Home UttarPradesh मोदी इंडस्ट्रीज लिमिटेड को शुरू करने की योजना

मोदी इंडस्ट्रीज लिमिटेड को शुरू करने की योजना

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अनिल मित्तल
मोदीनगर।
गत 11 सितम्बर को यू के मोदी ग्रुप के चेयरमैन उमेश कुमार मोदी ने प्रेस वार्ता में बताया कि अब दोबारा से मोदी इंडस्ट्रीज लिमिटेड की बंद पड़ी यूनिटे को शुरू करने की योजना है । इसके लिए एम के मोदी से यू के मोदी ग्रुप की लिखित सहमति हो गयी है । इस प्रकरण में उस समय नया मोड़ आ गया जब एम के मोदी के सबसे छोटे भाई डी के मोदी उच्च न्यायालय की शरण में जा पहुँचे । प्राप्त जानकारी के अनुसार भारत सरकार और अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों के तत्वावधान में, 24 जनवरी 1989 को एक समझौता (एम ओयू) के माध्यम से, मोदी ग्रुप आॅफ कंपनीज को दो समूहों में विभाजन करने का निर्णय लिया गया था । जिन्हें ग्रुप- ए में (के एन मोदी और उनके ) तीन बेटे , एम के मोदी ,वाई के मोदी और डी के मोदी और ग्रुप- बी में (के के मोदी, और उनके चार भाई वी के मोदी ,एस के मोदी, बी के मोदी और यू के मोदी) और समूह का कुल शुद्ध मूल्य संबंधित के बीच विभाजन करने का निर्णय लिया गया ।समझौते के अनुसार 40- 60 के अनुपात में ग्रुप- ए और ग्रुप- बी के समूह को नियंत्रित करना । उक्त एम ओयू के संदर्भ में, मोदी इंडस्ट्रीज लिमिटेड के मामले में, जिसमें कुल नौ विनिर्माण इकाइयाँ शामिल थी । जिनमें छह छोटी इकाइयाँ क्रमशः वनस्पति, गैस , इलेक्ट्रोड, मोदी पेंट, साबुन और लालटेन एम के मोदी के हिस्से में आये । मोदी इंडस्ट्रीज की तीन बड़ी इकाइयाँ मोदी स्टील, मोदी शुगर और डिस्टिलरी यू के मोदी के हिस्से में आये । सभी अनुपादक परिसंपत्तियों को क्रमशः 40-60 के अनुपात में दो डिवीजनों के बीच विभाजित करने का निर्णय लिया गया । जिसमें सी एम डी- आई एफ सी आई जिन्हें विवादों को सुलझाने के लिए मध्यस्थ के रूप में नामित किया गया था ।यदि कोई हो, तो एम ओयू के कार्यन्वयन में भी 15 दिसम्बर 1995 को अपनी विस्तृत रिपोर्ट व्यक्तिगत कंपनियों के विभाजन को दे दी । भारत के माननीय उच्चतम न्यायालय ने के एन मोदी बनाम के के मोदी एंड आॅर्स के नाम से मामले में, उपरोक्त परिवार एम ओयू की पवित्रता को बरकरार रखा है जिसे अंतिम रूप दिया गया है । ज्ञात रहे कि एम ओयू के संदर्भ में तीन बहु- कम्पनियाँ जिसमें मोदी स्पिनिंग एण्ड विविंग मिल्स कंपनी लिमिटेड, मोदी इंडस्ट्रीज लिमिटेड और मोदी पोन लिमिटेड को दो भागों में विभाजन किया जाना था । मोदी स्पिनिंग एण्ड विविंग मिल्स कम्पनी लि0 और मोदी पोन लिमिटेड को पहले ही परिवार के एम ओयू के अनुसार विभाजित हो चुका है । यू के मोदी ग्रुप के चेयरमैन उमेश कुमार मोदी ने एम के मोदी से तो समझौते कर लिया परंतु भारत सरकार और अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों एवं मा0 उच्चतम न्यायालय ने के एन मोदी बनाम के के मोदी एंड आॅर्स के नाम से मामले में उपरोक्त परिवार एम ओयू की पवित्रता को बरकरार रखा है और उसमें एम के मोदी के साथ मोदी इंडस्ट्रीज लिमिटेड में वाई के मोदी और डी के मोदी के नाम भी शामिल है । उमेश कुमार मोदी ग्रुप के चेयरमैन ने डी के मोदी व वाई के मोदी से समझौते नहीं किया शायद अपने हक के लिए डी के मोदी उच्च न्यायालय की शरण में पहुँचे हैं । अब सब की निगाह उच्च न्यायालय पर है ? इस प्रकरण से ऐसा प्रतीत होता है कि उमेश कुमार मोदी जहाँ से चले थे अब दोबारा वहीं से चलना पड़ेगा ?