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उपेंद्र कुशवाहा ने महागठबंधन से अलग होने का किया एलान, BSP के साथ लड़ेंगे चुनाव

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महागठबंधन में सीट बंटवारे की स्थिति स्पष्ट नहीं होने की वजह से आरएलएसपी सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा काफी समय से नाराज चल रहे थे. ऐसे में आखिरकार उन्होंने महागठबंधन से किनारा कर लिया.
पटना: लंबे समय से चल रहे विवाद के बाद आखिरकार मंगलवार को आरएलएसपी सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा ने महागठबंधन से किनारा करने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है. साथ ही उन्होंने एनडीए में शामिल होने की चर्चाओं पर भी विराम लगाते हुए तीसरे मोर्चे के गठन का ऐलान किया है. अब उपेंद्र कुशवाहा यूपी की पूर्व सीएम मायावती के बीएसपी के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरेंगे.
महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर थे नाराज
बता दें कि महागठबंधन में सीट बंटवारे की स्थिति स्पष्ट नहीं होने की वजह से आरएलएसपी सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा काफी समय से नाराज चल रहे थे. कई बार उन्होंने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से मुलाकात कर मसले को सुझाने की कोशिश की लेकिन तेजस्वी के अड़ियल रवैये की वजह से सीट बंटवारे को लेकर बात नहीं बन पाई जिसके बाद उपेंद्र कुशवाहा से महागठबंधन से किनारा कर लिया. मालूम हो कि पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने भी इसी वजह से महागठबंधन से किनारा कर एनडीए के दामन थाम लिया था.
उपेंद्र कुशवाहा का पॉलिटिकल सफर
पूर्व में केंद्रीय मंत्री रह चुके आरएलएसपी सुप्रीमो को 2007 में नीतीश कुमार के जेडीयू से बर्खास्त कर दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने फरबरी, 2009 में अपनी पार्टी राष्ट्रीय समता पार्टी का गठन किया. लेकिन 2009 के नवंबर में ही पार्टी का जेडीयू में विलय हो गया. हालांकि 2013 में 4 जनवरी को उन्होंने नीतीश सरकार पर विकास नहीं करने का आरोप लगाते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया.
2018 में मंत्री पद से दिया था इस्तीफा
जेडीयू से अलग होने के बाद फिर 2013 में उन्होंने राष्ट्रीय लोक समता पार्टी का गठन किया और 2014 के लोकसभा चुनाव में एनडीए घटक दल के तौर पर चुनाव लड़ा. इस चुनाव में उन्होंने काराकाट संसदीय क्षेत्र से जीत हासिल की और उन्हें केंद्रीय कैबिनेट जगह मिली. लेकिन 2018 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर वादा पूरा नहीं करने का आरोप लगाकर केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.
दोनों सीटों पर मिली थी हार
2019 के लोकसभा इलेक्शन में उन्होंने महागठबंधन के दामन थाम लिया और उजियारपुर और काराकाट संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ा लेकिन दोनों जगह उनकी हार हुई. बहरहाल बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में उन्होंने महागठबंधन से किनारा कर लिया है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बीएसपी के साथ मिलकर वो बिहार विधानसभा चुनाव में क्या कर पाते हैं.