Home Spirituality शनिदेव कौन हैं और क्या हैं उनकी ख़ास बातें।

शनिदेव कौन हैं और क्या हैं उनकी ख़ास बातें।

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आज हम आपको बताएँगे कि शनिदेव कौन हैं और क्या हैं उनकी ख़ास बातें। तो क्या शनिदेव कुछ बुरा करते हैं या हम कुछ गलत समझ रहे हैं? यही सब जानने के लिए और शनि देव के बारे में पूरी जानकारी पाने के लिए इस लेख को अवश्य पढ़ें

 

आखिर कौन हैं शनि देव:- जब भी हमारे सामने शनिदेव का नाम आता है तो अक्सर लोग घबरा जाते हैं और भयभीत हो जाते हैं क्योंकि उनको लगता है कि शनिदेव बहुत ही गुस्से वाले देवता हैं और वे सदैव दंड देते हैं और लोगों को परेशान करते हैं। तो क्या कभी आपने सोचा है कि वास्तव में शनि देव हमारे शत्रु हैं या फिर बात कुछ और है!!

पुराण के अनुसार शनि को परमशक्ति परमपिता परमात्मा ने तीनों लोक का न्यायाधीश नियुक्त किया है। शनिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश को भी उनके किए की सजा देते हैं और ब्रह्मांड में स्थित तमाम अन्यों को भी शनि के कोप का शिकार होना पड़ता है।

 

 

 

 

 

सूर्य और शनि देव का सम्बन्ध:- पुराण के अनुसार शनि और सूर्य में शत्रुता है। सूर्य प्रकाश के देवता हैं और दिन में शक्तिशाली माने जाते हैं तो शनि देव अंधकार के देवता हैं और रात्रि में शक्तिशाली माने जाते हैं। एक कथा के अनुसार जब छाया पुत्र शनि देव का जन्म हुआ तो उनका वर्ण श्याम था, जिसकी वजह से सूर्य देव ने उन्हें अपना पुत्र मानने से इंकार कर दिया और उनकी माता छाया को अपशब्द कहे।

इससे क्रुद्ध होकर बाल शनि में अपने पिता सूर्य को ग्रहण लगा दिया। इसी वजह से अक्सर सूर्य और शनि में तनाव रहता है। हालांकि दोनों पिता-पुत्र हैं और सूर्य जगत की आत्मा हैं तो शनि जगत के न्यायाधीश। ये दोनों ही मानव जीवन में महत्वपूर्ण दायित्व निभाते हैं।

 

 

 

 

 

शनि से क्यों डरते हैं लोग:- यदि कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय करता है तो वह शनि की वक्र दृष्टि से बच नहीं सकता। शराब पीने वाले, माँस खाने वाले, ब्याज लेने वाले, परस्त्री के साथ व्यभिचार करने वाले और ताकत के बल पर किसी के साथ अन्याय करने वाले का शनिदेव 100 जन्मों तक पीछा करते हैं।

शनिदेव एक ऐसे शिक्षक हैं, जो आपकी कठिन परीक्षा लेकर आपको एक महान व्यक्तित्व बनाते हैं। वे आपको निखारते हैं और जीवन के संघर्षों में तपाकर आप को कुंदन बना देते हैं।

 

 

 

 

पुराणों के अनुसार:- इनके सिर पर स्वर्ण मुकुट, गले में माला तथा शरीर पर नीले रंग के वस्त्र और इंद्रनीलमणि के समान। यह गिद्ध पर सवार रहते हैं। इनके हाथों में धनुष, बाण, त्रिशूल रहते हैं। शनि को सूर्य का पुत्र माना जाता है। उनकी बहन का नाम देवी यमुना और माता का नाम छाया (सवर्णा) है। यह धरती और शरीर में जहाँ भी तेल और लौह तत्व है उस पर राज करते हैं। शरीर में दाँत, बाल और हड्डियों की मजबूत या कमजोरी का कारण यही हैं। शनिदेव से सभी डरते हैं क्योंकि ज्योतिष अनुसार शनि की साढ़ेसाती और ढय्या के फेर में फँसे व्यक्ति की जिंदगी में तूफान खड़े हो जाते हैं।

 

 

 

 

शनि के प्रसिद्ध मंदिर :

शनि के प्रसिद्ध मंदिर : महाराष्ट्र का शिंगणापुर गाँव का शनि मंदिर

मध्यप्रदेश के ग्वालियर के पास शनिश्चरा मंदिर।

उत्तरप्रदेश के कोशी के पास कौकिला वन में सिद्ध शनि देव का मंदिर।

 

