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सुशांत की मौत की गुत्थियां

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युवा अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की अप्राकृतिक मौत के करीब तीन माह बाद एक आंशिक फैसला सामने आया है। इस प्रकरण की मुख्य अभियुक्त रिया चक्रवर्ती अंततः जेल में है। अदालत ने 22 सितंबर तक उसे न्यायिक हिरासत में भेजा है। इस नियति की रिया ने कल्पना तक नहीं की थी। अभी यह सवालिया स्थिति है कि सुशांत की मौत की गुत्थियां खुलेंगी या नहीं ! यह आयाम नशे के सिंडिकेट का है, जिसका एक किरदार रिया भी है। मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) के फिलहाल निष्कर्ष बेहद संगीन और गंभीर हैं। ब्यूरो ने रिया को ड्रग सिंडिकेट की सक्रिय सदस्य करार दिया है। एनसीबी का कहना है कि ड्रग्स गिरोह के साथ मिलकर रिया नशीले पदार्थ खरीदने और बेचने का धंधा करती थी और सुशांत के पैसे के जरिए लेन-देन करती थी। करीबी गिरोह में उसका भाई शौविक, सुशांत का हाउस मैनेजर सैमुअल मिरांडा और घरेलू सहायक दीपेश सावंत आदि भी शामिल थे। हालांकि रिया से किसी भी तरह का ड्रग बरामद नहीं किया गया है। सारा केस पृष्ठभूमि और सिंडिकेट के आधार पर है। गंभीर यह भी है कि अब रिया को लेकर टीवी मीडिया में एक ‘बेताल सर्कस’ छिड़ी है। इस प्रकरण को सनसनीखेज बनाया जा रहा है। चैनलों ने अदालतें खोल ली हैं और अपने तरीके से केस की मीमांसाएं की जा रही हैं। यह मीडिया के विवेक का अतिक्रमण है। नतीजतन सुशांत का मामला कई बार प्रसंगवश लगता है। बीते दिनों हम ड्रग सिंडिकेट पर संपादकीय लिख चुके हैं, लेकिन अब यह प्रकरण परत-दर-परत खुलने लगा है। रिया की गिरफ्तारी के जरिए 25 फिल्मी चेहरों के नाम भी बेनकाब हुए हैं, जो रिया ने एनसीबी को मुहैया कराए हैं। रिया ने नशे की इस बदसूरत दुनिया को भी देखा था, जो बड़े परदे पर बेहद हसीन, रोमांटिक और खुशनुमा पेश की जाती रही है। सवाल यह है कि क्या एनसीबी उन प्रख्यात और प्रभावशाली चेहरों तक पहुंच सकेगा और नशे के सिंडिकेट को बेनकाब करेगा? दरअसल रिया चक्रवर्ती दिवंगत अभिनेता के ‘प्यार’ में थी और एक अंतराल तक ‘लिव इन’ में भी रही थी, लिहाजा सुशांत की आत्महत्या अथवा हत्या के पीछे रिया की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। फिलहाल सीबीआई इस आयाम की जांच कर रही है और प्रवर्तन निदेशालय सुशांत के पैसों के दुरुपयोग और हेराफेरी को लेकर छानबीन कर रहा है। ठोस निष्कर्ष की अभी प्रतीक्षा है। नशे और ड्रग्स का कोण और कारोबार जांच के दौरान ही सतह पर आया, लिहाजा एनसीबी की भूमिका शुरू हुई। आज यह मुद्दा स्वतंत्र और समानांतर लग रहा है। हालांकि सुशांत की मौत से नशे के सिंडिकेट का क्या जुड़ाव था, यह अभी स्थापित और साबित होना है। अलबत्ता रिया समेत 9-10 सवालिया चेहरे एनसीबी की गिरफ्त में हैं, लेकिन जांच एजेंसी ने रिया पर संगीन धाराएं चस्पा की हैं। उसे ड्रग तस्करी की साजिश और कोशिश, ड्रग्स खरीदने-बेचने और आपूर्ति, आपराधिक साजिश और उकसाने आदि अपराधों की धुरी माना गया है। अपराध साबित हो गए, तो रिया को 10 से 20 साल तक की सजा हो सकती है। जुर्माना अलग होगा। इसी दौरान एक और फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत पर महाराष्ट्र सरकार ने ड्रग्स कनेक्शन को लेकर जांच बिठा दी है। एक तरफ केंद्रीय जांच एजेंसियां सक्रिय हैं, तो दूसरी ओर मुंबई पुलिस जांच करेगी। बात यहीं खत्म नहीं हुई, क्योंकि राज्य सरकार की ही बीएमसी ने कंगना के दफ्तर पर हथौड़े और बुलडोजर चला दिए हैं। वैसे पद्मश्री से सम्मानित, राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त अभिनेत्री के लिए जिन अपशब्दों का इस्तेमाल किया गया, जबड़ा तोड़ने तक की हिंसक धमकी दी गई और विधानसभा में निंदा प्रस्ताव तक पारित किया गया, ऐसा लोकतंत्र शिवसेना का ही हो सकता है। आलोचना की सजा यह नहीं हो सकती। कंगना ने रूपक की भाषा में अपने दफ्तर को ‘राम मंदिर’ कहते हुए ट्वीट किया कि आज फिर बाबर आया है, राम मंदिर तोड़ेगा, लेकिन राम मंदिर फिर बनेगा। जय श्रीराम…! यह मुद्दे को ‘सांप्रदायिक’ रंग देने की कोशिश है। बहरहाल हमारा बुनियादी विषय सुशांत की अस्वाभाविक मौत के निष्कर्ष और अंतिम सच तक पहुंचने का है।