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जीवन जीना एक कला है

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-मनोज पुरी
जीवन जीना एक कला है, हस कर इसे निभा लो ,
अपना बोझ किसी के ऊपर, हरगिज़ कभी न डालो ।
उम्मीदों के मकड़ जाल मे, खुद को न उलझा लो ,
मानवता की सेवा खातिर, दुखियारा गले लगा लो ।।
हर उलझन को प्रेम भाव से, घर मे ही सुलझा लो ,
बात जो फिर भी नहीं बने, मन अपने को समझा लो ।
अपना पेट तो सब भरते हैं, कुछ तुम भी पुण्य कमा लो ,
ऐसा न हो जीवन को तुम, यूँ ही व्यर्थ गवा लो ।।
गुरू वाणी व सार गुरू के, जीवन में अपना लो ,
वाहे गुरू दा लंगर खा के, जीवन सफल बना लो ।
और नहीं तो प्रभु को अपने, मन का मीत बना लो ,
उसकी रज़ा से जीवन की, राहों को खूब सजा लो ।।
कर्म करो बिन इच्छित फल के, न किसी का हक हथिया लो ,
मन में अपने किसी की खातिर, वैर कभी न पालो ।
जीवन जीना एक कला हे, मन को ये समझा लो ,
बेहतर जीवन जीने खातिर, ये मानदण्ड अपना लो ।।