Home UTTARAKHAND मारवाड़, केवी-1 में मनी पं. गोविंद बल्लभ पंत जयंती, पौधे रोपे

मारवाड़, केवी-1 में मनी पं. गोविंद बल्लभ पंत जयंती, पौधे रोपे

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रुड़की। केंद्रीय विद्यालय न.-1 रूड़की में पं. गोविन्द बल्लभ पन्त पर्यावरण सुरक्षा समिति महासचिव अधिवक्ता प्रभाकर पन्त व प्राचार्य वीके त्यागी ने संयुक्त रूप से विद्यालय परिसर एवं विद्यालय के बाहर नींबू, अर्जुन, नीम, जामुन, तुलसी, बेल, पीपल एवं पपीता के औषधीय पौधे रोपे। प्रभाकर पन्त ने कहा कि शहर में विभिन्न विद्यालयों में 5 हजार औषधीय पौधे लगाना उनका लक्ष्य है। उनका लक्ष्य समाज व छात्रों को औषधीय पौधों के बारे में जागरूक करना तथा उनको संरक्षित करना है। पुस्तकालयाध्यक्ष पूनम कुमारी ने कहा कि पुस्तकालय की तरफ से पंडित गोविन्द बल्लभ पन्त की जयंती पर उनके जीवन तथा कार्यों से सम्बंधित उपलब्धियों के बारे में छात्रों व समाज को जागरूक करने हेतु उन पर आधारित एक ऑनलाइन क्विज आयोजित की गई। इसमे करीब 500 छात्रों ने अभी तक प्रतिभाग किया है। प्राचार्य वीके त्यागी ने कहा कि इंसान पूर्ण रूप से स्वस्थ तभी होगा जब कदम-कदम पर पौधे लगेंगे। आदिकाल से पेड़, पौधे मनुष्य की जरूरतों की पूर्ति करते आ रहे हैं। पेड़ प्राणियों को शुद्ध वायु प्रदान करते हैं, प्रदूषण को रोकते हैं, पानी के बहाव एवं मिट्टी के कटाव को रोकते हैं, पर्यावरण के संतुलन को बनाने में सहायक हैं। उप प्राचार्या अंजू सिंह ने कहा कि बढ़ते प्रदूषण की वजह से वृक्षारोपण की आवश्यकता इन दिनों अधिक हो गई है। वृक्षारोपण से मतलब वृक्षों के विकास के लिए पौधों को लगाना और हरियाली को फैलाना है। सभी उपस्थित लोगों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। मारवाड़ कन्या पाठशाला इंटर कालेज में पंडित गोविंद बल्लभ पंत जयंती पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कक्षा 8 की छात्रा उर्वशी ने पंडित गोविंद बल्लभ पंत के जीवन परिचय, सामाजिक, स्वतंत्रता संग्राम आंदोलनो में उनके योगदान एवं उनकी देशभक्ति पर प्रकाश डालते हुए भाषण दिया। प्रधानाचार्य अनिता रस्तौगी ने पं. गोविंद बल्लभ पंत की प्रतिमा पर माल्याणर्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। प्रधानाचार्य ने कहा कि 10 सितंबर 1887 को जन्मे पं. गोविंद बल्लभ पंत ने अपना पूरा जीव देश व समाज के लिए समर्पित रखा। अंग्रेजो के खिलाफ आजादी की लड़ाई लड़ने वाले पंत उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री और देश के चैथे ग्रह मंत्री भी रहे। देश एवं समाज सेवा के जज्बे लिए 1957 में उन्हे भारत रत्न से सम्मानित किया गया। प्रधानाचार्या ने कहा कि आज छात्रों, युवाओ, शिक्षकों व समाज के अन्य लोगों को उनसे प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने की जरूरत है। कोरोना के चलते मास्क लगाकर और सोशल डिस्टेसिंग के तहत तमाम शिक्षिकाएं उपस्थित रही। इस अवसर पर बबीता त्यागी, अनु शर्मा, मुप्न्नी देवी, श्रद्धा हिंदू, कामनी गुप्ता, निधि शर्मा, नीरजा सखूजा, रश्मि गुप्ता आदि मौजूद रहे। उधर नेशनल कन्या इंटर कालेज खानपुर में भारत रत्न पं. गोविन्द बल्लभ पंत को याद किया गया। प्रधानाचार्य डा. घनश्याम गुप्ता ने कहा कि वह बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। उन्हे आज भी उत्तर भारत के निर्माता के रूप में याद किया जाता है। पं. गोविन्द बल्लभ पंत ने देश को अंगे्रजों से आजाद कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री रहते हुये पंडित गोविन्द बल्लभ पंत चाय, नाश्ते का पैसा भी अपनी जेब से भरते थे। एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी बलराम गुप्ता ने कहा कि 1920 में उन्होंने रोलेट एक्ट के विरोध में असहयोग आन्दोलन के लिये वकालत छोड दी थी। उन्होंने कहा कि हिन्दी को भारत की राज्य भाषा चुनकर हिन्दी का मान बढाने का कार्य भी पंत ने ही किया था। इस दौरान कोरोना काल में स्वयं सेवियों के माध्यम से जागरूकता फैलाने तथा आनॅलाइन शिक्षण से वंचित राजकीय प्राथमिक विधालयों के छात्रों को मेरा घर मेरा विधालय के अन्तर्गत उल्लेखनीय कार्य करने के लिये एनएसएस अधिकारी बलराम गुप्ता को कोरोना योद्धा के रूप में प्रशस्ति पत्र देकर व शाॅल ओढाकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मदनपाल सिंह, अरविन्द्र पंवार, सुरेश कवटियाल, अमित गर्ग, विशाल भाटी, बृजपाल, अशोक कुमार, संजय भी मौजुद रहे।