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रिजर्व बैंक ने बैंकों के मुख्य अनुपालन अधिकारी की नियुक्ति के दिशानिर्देश जारी किए

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मुंबई, एक सितंबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों के मुख्य अनुपालन अधिकारी (सीसीओ) की नियुक्ति के दिशानिर्देश तय कर दिए हैं। इसके पीछे मकसद बैंकिंग उद्योग में अनुपालन और जोखिम प्रबंधन को लेकर एकरूपता सुनिश्चित करना है। रिजर्व बैंक की ओर से शुक्रवार को जारी सर्कुलर के अनुसार सीसीओ की नियुक्ति न्यूनतम तीन साल के लिए होगी। वह महाप्रबंधक स्तर या मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) से दो स्तर से अधिक नीचे का अधिकारी नहीं होगा। रिजर्व बैंक ने कहा कि इस तरह के स्वतंत्र अनुपालन कामकाज की अगुवाई सीसीओ करेगा। सीसीओ का चयन एक उचित ‘अनुकूल और उपयुक्त’ आकलन या चयन प्रक्रिया के जरिये किया जाएगा। सीसीओ अनुपालन से संबंधित जोखिमों का प्रबंधन करेगा। रिजर्व बैंक के संज्ञान में आया है कि विभिन्न बैंक इस बारे में अलग-अलग तरीका अपनाते हैं। इन दिशानिर्देशों का मकसद इस बारे में बैंकों के रुख में एकरूपता लाना और सीसीओ से संबंधित निरीक्षण आकांक्षाओं को सर्वश्रेष्ठ व्यवहार से जोड़ना है। दिशानिर्देशों में कहा गया है कि कुछ आकस्मिक परिस्थितयिों में सीसीओ हटाया या स्थानांतरित किया जा सकता है। इसके लिए पहले बोर्ड की मंजूरी लेनी होगी। साथ ही एक बेहतर तरीके से परिभाषित और पारदर्शी आंतरिक प्रशासनिक प्रक्रिया को पूरा करना होगा। सीसीओ बैंक का वरिष्ठ कार्यकारी होगा। यह महाप्रबंधक या सीईओ से दो स्तर नीचे तक का अधिकार होगा। सीसीओ की नियुक्ति बाजार में उपलब्ध उम्मीदवारों में से भी की जा सकती है। रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि सीसीओ को कोई ऐसी जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती, जिससे हितों के टकराव की स्थिति बनती हो। विशेषरूप से उसे कारोबार से संबंधित कोई जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती। धन शोधन रोधक अधिकारी जैसे पद सीधे हितों का टकराव पैदा नहीं करते हैं। यदि बैंक के आकार, जटिलता, जोखिम प्रबंधन रणनीति तथा ढांचे के हिसाब से अनुकूल बैठता हो, तो सीसीओ को धन शोधन रोधक अधिकारी की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके अलावा सीसीओ किसी ऐसी समिति का सदस्य नहीं होना चाहिए जो उसकी भूमिका के साथ हितों का टकराव पैदा करती हो।