Home Rajasthan किसानों की खुशहाली के बिना आजादी अधूरी

किसानों की खुशहाली के बिना आजादी अधूरी

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नेशनल एक्सप्रेस ब्यूरो कोटा । किसान महापंचायत राजस्थान प्रदेश द्वारा किसानों को संगठित करने व किसान विरोधी कृषि अध्यादेश वापस लेने की मांग के उद्देश्य से किसान जन जागरण यात्रा राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट एवम प्रदेश संयोजक सत्यनारायण सिंह के साथ कोटा पहुँची । भामाशाह मंडी के कृषि उपज मंडी संभागार में कोटा बूंदी के किसान नेताओ की बैठक को संबोधित करते हुए किसान नेता व महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा कि जो किसान हित में काम करेगा वही देश पर राज करेगा । बार बार खाया धोखा है किसानों जागो अब तो मौका है किसानों के हितों की बात करने वाले देश मे हजारो संगठन है इन संगठनों को राजनीतिक पार्टिया अपने हिसाब से अपने इशारे पर चलाती है । क्या कारण है आजादी के 72 साल भी किसान को अपनी फसल का वास्तविक मूल्य नही मिल रहा । देश मे कही बड़े बड़े किसान आंदोलन हुए जिसमे हजारों की तादात में किसानो को अपनी जान गवानी पड़ी। फिर भी किसानों को अपनी फसल का उचित मूल्य नही मिल रहा है । वही केंद्र व राज्य कर्मचारियों अधिकारीयो व मंत्री सांसद विधायक के लिए 7 वेतन आयोग लागू हो गए पर 72 साल बात भी किसान कि आय को बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय किसान आय आयोग नही बनाया । केंद्र की मोदी सरकार ने तो किसान आयोग की रिपोर्ट लागू करने से मना करते हुए सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा तक पेश कर दिया । किसानों की आय को बढ़ाने के लिए डॉ. एम.एस.स्वामीनाथन ने जो रिपोर्ट दी उसे भी केंद्र में कांग्रेस समर्थन से या बीजेपी समर्थन से सरकारे रही पर किसी ने भी स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को आज तक लागू नही किया । भारत सरकार किसानों के हितों को तो वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (WHO) को 1994 में ही गिरवी रख चुकी है । आपको जानकारी के तहत बता दे WHO करार में कृषि समझौता, बौद्धिक सम्पत्ति अधिकार समझौता, सेवा क्षेत्र समझौता आदि अमरीकी और यूरोपीय देशों के दबाव में शामिल किया गया। कृषि समझौते को WTO करार को शामिल करने के पीछे मुख्य उद्देश्य यह है कि कृषि को उद्योग और व्यापार जैसा ही मानना और दुनिया के तमाम देशों का बाजार कृषि उत्पादों के लिये उपलब्ध कराना । इसके तहत अब किसान को अपनी इच्छा से फसल करने बीज उगाने की आजादी नही रहेगी। कंपनियां जैसा चाहेगी वैसा ही बीज खरीदकर उगाना पड़ेगा । यदि कंपनी ने फसल को रिजेक्ट कर दिया तो उसकी कही खरीदारी नही होगी । इस तरह किसान को कंपनी की गुलामी करनी पड़ेगी । यह WTO करार हमारे देश के संविधान के पूरी तरह विरूद्ध है, यह भी जानना जरूरी है। हमारे देश की संसद द्वारा बनाये गये कानूनों के विरूद्ध भी है। भारतीय संस्कृति और सभ्यता की मान्यताओं के पूरी तरह खिलाफ है यह WTO करार अफ्रीकी, ऐशियाई और लैटिन अमरीकी देशों की लूट का वही रास्ता खोल रहा है, जो 500 वर्षों पहले कोलम्बस एवं वास्को-डिगामा जैसे लुटेरों ने खोला था । कोलम्बस, वास्को डिगामा तथा अन्य यूरोपीय देशों ने 500 वर्ष पूर्व जो लूट-मार पूरी दुनिया के लगभग 60-70 देशों में की थी, वही अब विश्व व्यापार संगठन करार के कानूनी स्वरूप से होने जा रही है । बैठक में प्रदेश संयोजक सत्यनारायण सिंह, प्रदेश मंत्री रतन खोखर, युवा अध्यक्ष रामेश्वर चौधरी,संभाग प्रभारी बजरंग लाल मीणा, कोटा जिला अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ,बूंदी जिला अध्यक्ष तुलसी राम, समाजसेवी हिम्मत सिंह हाड़ा, पूर्व देहात जिला अध्यक्ष राजेन्द्र मीणा ।