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जयराम ठाकुर ने कंगना के बंगले के हिस्से को ढहाने की निंदा की

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शिमला, (भाषा) हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अभिनेत्री कंगना रनौत के मुंबई स्थित बंगले का एक हिस्सा नगर निकाय द्वारा ढहाये जाने की बुधवार को निंदा की और कहा कि वह राज्य की ‘‘एक बेटी हैं’’ और और उन्हें उनके क्षेत्र में काम करने के लिए एक ‘‘उचित माहौल’’ मिलना चाहिए। देहरा से निर्दलीय विधायक होशियार सिंह द्वारा विधानसभा में उठाये गए व्यवस्था के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ठाकुर ने कहा कि रनौत के कार्यालय को ढहाने का कदम एक चिंता का विषय है। ठाकुर ने कहा कि बॉलीवुड अभिनेत्री को एक नोटिस दिया गया था लेकिन प्रक्रिया पूरी किये बगैर ढहाने का कदम उठाया गया। ठाकुर ने कहा, ‘‘हम इस कदम की निंदा करते हैं।’’
शिवसेना नियंत्रित बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने 33 वर्षीय अभिनेत्री के बांद्रा स्थित बंगले में ‘‘अवैध परिवर्तनों’’ को ढहा दिया। यह जानकारी बीएमसी के एक अधिकारी ने दी। रनौत ढहाने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद मुंबई पहुंचीं। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार उन्हें शिवसेना के साथ उनकी लड़ाई के चलते निशाना बना रही है, जब उन्होंने मुंबई की तुलना पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से की थी। रनौत ने कहा था कि बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद उन्हें फिल्म माफिया से कहीं अधिक डर मुंबई पुलिस से लगता है। मंगलवार को शिवसेना सरकार ने कहा कि मुंबई पुलिस इन आरोपों की जांच करेगी कि रनौत ने मादक पदार्थ लिया। रनौत फिल्म उद्योग के एक वर्ग द्वारा मादक पदार्थ दुरुपयोग के बारे में बोली हैं। बुधवार को हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने रनौत के मनाली स्थित आवास पर सुरक्षा मुहैया करायी है। उन्होंने कहा कि केंद्र द्वारा मुहैया करायी गई वाई-प्लस श्रेणी की सुरक्षा के तहत सीआरपीएफ के 11 कमांडों रनौत के साथ रहेंगे। हिमाचल प्रदेश उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सर्वश्रेष्ठ कदम उठाएगा। उन्होंने विधानसभा में कहा, ‘‘कंगना हिमाचल प्रदेश की बेटी हैं और उन्होंने न केवल राज्य बल्कि पूरे देश की ख्याति बढ़ाई है।’’ उन्होंने कहा कि उन्हें उनके क्षेत्र में काम करने का उचित माहौल मिलना चाहिए। इस पर कांग्रेस विधायक राम लाल ठाकुर ने कहा कि उनके कार्यालय का मामला अदालत में विचाराधीन है, इसलिए विधानसभा में कोई टिप्पणी करना उचित नहीं। नैना देवजी से विधायक ने कहा कि जहां तक महाराष्ट्र विधानसभा में रनौत के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव का सवाल है, इस प्रस्ताव पर हिमाचल प्रदेश विधानसभा में चर्चा करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें विधिक पहलुओं को ध्यान में रखना चाहिए।’’