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पुलकित सम्राट और हर्षवर्धन राणे के ‘तैश’ से इंटेंस हुआ रिवेंज ड्रामा

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मनोरंजन टीम। बिजॉय नाम्बियार की फ़िल्म तैश ज़ी 5 पर 6 एपिसोड्स की सीरीज़ के रूप में रिलीज़ हुई है। तैश मुख्य रूप से दो बेहद गुस्सैल किरदारों की कहानी है, जिन्हें पुलकित सम्राट और हर्षवर्धन राणे ने निभाया है। इन दोनों किरदारों के तैश में आने की वजह और इनकी टक्कर के अंजाम पर इस सीरीज़ की कहानी लगभग आधे-आधे घंटे के छह एपिसोड्स में बिखरी हुई है। फ़िल्म की प्रचार सामग्री पर इसे ‘फ़िल्म और सीरीज़’ कहा जा रहा है।
अमिताभ बच्चन और फ़रहान अख़्तर को लेकर ‘वज़ीर’ बना चुके बिजॉय ने बीच में इरफ़ान ख़ान और दुल्कर सलमान के साथ ‘कारवां’ भी बनायी थी, जो अलग मिज़ाज की फ़िल्म थी। इससे पहल बिजॉय शैतान जैसी बैहतरीन और सराही गयी थ्रिलर भी बना चुके हैं। इसमें कोई शक़ नहीं कि बिजॉय के निर्देशन में एक भावनात्मक गहराई और स्टाइल होती है, मगर कभी-कभी रवानगी की कमी से बेहतरीन दृश्य भी असरहीन लगने लगते हैं। तैश में कहीं-कहीं ऐसा महसूस होता है।
सीरीज़ की शुरुआत लंदन में बसे दो अलग-अलग अमीर और प्रभावशाली परिवारों में शादी के दृश्यों से होती है। एक शादी दो गैंगस्टर भाइयों कुलजिंदर (अभिमन्यु सिंह) और पाली (हर्षवर्धन राणे) के बीच दुश्मनी की वजह बनती है, क्योंकि कुलजिंदर अपने छोटे भाई की प्रेमिका जहान (संजीदा शेख़) से शादी कर रहा होता है। जहान कुलजिंदर की पत्नी सनोबर (सलोनी बत्रा) की छोटी बहन है और पाली उससे प्रेम करता है।
पाली, भाई को उसकी शादी में जाकर मारने की कोशिश करता है, मगर गोली नहीं चला पाता। दूसरी शादी रोहन (जिम सरभ) के छोटे भाई कृष (अंकुर राठी) और माही (ज़ोआ मोरानी) की है। अपने पिता की तरह रोहन ख़ुद भी डॉक्टर है। रोहन, आरफा (कृति खरबंदा) से प्यार करता है, जो उसी के अस्पताल में ऑर्थोपेडिक सर्जन है। आरफा पाकिस्तान से है। उसके मम्मी-पापा अलग हो चुके हैं। शादी में शामिल होने रोहन का दोस्त सनी ललवानी (पुलकित सम्राट) भी आता है, जो शादी में आये गैंगस्टर कुलजिंदर को पीट-पीटकर अधमरा कर देता है।
आगे के एपिसोड्स में कहानी अलग-अलग पड़ावों से गुज़रते हुए इन सभी किरदारों को मिला देती है। सनी ने कुलजिंदर को क्यों पीटा, इस वजह का भी खुलासा होता है, जिसके तार रोहन के बचपन की एक घिनौनी याद से जुड़े हैं, जिसके लिए कुलजिंदर ज़िम्मेदार होता है। इसके साथ पाली-जहान और रोहन-आफरा की रिलेशनशिप की कुछ और परतें खुलती हैं।
