विपक्षी दलों ने केंद्र से एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता पर ध्यान देने के लिए कदम उठाने का आग्रह किया

नेशनल एक्सप्रेस डिजिटल डेस्क
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विपक्षी पार्टियों ने शुक्रवार को केंद्र से देश के कई हिस्सों में एलपीजी सिलेंडर की कथित कमी को दूर करने के लिए तुरंत कदम उठाने की अपील की, वहीं सत्ताधारी गठबंधन के नेताओं ने इस मुद्दे पर विपक्ष पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया।

नयी दिल्ली, भाषा। विपक्षी पार्टियों ने शुक्रवार को केंद्र से देश के कई हिस्सों में एलपीजी सिलेंडर की कथित कमी को दूर करने के लिए तुरंत कदम उठाने की अपील की, वहीं सत्ताधारी गठबंधन के नेताओं ने इस मुद्दे पर विपक्ष पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। ये प्रतिक्रियाएं प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान पर आई हैं, जिसमें उन्होंने एलपीजी की उपलब्धता को लेकर “घबराहट की स्थिति पैदा करने वालों” पर निशाना साधा था और राज्य सरकारों से सिलेंडर की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए निगरानी बढ़ाने को कहा था।

यहां ‘एनएक्सटी समिट’ को संबोधित करते हुए मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा था कि पश्चिम एशिया में मौजूदा संकट से कोई भी देश अछूता नहीं है, लेकिन भारत इस चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चत करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। शिवसेना नेता और राज्यसभा सदस्य मिलिंद देवरा ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री और सरकार का साथ देते हुए इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिशों की आलोचना की और कहा कि सरकार पहले ही पश्चिम एशिया में अस्थिरता से निपटने के लिए भारत की रणनीति बता चुकी है।

उन्होंने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा, “जब विदेश मंत्री और पेट्रोलियम मंत्री ने सदन के माध्यम से देश को बता दिया है कि पश्चिम एशिया में राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता तथा वहां जारी संघर्ष के बीच भारत की रणनीति क्या है, तो इस मुद्दे का राजनीतिकरण करना और घबराहट तथा डर का माहौल बनाना देश के हित में नहीं है।” देवरा ने कहा, “तो आज सभी राजनीतिक दलों और सभी नेताओं के लिए एक साथ आने और इस बात पर ध्यान देने का समय है कि हम इस संकट और चुनौती को अवसर में कैसे बदल सकते हैं। उनका एकमात्र मकसद भारत के लोगों को गलत तरीके से गुमराह करना है।”

एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना सत्तारूढ़ राजग में सहयोगी है। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि एलपीजी सिलेंडर को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। हालांकि, उन्होंने केंद्र सरकार के खाड़ी देशों से संपर्क करने और शांति के लिए काम करने की पहल करने पर संतोष भी जताया। उन्होंने कहा, “बदकिस्मती से, कई घर, खासकर गांव के इलाकों में, सिलेंडर की जगह लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल किया जा रहा है। अगर सिलेंडर आसानी से नहीं मिलते, तो यह एक असली चुनौती बन जाती है।’’

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थरूर ने कहा कि कुछ जगहों पर गैस सिलेंडर की कमी के कारण रेस्तरां बंद हो रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं बस इतना कह सकता हूं कि देखिए, हम सब इसमें साथ हैं। देश को यह सुनिश्चित करने के लिए एकजुट होना चाहिए कि इन समस्याओं को जल्द से जल्द दूर किया जाए। पांच राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, और हममें से जिन्हें प्रचार करना है, उन्हें भी पेट्रोल की जरूरत पड़ेगी।’’

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थरूर ने कहा, “वह (प्रधानमंत्री) सभी पक्षों से संपर्क कर रहे हैं। हमारे विदेश मंत्री भी खाड़ी देशों में अपने समकक्षों से बात कर रहे हैं। मुझे खुशी है कि भारत ने शांति के लिए कुछ पहल की है।” उन्होंने यह भी कहा कि इस लड़ाई का भारत की ऊर्जा सुरक्षा और खाड़ी देशों में रहने वाले करीब 90 लाख भारतीयों की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि सरकार को ज़मीन पर आपूर्ति सुलभ करने पर ध्यान देना चाहिए।

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उन्होंने कहा, “अगर व्यावसायिक जगहों और घरेलू उपभोक्ताओं को मांग पर गैस मिल जाए, तो कोई घबराहट नहीं होगी। सरकार को आपूर्ति शृंखला पर ध्यान देना चाहिए और घरों और व्यावसायिक स्थानों, दोनों के लिए पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी।’’ तृणमूल कांग्रेस के नेता सौगत रॉय ने भी हालात पर चिंता जताई और कहा कि एलपीजी की कमी के कारण छात्रों और होटलों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। रॉय ने कहा, “हालात सच में बहुत खराब हैं। तुरंत कुछ कदम उठाए जाने चाहिए।”

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