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स्त्रियाँ

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-अनिता रश्मि
घर-बाहर के छंद
मकान के अंदर के द्वंद!!
बच्चों की किलकारियों की भाषा
रिश्तों की अनगिन परिभाषा!!
संजोकर क्या खूब
कविता लिख लेती हैं स्त्रियाँ!!
ना मेज-कुर्सी की खिचखिच
ना समय की किल्लत की चिकचिक
बस चूल्हे पर पकते!!
रंग-रूप गंध के संग
सपनों की हांडी में डूब!!
रच लेतीं हैं एक मुक्कमल कविता
व्यस्त… बहुत व्यस्त रहते हुए!!
मन के अंदर ही अंदर
ये कविता लिखती स्त्रियाँ।!!