अंतत: इस लड़ाई के दोनों छोरों पर सीरीज़ के सबसे गुस्सैल किरदार सनी और पाली आकर टिक जाती हैं और इन दोनों छोरों के बीच रोहन है, जो छोटे भाई और उसकी होने वाली दुल्हन को खोने के बाद सनी को नहीं खोना चाहता।
तैश की कहानी में कुछ बातें अस्पष्ट रह जाती हैं। जैसा कि ऊपर ज़िक्र किया कि कुलजिंदर अपने छोटे भाई की प्रेमिका से शादी क्यों करता है? लंदन के एक अमीर संभ्रांत परिवार के अपराध में लिप्त एक गैंगस्टर परिवार से इतने निकट संबंध हैं कि शादी-ब्याह में आना-जाना तक है। ऐसा क्यों है, इसके कारण का भी खुलासा नहीं किया गया है। ऐसे कुछ बिंदु हजम नहीं होते और तैश को कमज़ोर बनाते हैं।
बिजॉय नाम्बियार के साथ अंजलि नायर, कार्तिक आर अय्यर और निकोला लुइस टेलर ने स्क्रीनप्ले के साथ ख़ूब प्रयोग किये हैं। वर्तमान में जो हो रहा है, उसकी वजह समझाने के लिए बार-बार दृश्यों को अतीत में लेकर गये। इस तरह के प्रयोग वेब सीरीज़ में सस्पेंस और थ्रिल पैदा करने के लिए अक्सर देखे जाते हैं, मगर तैश के मामले में इस प्रयोग से सीरीज़ की रवानगी थोड़ा प्रभावित होती है।
दर्शक को कहानी के तार जोड़ने के लिए थोड़ा ध्यान-मग्न होकर बैठना पड़ेगा। हालांकि, वॉशरूम में पुलिकत और अभिमन्यु सिंह के बीच फाइट वाले दृश्य को वर्तमान और अतीत के बीच ट्रांजिशन की तरह इस्तेमाल करने का प्रयोग दिलचस्प है।
तैश के तीनों मुख्य पुरुष कलाकार जिम सरभ, पुलकित सम्राट और हर्षवर्धन राणे ने अपनी भूमिकाओं को प्रभावशाली ढंग से निभाया है। इनके दृश्यों में एक भावनात्मक गहराई नज़र आती है। हर्षवर्धन और संजीदा के दृश्य हों या पुलकित और जिम सरभ के बीच के दृश्य। सनोबर का किरदार निभाने वाली सलोनी बत्रा नेटफ्लिक्स की फ़िल्म सोनी में नज़र आयी थीं। सोनी में सलोनी ने पुलिस अफ़सर का किरदार निभाया था।
तैश में सलोनी ने गैंगस्टर की पत्नी की बेबसी और ज़रूरत पड़ने पर तेवर दिखाने में अभिनय क्षमता का भरपूर इस्तेमाल किया है। संजीदा शेख़ अपने किरदार के लिए ‘ख़ामोशी’ का बेहतरीन इस्तेमाल करती हैं। इससे उनका बोलना और भी प्रभावशाली हो जाता है।
कृति खरबंदा के किरदार के ज़रिए तैश एक पॉलिटिकल कमेंट करती है, वहीं एक ख़ास समुदाय की मान्याओं के प्रति पूर्वाग्रह रखने वालों को आईना दिखाती है। हालांकि, तैश की कहानी के मिज़ाज को देखते हुए यह पहलू आसानी से नज़रअंदाज़ हो जाता है।
हर्षवीर ओबेरॉय की सिनेमैटोग्राफी दृश्यों की संजीदगी बढ़ाती है। क्लोज़ अप और लॉन्ग शॉट्स का बेहतरीन इस्तेमाल किया गया है। प्रियांक प्रेम कुमार की एडिटिंग स्टाइलिश है। हिंदी सिनेमा में परिवार और रिश्तों के लिए मर-मिट जाने की कहानियां पहले भी पर्दे पर आती रही हैं, मगर तैश का ट्रीटमेंट उसे दूसरी फ़िल्मों से अलग करता है।