रसोई गैस सिलेंडर की कमी के कारण बंगाल के कई स्कूलों में मध्याह्न भोजन कार्यक्रम प्रभावित

नेशनल एक्सप्रेस डिजिटल डेस्क
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पश्चिम बंगाल के स्कूलों में रसोई गैस सिलेंडर की कमी से दोपहर के भोजन पर असर पड़ना शुरू हो गया है और इसके कारण अधिकारी लकड़ी जैसे वैकल्पिक ईंधन का उपयोग करने या छात्रों को सीमित खाद्य पदार्थ परोसने के लिए मजबूर हैं।

कोलकाता, भाषा। पश्चिम बंगाल के स्कूलों में रसोई गैस सिलेंडर की कमी से दोपहर के भोजन पर असर पड़ना शुरू हो गया है और इसके कारण अधिकारी लकड़ी जैसे वैकल्पिक ईंधन का उपयोग करने या छात्रों को सीमित खाद्य पदार्थ परोसने के लिए मजबूर हैं। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। दक्षिण 24 परगना जिले के कृष्णाचंद्रपुर हाई स्कूल में अधिकारियों ने एलपीजी सिलेंडर की कमी की आशंका के मद्देनजर वैकल्पिक ईंधन के रूप में जलावन की लकड़ियां इकट्ठा करके रखी हैं। प्रधानाध्यापक चंदन मैती ने बृहस्पतिवार को बताया कि 11 मार्च को लगभग 1,500 छात्रों के लिए दोपहर का भोजन पारंपरिक मिट्टी के चूल्हे पर लकड़ी की आग से पकाया गया क्योंकि स्कूल को गैस की आपूर्ति नहीं मिल पा रही है।

स्कूल ने एक दिन पहले ही इस संकट की आशंका जताई थी और अस्थायी समाधान के तौर पर जलावन की लकड़ी की व्यवस्था कर ली थी। उन्होंने कहा, "हमें मंगलवार को ही अंदाजा हो गया था कि क्या हो सकता है और हमने उसी के अनुसार तैयारी कर ली थी। लेकिन जलाऊ लकड़ी की आपूर्ति सीमित है। यह स्थिति लंबे समय तक नहीं चल सकती और सरकार को हस्तक्षेप करने की जरूरत है।" नदिया स्थित बरोजागुली गोपाल अकादमी के प्रभारी शिक्षक राजकुमार हाजरा ने बताया कि बुधवार का खाना पकाने के बाद एलपीजी सिलेंडर खत्म हो गए थे। उन्होंने कहा, "हमारे सिलेंडर का भंडार खत्म हो गया है। हम ब्लॉक विकास कार्यालय और स्थानीय एलपीजी गैस आपूर्तिकर्ताओं के संपर्क में हैं। किसी भी परिस्थिति में दोपहर के भोजन कार्यक्रम को रोका नहीं जा सकता।"

उन्होंने कहा, "हमारे सिलेंडर का भंडार खत्म हो गया है। हम ब्लॉक विकास कार्यालय और स्थानीय एलपीजी गैस आपूर्तिकर्ताओं के संपर्क में हैं। किसी भी परिस्थिति में मध्याह्न भोजन कार्यक्रम को रोका नहीं जा सकता।" बोलपुर के एक उच्च प्राथमिक विद्यालय में अधिकारियों ने लगभग 100 छात्रों के लिए खाना पकाने के लिए लकड़ी के लट्ठों की व्यवस्था की। जिलों में पीएम पोषण (मध्याह्न भोजन) योजना को लागू करने वाले अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने छात्रों के भोजन में व्यवधान को रोकने के लिए केंद्र के साथ इस मामले को उठाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग से संपर्क किया है। मध्य कोलकाता के रानी रश्मोनी हाई स्कूल में बुधवार को खाना पकाने की गैस की कमी के कारण छात्रों को उबले अंडे परोसे गए।

प्रधानाध्यापक सैयद मोहसिन इमाम ने बताया कि प्रतिदिन लगभग 70-80 छात्रों को मध्याह्न भोजन परोसा जाता है। बृहस्पतिवार को एक स्वयंसेवी संस्था द्वारा छात्रों को खिचड़ी (चावल और दाल का दलिया) और अंडा उपलब्ध कराया गया। दक्षिण कोलकाता के लेक गर्ल्स स्कूल में छात्राओं को खिचड़ी परोसी गई। स्कूल की प्रधानाध्यापिका ने कहा, "हमें सोयाबीन, अंडा, दाल और चावल की व्यंजन सूची में कटौती करनी पड़ी और आज के लिए खिचड़ी का इंतजाम किया है। हम किसी भी परिस्थिति में भोजन बंद नहीं करना चाहते। लेकिन आने वाले दिनों में क्या होगा, नहीं जानते।"

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