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माता वैष्णो देवी की महिमा अपरंपार

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माता वैष्णो देवी जब तक किसी व्यक्ति पर अपनी कृपा दृष्टि नहीं करती, तब तक कोई भी दुर्गम रास्तों पर सफलता हासिल करके उनके चरणों तक नहीं पहुंच सकता है। कोरोना वायरस की वजह से माता देवी का दरबार भक्तों के लिए कुछ महीनो से बंद था। अब माता वैष्णो ट्रस्ट ने एक बार फिर मंदिर के दरबार भक्तों के लिए खोलने का निर्णय लिया है। सनातन धर्म को मानने वाले माता वैष्णों देवी की महिमा गाते कभी नहीं थकते हैं। हमारे धर्मशास्त्र में कलियुग में लोगों को दुखों से छुटकारा दिलाने के लिए कई दिव्य आत्माओं ने अवतार लिए हैं। प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण आसमान छूती पहाडि़यों में विराजमान माता वैष्णो देवी मंदिर की महिमा अपरंपार है।
कटरा में सर्वप्रथम यात्रियों को अपना पंजीकरण ऑनलाइन करवाना पड़ता तब जाकर ही माता मंदिर को जाने की अनुमति मिलती है। छः घंटे के भीतर वानगंगा से होकर गुजरना जरूरी माना गया है। वैसे तो जगह-जगह पर पुलिस टीमे सुरक्षा के लिहाज से यात्रियों का चैकअप करती रहती हैं। कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि इस तरह अचानक माता अपने चरणों तक मुझे यूं बुला लेगी। गर्मियों का मौसम होने के बावजूद भी कटरा से माता मंदिर को जाने वाले चौदह किलोमीटर का रास्ता ठंडी हवाओं से मन को मोह लेता है। मौसम कब अचानक बदलकर बारिश का रूप धारण कर ले कोई नहीं जानता है। कुल मिलाकर कठुआ से जम्मू कटरा जाने वाले राजमार्ग किनारे हरे-भरे पेड़ पर्यावरण सुरक्षा की दृष्टि से भी बहुत महत्त्वपूर्ण है। यह ऐसा विकसित राजमार्ग की विदेशों की सड़कों को भी मात दे जाए। सड़कों के किनारे बढि़या पैरापिट और कहीं कोई खड्डा तक देखने को नहीं मिलता है। लंबी सुरंगे सच में अपने देश के विकास मामले में बदलते स्वरूप की परिचायक हैं। अकसर ठंडी हवाएं चलती रहती हैं, जो गर्म कपड़े पहनने का एहसास करवाती रहती हैं। माता के मंदिर को जाने वाले इस रास्ते में जगह-जगह पर ठंडे शीतल जल की व्यवस्था, लंगर, शौचालय, भोजनालय, स्वास्थ्य सुविधा और सुरक्षा के मंदिर प्रबंधक कमेटी की और पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। पूरे रास्ते में लाइटों और आराम करने की उचित व्यवस्था भी है। कटरा से मंदिर को जाने के लिए पालकी, घोड़े और नन्हें बच्चों के लिए ट्राली बाकर आदि की सुविधाएं भी यात्रियों के लिए उपलब्ध हैं। मंदिर को जाने का रास्ता थोड़ा दुर्गम जरूर, मगर माता अपने भक्तों को थकान का एहसास तक होने नहीं देती है। मंदिर के ऊपरी हिस्से में बाबा भैरो नाथ का मंदिर जिसके लिए रोप-वे भी चलते हैं। यात्री लंबी सीढि़यों पर चढ़कर बाबा के दरबार में हाजरी भरते हैं। मंदिर से कटरा वापस आने का रास्ता बहुत ही सरल बन जाता है।

-सुखदेव सिंह, नूरपुर