शनिदेव की विशेष बातें :- धार्मिक रूप से देखें तो शनि देव सूर्य और छाया के पुत्र हैं तथा भगवान शंकर के प्रिय शिष्य भी हैं और भगवान शिव ने ही शनि देव को दंड नायक बनाया।

यदि वैदिक ज्योतिष की बात की जाए तो उसके अनुसार शनि देव भचक्र की दसवीं और ग्यारहवीं राशियोंं अर्थात मकर और कुंभ के स्वामी हैं। यह तुला राशि में उच्च अवस्था में माने जाते हैं और मेष राशि में अपनी नीच अवस्था में इनकी स्थिति होती है। कुंभ इनकी मूल त्रिकोण राशि भी है। यह वायु तत्व की प्रधानता वाले ग्रह हैं और शीतल हवाओं के कारक भी हैं।

 

 

 

शनि देव की कृपा प्राप्त करने के लिए कुछ ज्योतिषीय उपाय:- यदि आप चाहते हैं कि शनिदेव आप पर मेहरबान रहें और आपको शनिदेव के अच्छे परिणाम प्राप्त हों, विशेषतौर पर अभी जहाँ पूरी दुनिया कोरोना महामारी की चपेट में है तो आप नीचे दिए गए कुछ विशेष उपाय अपना सकते हैं:

  • आप शनिदेव के वैदिक मंत्र “ शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये शं योरभि स्त्रवन्तु :” अथवा शनि के तांत्रिक मंत्र शं शनैश्चराय नमःया फिर शनि के बीज मंत्र प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमःका जाप कर सकते हैं।
  • शनि देव को प्रसन्न रखना है तो उसके लिए सबसे उत्तम उपाय है अपने कर्मों को सुधारना। यदि आप सही रास्ते पर चलेंगे, अच्छे कार्य करेंगे, ज़रूरतमंद लोगों की मदद करेंगे और दूसरों को बेवजह परेशान नहीं करेंगे तो इससे शनि देव बहुत जल्दी ही आपसे प्रसन्न हो जायेंगे।
  • कुछ अन्य उपायों में आप शनि देव की अनुकूलता प्राप्त करने के लिए धतूरे की जड़ या बिच्छू जड़ी धारण कर सकते हैं।
  • आप नीलम रत्न भी पहन सकते हैं या उसके स्थान पर कटहैला रत्न भी धारण कर सकते हैं।
  • यदि आप चाहें तो सात मुखी रुद्राक्ष भी धारण कर सकते हैं, जिसकी कृपा से आपको शनिदेव की दशा और महादशा में अनुकूल परिणाम प्राप्त होंगे।
  • आप चाहें तो शनि यंत्र की स्थापना करके उसकी विधिवत पूजा भी कर सकते हैं।
  • उपरोक्त में से प्रत्येक को शनिवार के दिन, शनि के नक्षत्रों पुष्य, अनुराधा और उत्तराभाद्रपद में अथवा शनि की होरा में धारण / स्थापित कर सकते हैं।
  • ग़रीबों और ज़रूरतमंदों को भोजन करायें, इससे शनिदेव की कृपा शीघ्र ही प्राप्त हो जाएगी।
  • दिव्यांग जनों की सेवा करें से और उन्हें शनिवार के दिन आवश्यकता के अनुसार दवाई वितरित करें।  हालाँकि यह सब करते समय सरकार द्वारा निर्धारित की गयी गाइडलाइन्स का पूरा पालन करें, सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखें, जिससे आप भी सुरक्षित रहे और सामने वाला इंसान भी।इस से भी शनि देव की कृपा शीघ्र ही प्राप्त हो जाती है।
  • प्रतिदिन चींटियों को आटा डालें या फिर कसार बनाकर गोले में बाहर कर रख देने से भी शनि देव प्रसन्न होते हैं।
  • अपने कार्य स्थल पर अपने साथ काम करने वाले और अपने अधीन काम कर रहे लोगों से अच्छा व्यवहार करें, उन्हें सम्मान दें और उनसे मित्रवत रहें तो आपको शनिदेव की कृपा सहज ही प्राप्त हो जाएगी। लॉकडाउन के इस नए चरण में कोशिश करें जितना हो सके घर से ही काम करें/वर्क फ्रॉम होम करें , और अपने कर्मचारियों और कार्यस्थल के हर एक इंसान को प्रोत्साहित करें और उनमें सकारात्मकता का भाव जगाने की कोशिश करें।