मनरेगा निरस्त किए जाने के खिलाफ मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, शिवकुमार के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन

नेशनल एक्सप्रेस डिजिटल डेस्क
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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला, पार्टी के विधायकों और सांसदों ने मनरेगा को निरस्त किए जाने के खिलाफ मंगलवार को ‘राजभवन चलो’ विरोध मार्च निकाला।

बेंगलुरु, भाषा। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला, पार्टी के विधायकों और सांसदों ने मनरेगा को निरस्त किए जाने के खिलाफ मंगलवार को ‘राजभवन चलो’ विरोध मार्च निकाला। केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को विकसित भारत-गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) से बदलने के कदम के खिलाफ कांग्रेस के नेता, राज्य के राज्यपाल के आधिकारिक आवास लोक भवन की ओर मार्च करने लगे।

कांग्रेस के नेता बाद में एक सरकारी बस में सवार होकर लोक भवन (पूर्व में राजभवन) पहुंचे जहां उन्होंने राज्यपाल थावरचंद गहलोत को एक ज्ञापन सौंपा। विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ग्रामीण रोजगार गारंटी ढांचे को खत्म कर रही है और पंचायतों के अधिकारों को कम कर रही है। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए सिद्धरमैया ने कहा कि वीबी-जी राम जी में उल्लिखित ‘राम’ का अर्थ दशरथ राम या सीता राम नहीं है। इसका अर्थ है ‘‘विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’’।

उन्होंने कहा कि मनरेगा आजीविका और रोजगार का अधिकार है जिसे मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार द्वारा शुरू किया गया था। उन्होंने केंद्र पर इसे नष्ट करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। सिद्धरमैया ने आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘मनरेगा जनता का अधिकार था, लेकिन अब नहीं। दिव्यांगजनों सहित लगभग पांच करोड़ लोगों को ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार मिल रहा था। अब केंद्र सरकार यह तय करना चाहती है कि कौन सा काम किया जाना चाहिए जबकि पहले यह पंचायतों द्वारा तय किया जाता था।’’ उन्होंने आगे कहा कि पंचायतों की भूमिका बुरी तरह से सीमित कर दी गई है।

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पहले प्रत्येक पंचायत को लगभग एक करोड़ रुपये मिलते थे और अब उन्हें इससे वंचित कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘हम तब तक लड़ेंगे जब तक वीबी-जी राम जी रद्द नहीं हो जाता और मनरेगा को फिर से लागू नहीं कर दिया जाता।’’ कर्नाटक के प्रभारी की भी जिम्मेदारी संभालने वाले सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को खत्म करने पर तुली हुई है। उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र सरकार मनरेगा को समाप्त करना चाहती है।

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मैं कर्नाटक सरकार से आग्रह करता हूं कि पंचायत केंद्रों का नाम बदलकर ‘महात्मा गांधी केंद्र’ कर दिया जाए।’’ शिवकुमार ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को राजनीतिक परिणामों की चेतावनी देते हुए कहा, ‘‘मनरेगा को रद्द करके भाजपा ने अपने लिए मुसीबत मोल ले ली है। ग्रामीण क्षेत्रों के लोग वीबी-जी-राम जी को स्वीकार नहीं करेंगे और रोजगार गारंटी कानून को रद्द करने के लिए भाजपा को माफ नहीं करेंगे।’’

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बाद में उन्होंने गहलोत को ज्ञापन सौंप दिया। ज्ञापन के अनुसार, प्रमुख आपत्तियों में से एक वित्तपोषण की जिम्मेदारी में बदलाव है।  मनरेगा के तहत, केंद्र सरकार मजदूरी की पूरी लागत वहन करती थी जबकि नए कानून के तहत राज्यों को 40 प्रतिशत वहन करना होगा।  कर्नाटक सरकार का तर्क है कि जीएसटी मुआवजे, वित्त आयोग के आवंटन और केंद्र द्वारा उपकर के व्यापक उपयोग से संबंधित मुद्दों के कारण राज्य पहले से ही वित्तीय रूप से तंग हैं, जिससे उनके लिए अतिरिक्त खर्च वहन करना मुश्किल हो जाता है।

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