ दिन बाद दुखी मन से जिंदगी से हार गई । इसके बाद से देश की जनता और राजनैतिक पार्टियों में उबाल है । विरोध और न्याय की आवाज़ बुलंद हो रही है । आपको याद होगा यूपी के एक दबंग विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने उन्नाव की दलित बेटी के साथ बलात्कार किया था । घटना के बाद पीड़िता के पिता की पुलिस स्टेशन में मौत के बाद प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई थी । घटना में दबंग की दबंगई से पीड़िता समेत पुरे परिवार की हत्याएं की गई ।
आरोपी और उसके साथी जेल तो गए , लेकिन पीड़ित परिवार ने क्या पाया और क्या खोया ये कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल है । आखिर कब तक ये बेटियां इन हैयानों के लिए बलि बनी रहेगी । हाथरस में दबंगों के हैवानियत के खिलाफ आमजन आक्रोशित है , लेकिन ये सच है हाथरस दिल्ली नहीं है , हाथरस यूपी का एक छोटा जिला है यहाँ पर लोगों में जागरूकता है , फरियाद है , अप्रसन्नता है , न्याय के लिए अभियान है , लेकिन हैवानियत रोकने की विजय नहीं । ये तभी संभव है जब सरकारें अपनी रीति नीति में सख्त बदलाव लाये । हाथरस के बेटी को न्याय मिले इसके लिए राजनैतिक , सामाजिक संगठनों ने अपने अपने तरीके से कार्य को अंजाम दिया है । देश के कोने कोने में विरोध प्रद्रशन हो रहे है । लोग कैंडल मार्च निकल रहे है । दबंग दरिंदों को फांसी हो इसकी मांग कर रहे है । उधर बेटी माता पिता सफदरजंग अस्पताल पर धरने पर बैठे है । उन्हें अपनी बेटी के साथ न्याय चाहिए । न्याय के प्रक्रिया के दौरान उन्हें सुरक्षा चाहिए । उन्हें यूपी में हाल के दिनों के दरिंदगी के घटनाओं के अंजाम से भय है । अभी तक की पुलिस की कारवाही पर भरोसा नहीं है । घटना के बाद से अब तक पुलिस ने चार में तीन दरिंदों को हिरासत में लिया है । लेकिन हाथरस एसपी और उनके अधीनस्थ के बयानबाज़ी बेतुकी है । पुलिस के अभी तक के बयान से ऐसा लग रहा है जैसे मानों हथरस की इस बेटी ने बलात्कार और मौत की राह खुद चुनी है । उन्हें इस बेटी के साथ दरिन्दगी करने वालों से हमदर्दी भी लग रही है । आपको बता दे दबंगों के दरिंदगी की शिकार बेटी के घायल हाल में पहले अलीगढ़ फिर दिल्ली में भर्ती होने के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर कई घेरे है ।
आरोपियों ने जिस तरह से गिरफ्तारियां हुई ये अपने आप में सवालियां निशान है । बताया जा रहा है कि गैंगरेप पीड़िता का शव रात करीब १२:४५ हाथरस पहुंचा। एंबुलेंस को जब अंतिम संस्कार के लिए ले जाया रहा था तो लोगों ने उसे रोक दिया और एंबुलेंस के आगे लेटकर आक्रोश जताया। इस दौरान एसडीएम पर परिजनों के साथ बदसलूकी करने का आरोप लगा। इसके बाद पुलिस और ग्रामीणों में झड़प हो गई। दरअसल, परिजन रात में शव का अंतिम संस्कार नहीं करना चाहते थे, जबकि पुलिस तुरंत अंतिम संस्कार कराना चाहती थी। इसके करीब २:४० बजे बिना किसी रीति रिवाज के और परिजनों की गैरमौजूदगी में पीड़िता का अंतिम संस्कार कर दिया गया।गैंगरेप पीड़िता के चाचा ने बताया पुलिस दबाव बना रही थी कि शव का अंतिम संस्कार कर दें। जबकि बेटी के मां-बाप और भाई कोई भी यहां मौजूद नहीं है, वे लोग दिल्ली में ही हैं और अभी पहुंचे भी नहीं हैं। रात में अंतिम संस्कार न करने और परिवार का इंतजार करने की बात कहने पर पुलिस ने कहा कि अगर नहीं करोगे तो हम खुद कर देंगे। मां चीखती रही कि बेटी का शव उन लोगों को सौंपा जाए। वह बिलखती रहीं कि बेटी को अपनी देहरी से हल्दी लगाकार विदा करेंगीं लेकिन पुलिस ने किसी की नहीं सुनी। मां की दर्दनाख चीखें भी पुलिस के दिल की नहीं चीर सकीं। पुलिस ने घरवालों को शव नहीं दिया, न ही बच्ची को अंतिम बार उसके घर ले जाया गया। दिल्ली से लाकर सीधे आधी रात को उसका दाह संस्कार कर दिया गया। हैरानी वाली बात है कि घरवालों को भी इसकी जानकारी नहीं दी गई।
यूपी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने उत्‍तर प्रदेश पुलिस की इस हरकत को कायराना बताया है। कांग्रेस ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा है- निर्दयता की हद है ये। जिस समय सरकार को संवेदनशील होना चाहिए उस समय सरकार ने निर्दयता की सारी सीमाएं तोड़ दी।’ आम आदमी पार्टी ने भी अंतिम संस्‍कार का वीडियो अपने फेसबुक पेज पर डाला है।यूपी में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग हो रही है। यूपी के मुख्यमंत्री का कहना है हाथरस में बालिका के साथ घटित दुर्भाग्यपूर्ण घटना के दोषी कतई नहीं बचेंगे। यह दल आगामी सात दिवस में अपनी रिपोर्ट देगा। त्वरित न्याय सुनिश्चित करने हेतु इस प्रकरण का मुकदमा फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा। लेकिन इन सबके बाद भी ये तय हो पाएंगे , बेटियां फिर निर्भया नहीं बनेंगी । वही आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने हाथरस की घटना पर वार्ता की है और कहा है कि दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाए।’