Home UttarPradesh न्यायालयों में मिलें हिन्दी भाषा को सर्वोच्च स्थान: मनु शर्मा

न्यायालयों में मिलें हिन्दी भाषा को सर्वोच्च स्थान: मनु शर्मा

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नेशनल एक्सप्रेस संवाददाता
अमरोहा।
हिंदी दिवस के अवसर पर अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए उ० प्र० अधिवक्ता वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष मनु शर्मा ने कहा कि हिंदी को सर्वोच्च सम्मान तब मिलेगा, जब न्यायालयों की भाषा पूर्णतः हिंदी हो जाए। सोमवार को जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में स्थित विजय सिंह के चेंबर पर उत्तर प्रदेश अधिवक्ता वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वाधान में हिंदी दिवस के अवसर पर सामाजिक दूरी का पालन करते हुए अध्यक्ष मनु शर्मा (एडवोकेट) ने कहा कि हर वर्ष 14 सितम्बर को हम हिंदी दिवस मनाते हैं। देष की स्वतंत्रता के बाद 14 सितम्बर 1949 को संविधान सभा ने एकमत से यह निर्णय लिया कि हिंदी की खड़ी बोली ही भारत की राष्ट्रभाषा होगी। हालांकि इसे 1950 को देश के संविधान द्वारा आधिकारिक भाषा के रूप में उपयोग करने का विचार स्वीकृत किया गया था। अधिवक्ता संजीव जिंदल ने कहा कि पहले के समय में अंग्रेजी भाषा का ज्यादा चलन नहीं हुआ करता था। तब हिंदी भाषा भारतवासियों और देष से बाहर रह रहे लोगों के लिए सम्माननीय होती थी। अधिवक्ता देवेंद्र पाल सिंह ने कहा कि देष में हिंदी को अंग्रेजी से कमत्तर मनाने वालों की संख्या में पिछले कई दशकों में कई गुणा इजाफा हुआ हैं। इसी कारण हम अंग्रेजी से अछूते नहीं रह पा रहे हैं और हम हिंदी के शब्दों को भी अमली जामा पहनाने की भरपूर कोशिश करते हैं। इस अवसर पर अशोक शर्मा, कावेंद्र सिंह, परम सिंह सैनी, जगदीश पाल सिंह, देशराज सैनी, वीर सिंह सैनी, लखपत सिंह राणा, विजय सिंह, यतीश सिंह, देवेंद्र पाल सिंह, जितेंद्र सिंह, मोहम्मद उस्मान, संजीव जिंदल, ईश्वर सिंह, प्रमोद पाल, भगवानदास चैहान आदि मौजूद रहे।