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संपादकीय

यूनेस्को ने दीपावली को विश्व धरोहर घोषित किया

यूनेस्को ने दीपावली को विश्व धरोहर घोषित किया
दीपावली मात्र एक त्योहार नहीं, बल्कि जीवन, आत्मा, संबंध, समरसता और विश्वबंधुत्व का प्रकाशग्रंथ है। यह वह विरासत है जो हजारों वर्षों से मानव को अंधकार से प्रकाश, अज्ञान से ज्ञान, ईष्र्या से प्रेम और भय से विश्वास की यात्रा पर ले जाती रही है।

मिठास की बोली

विवाद से दूरी कमजोरी नहीं, बल्कि आत्म-संयम और परिपक्वता का प्रतीक है। यह उस व्यक्ति की पहचान है, जो परिस्थितियों से नहीं, बल्कि अपने विचारों से संचालित होता है। जो व्यक्ति शांति को चुनता है।
विमर्श  संपादकीय 

वायु प्रदूषण से निपटना : एक प्रणालीगत समस्या जिसके लिए प्रणालीगत सुधार की आवश्यकता है

दिल्ली सरकार पारिस्थितिकी तंत्र के भीतर काम करने और अब एक डेटा और एआई केंद्र का नेतृत्व करने के बाद, यह मेरे लिए स्पष्ट है कि समस्या का विज्ञान और हमारी प्रतिक्रिया की रणनीति गलत संरेखित बनी हुई है।
विमर्श  संपादकीय 

बच्चों में समाचार पत्र और पत्रिकाएँ पढ़ने की आदत विकसित करें। — डॉ. विजय गर्ग

बच्चों में समाचार पत्र और पत्रिकाएँ पढ़ने की आदत डालना समय की माँग है, क्योंकि यह आदत उनके बौद्धिक, भाषाई और सामाजिक विकास के लिए बेहद ज़रूरी है।
विमर्श  संपादकीय 

प्रदूषण : एक ख़ामोश ख़तरा जो छीन रहा है प्रजनन क्षमता और स्वस्थ साँसें

शुक्राणु की गुणवत्ता में कमी: प्रदूषक तत्वों के संपर्क में आने से पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या, उनकी गतिशीलता और उनके आकार में कमी आती है।
विमर्श  संपादकीय 

रूपहले पर्दे पर विवाह के विविध रंग

बॉलीवुड की अनेक फिल्मों की कहानियों के केंद्र में शादी को रखा गया। बेशक वक्त के साथ शादियों की कहानियों के मुद्दे बदलते रहे लेकिन रिश्ता तय होना, सगाई, बारात का जाना, जूते चुराई , विदाई आदि ज्यादातर फिल्मों में एक जैसे हैं।
विमर्श  संपादकीय 

भारत में स्कूल शिक्षा के लिए 2025 का दृष्टिकोण: भविष्य को आकार देने वाले प्रमुख रुझान

भारत की शिक्षा प्रणाली 2025 तक एक परिवर्तनकारी बदलाव के लिए तैयार है, जो तकनीकी प्रगति, नीति सुधार और बदलती सामाजिक जरूरतों से प्रेरित है।
विमर्श  संपादकीय 

मोदी मॉडल का नया अध्याय: संकट में अवसर, पान मसाले से सुरक्षा

पान मसाला सेस से बनेगा भारत का महामारी-विरोधी कवच। डिमेरिट गुड्स से पुण्य का धन: स्वास्थ्य से राष्ट्रीय सुरक्षा तक।
विमर्श  संपादकीय 

क्या नेता भी नीलाम हो सकते हैं?

कल्पना कीजिये कि यदि नेताओं का चयन चुनाव के बजाय नीलामी से होने लगे तो बेस प्राइस—मोदी से राहुल, शाह से लेकर पप्पू-टप्पू-गप्पू तक! सभी का तय किया जाएगा।
विमर्श  संपादकीय 

वन्य जीवों की बढ़ती मौत पर सख़्त हो : सरकार

वन्य जीवों के अवैध शिकार से इनकार नहीं किया जा सकता। निगरानी के अत्याधुनिक तकनीकी साधन उपलब्ध होने के बावजूद शिकार की घटनाओं में वृद्धि यह संकेत देती है कि तंत्र के कुछ जिम्मेदार लोगों की मिलीभगत की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।
विमर्श  संपादकीय 

देश के कर्मचारियों को मानसिक तनाव से मुक्त करेगा ‘राइट टू डिस्कनेक्ट बिल’

स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों पर पढ़ाई और प्रतियोगी माहौल का दबाव है, वहीं दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारी लगातार बढ़ते कार्यभार से जूझ रहे हैं।
विमर्श  संपादकीय 

कट-एंड-कवर — यह सिर्फ़ टनल नहीं, शक्ति का स्वर्ण-मार्ग है

भारत की नई रणनीति : हर मौसम, हर क्षेत्र, हर लक्ष्य। हिमालय की ठंडी हवा में भी जलता भारत का आत्मबल।
विमर्श  संपादकीय 

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