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जिस पुलवामा को लेकर आरोपों को झेलता रहा, उसका सच पाकिस्तान की संसद में स्वीकार किया गया: मोदी

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नेशनल एक्सप्रेस,
केवडिया (गुजरात), प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि पिछले साल पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले के सच को पाकिस्तान की संसद में स्वीकार किया गया। इस हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 40 जवान शहीद हो गए थे।
प्रधानमंत्री ने इस आतंकी हमले का गलत इस्‍तेमाल करने के लिए कुछ राजनीतिक दलों की आलोचना भी की और कहा कि विवादों से दूर रह कर के वह सभी आरोपों को झेलते रहे और ‘‘भद्दी-भद्दी’’ बातें सुनते रहे।

मोदी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री फवाद चौधरी ने पाकिस्तानी संसद में स्वीकार किया कि 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले के लिये उनका देश जिम्मेदार है।

इस हमले के बाद दोनों देश जंग के मुहाने पर खड़े हो गए थे।

मोदी यहां देश के पहले गृह मंत्री सरदार बल्‍लभ भाई पटेल की 145वीं जयंती पर ‘स्‍टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे।

मोदी ने कहा, ‘‘आज यहां जब मैं अर्धसैनिक बलों की परेड देख रहा था तो मन में एक और तस्वीर थी। यह तस्वीर थी पुलवामा हमले की। देश कभी भूल नहीं सकता कि जब अपने वीर बेटों के जाने से पूरा देश दुखी था, तब कुछ लोग उस दुख में शामिल नहीं थे।’’

उन्होंने कहा कि जब पूरा देश पुलवामा हमले के बाद दुखी था कुछ लोग ‘‘स्वार्थ और अहंकार से भरी भद्दी राजनीति’’ कर रहे थे।

मोदी ने कहा, ‘‘उस समय उन वीरों की तरफ देखते हुए मैं विवादों से दूर रह कर सारे आरोपों को मैं झेलता रहा। भद्दी-भद्दी बातें सुनता रहा। मेरे दिल पर वीर शहीदों का गहरा घाव था।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन पिछले दिनों पड़ोसी देश से जो खबरें आईं हैं, जिस प्रकार वहां की संसद में सत्य स्वीकार किया गया है, उसने उन लोगों के असली चेहरों को देश के सामने ला दिया है। अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए, ये लोग किस हद तक जा सकते हैं। पुलवामा हमले के बाद की गई राजनीति, इसका बड़ा उदाहरण है।’’

प्रधानमंत्री ने इस प्रकार की राजनीति करने वाले दलों से आग्रह किया कि देश की सुरक्षा के हित में और सुरक्षाबलों के मनोबल के लिए इस प्रकार की राजनीति ना करें।

उन्होंने कहा, ‘‘अपने स्वार्थ के लिए, जाने-अनजाने आप देशविरोधी ताकतों की हाथों में खेलकर, उनका मोहरा बनकर, न आप देश का हित कर पाएंगे और न ही अपने दल का।’’

उन्होंने कहा कि देश हित ही सर्वोच्च हित है। ‘‘जब हम सबका हित सोचेंगे, तभी हमारी भी प्रगति होगी, उन्नति होगी।’’

आतंकवाद को मानवता के लिए वैश्विक चिंता का विषय बताते हुए मोदी ने विश्व समुदाय से इसके खिलाफ एकजुट होने की अपील की और कहा कि आतंकवाद और हिंसा से कभी किसी का कल्याण नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा, ‘‘प्रगति के प्रयासों के बीच कई ऐसी चुनौतियां भी हैं जिनका सामना आज भारत और पूरा विश्व कर रहा है। बीते कुछ समय से दुनिया के अनेक देशों में जो हालात बने हैं, कुछ लोग आतंकवाद के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं, वह आज मानवता के लिए, विश्व के लिए, शांति के उपासकों के लिए वैश्विक चिंता का विषय बना हुआ है।’’

उन्होंने कहा कि इस माहौल में दुनिया के सभी देशों को, सभी सरकारों को सभी पंथों को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने की सबसे ज्यादा जरूरत है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि सारे अवरोधों को दूर कर वहां विकास की नई इबारत लिखी जा रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘सरदार साहब (बल्लभ भाई पटेल) जीवित थे। बाकी राजे-रजवाड़ों के साथ ये काम भी अगर उनके जिम्‍मे होता तो आज आजादी के इतने वर्षों बाद ये काम करने की नौबत मुझपे नहीं आती। लेकिन सरदार साहब का वो काम अधूरा था, उन्‍हीं की प्रेरणा से 130 करोड़ देशवासियों को उस कार्य को भी पूरा करने का सौभाग्‍य मिला है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘कश्‍मीर के विकास में जो बाधाएं आ रही थीं उन्‍हें पीछे छोड़कर अब कश्‍मीर विकास के नए मार्ग पर बढ़ चुका है।’’