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न्यायालय आंगनवाडी केन्द्रों को पुन: चालू करने की याचिका पर सुनवाई के लिये सहमत. जासूसी मामले में गिरफ्तार पत्रकार की पुलिस हिरासत सात दिन के लिए बढ़ाई. रबी फसलों की एमएसपी में वृद्धि ‘ऐतिहासिक’: शाह. दिल्ली दंगा: छात्र कार्यकर्ता ने जेल में मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया

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नयी दिल्ली, (भाषा) उच्चतम न्यायालय कोविड-19 महामारी की वजह से देश में बंद किये गये सभी आंगनवाडी केन्द्रों को फिर से चालू करने के लिये दायर याचिका पर विचार के लिये सोमवार को सहमत हो गया। शीर्ष अदालत ने महाराष्ट्र की दीपिका जगतराम साहनी की याचिका पर सुनवाई करते हुये केन्द्र,सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी किये और उनसे चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। इस याचिका में दावा किया गया है कि देश भर में आंगनवाडी केन्द्रों के अचानक बंद हो जाने की वजह से गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं तथा बच्चों के सामने संकट पैदा हो गया है। न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने याचिका पर नोटिस जारी करने के साथ ही याचिकाकर्ता के वकील को याचिका की प्रति सालिसीटर जनरल के कार्यालय में देने की अनुमति प्रदान की। इस याचिका में दीपिका जगतराम साहनी ने पीठ से अनुरोध किया है कि केन्द्र और सभी राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों को महामारी के बाद बच्चों में मुख्य रूप से कुपोषण और लडकियों में खून की कमी के प्रभाव के आलोक में उनके विकास की निगरानी करायी जाये और इस मामले में तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिये जायें। याचिका में कहा गया है कि केन्द्र, राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को तत्काल सभी आंगनवाडी केन्द्रों को पुन: खोलने और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून 2013 के प्रावधानों के अनुरूप आंगनवाडी सेवायें उपलब्ध कराने के निर्देश दिये जायें। याचिका में कहा गया है कि दशकों से चल रहे इन आंगनबाड़ी केन्द्रों को कोविड-19 महामारी की वजह से बंद कर दिया गया था।

 

 

 

 

 

नयी दिल्ली, (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने जासूसी मामले में गिरफ्तार पत्रकार राजीव शर्मा की पुलिस हिरासत सोमवार को सात दिन के लिए बढ़ा दी। शर्मा को सरकारी गोपनीयता कानून के तहत गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस ने बताया कि मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट पवन सिंह राजावत ने शर्मा के दो सहयोगियों–एक चीनी महिला और एक नेपाली नागरिक की पुलिस हिरासत भी 28 सितंबर तक के लिए बढ़ा दी। आरोपियों को पुलिस हिरासत की अवधि पूरी होने पर अदालत में पेश किया गया था और पुलिस ने उनकी हिरासत की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया। स्वतंत्र पत्रकार शर्मा को 14 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने अदालत से कहा कि उसे रक्षा मंत्रालय से जुड़े पहलू के बारे में पूछताछ करने की जरूरत है क्योंकि शर्मा के पास से रक्षा संबंधी कुछ गोपनीय दस्तावेज बरामद हुए हैं। अदालत ने पुलिस को शर्मा के वकील अदिश अग्रवाल को प्राथमिकी की प्रति सौंपने का भी निर्देश दिया। सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से हुई और प्रेस को कार्यवाही में शामिल होने की अनुमति दी गई।
पुलिस के मुताबिक, मुखौटा कंपनियों के जरिए शर्मा को मोटी रकम का भुगतान करने को लेकर चीनी महिला और उसके नेपाली सहयोगी को गिरफ्तार किया गया है।

 

 

 

 

 

 

नयी दिल्ली, (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गेहूं व चना सहित रबी की छह फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि किए जाने के फैसले को ‘ऐतिहासिक’ करार देते हुए सोमवार को इसे किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में केंद्र सरकार का सार्थक प्रयास बताया। उन्होंने सिलसिलेवार ट्वीट कर संसद से पारित कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक-2020 और कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 का विरोध करने के लिए विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया और कहा कि इन कृषि सुधार विधेयकों का विरोध करने वाले लोग असल में किसानों की खुशहाली के विरोधी हैं। शाह ने कहा कि मोदी सरकार का हर दिन, हर क्षण किसानों और गरीबों के कल्याण के प्रति समर्पित रहा है तथा आज छह रबी फसलों की एमएसपी बढ़ाकर उसने अपने उसी संकल्प को पुनः दोहराया है। उन्होंने कहा, ‘‘मोदी जी ने रबी फसलों की एमएसपी में ऐतिहासिक वृद्धि कर किसानों की आय को दोगुना करने की दिशा में सार्थक प्रयास किया है।’’कांग्रेस पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा कि जो लोग किसानों को भड़का कर अपनी खोई राजनीतिक जमीन ढूंढ़ने का प्रयास कर रहे हैं, उन्होंने 2009-14 तक सत्ता में रहते हुए किसानों से मात्र 1.25 लाख मीट्रिक टन दाल खरीदी जबकि मोदी सरकार ने 2014-19 में 76.85 लाख मीट्रिक टन दाल खरीदी। उन्होंने कहा कि इतना बड़ा फर्क उनके ढोंग और मोदी जी के समर्पण को साफ दर्शाता है। मोदी सरकार के कृषि सुधार विधेयकों का विरोध करने वाले लोग असल में किसानों की खुशहाली और उनकी उपज के सही मूल्य के विरोधी हैं। यह लोग नहीं चाहते कि देश का पेट भरने वाला अन्नदाता कभी उनके समान समृद्ध और सशक्त हो पाए।

 

 

 

 

 

नयी दिल्ली, (भाषा) गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून के तहत गिरफ्तार छात्र कार्यकर्ता गुलफिशा फातिमा ने दिल्ली की एक अदालत में सोमवार को आरोप लगाया कि जेल अधिकारी उसके खिलाफ सांप्रदायिक टिप्पणी करते हैं और उसे मानसिक यातना दे रहे हैं। एमबीए स्नातक फातिमा उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी में हुई सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े एक मामले में तिहाड़ जेल में बंद है। छात्रा ने यह आरोप उस वक्त लगाया जब उसे मामले में वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष समक्ष पेश किया गया। फातिमा ने आरोप लगाया कि जेल में कर्मियों द्वारा उससे भेदभाव किया जा रहा है। छात्रा ने कहा, ‘‘जेल में मुझे एक समस्या हो रही है। जब से मैं यहां लाई गई हूं मैं लगातार जेल कर्मियों के द्वारा भेदभाव का सामना कर रही हूं। वे मुझे शिक्षित आतंकवादी कहकर पुकारते हैं और मुझ पर सांप्रदायिक टिप्पणी करते हैं। मैं यहां मानसिक प्रताड़ना का सामना कर रही हूं। यदि मैं खुद को कोई नुकसान पहुंचाती हूं तो इसके लिये सिर्फ जेल अधिकारी जिम्मेदार होंगे।’’
फातिमा के सीधे अदालत में अपनी दलील देने पर न्यायाधीश ने उसके वकील को इस बारे में एक अर्जी दायर करने को कहा। इसपर, छात्रा के वकील महमूद प्राचा ने कहा कि वह इस मामले में आवश्यक कार्य करेंगे। अदालत ने सोमवार को आरोपी के वकीलों को आरोपपत्र की प्रति सौंपे जाने का निर्देश दिया और मामले पर अगली सुनवाई के लिए तीन अक्टूबर की तारीख निर्धारित कर दी।