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दरिंदो का खिलौना

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-सुषमा मलिक

कब थमेगा ये सिलसिला, क्या ये बेटियां यूं मरती रहेंगी!
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, बस नारों में दम भरती रहेंगी!!
तुम उनका दिल पूछकर देखो, जो अपनी बेटी खो रहे हैं!
सरकार खामोश बैठी है और, वो खून के आंसूं रो रहे है!!
हवस मिटाकर ना पेट भरा तो, उसकी जुबां भी काट दी!
उसके शरीर की हड्डियां भी, कितने हिस्सों में बाट दी!!
नारी तन से पैदा हुए और, नारी से ही बलात्कार किया!
शर्म ना आई उन कुत्तों को, दिल ने भी ना चीत्कार किया!!
जलाकर उसकी लाश रात को, शक में भी ये खाकी है!
दिल का टुकड़ा खोया मां ने, दर्द मे अब क्या बाकी है!!
बार बार हो रहे बलात्कार, क्या यही मेरे देश की शान है!
नपुसंक करो उन कुत्तों को, जो दरिंदे घूमते सरेआम हैं!!
क्यो इतनी छूट मिली इनको,रोज क्यों होते कांड घिनोने है!
“मलिक”का दिल रो उठता, जब बनती नारियां खिलौने हैं!!