ईरान संघर्ष पर संसद में प्रस्ताव लाने की मांग, ब्रिटास ने इराक युद्ध प्रस्ताव का हवाला दिया

नेशनल एक्सप्रेस डिजिटल डेस्क
On

माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने वर्ष 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में इराक युद्ध की निंदा करते हुए।

नयी दिल्ली, भाषा। माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने वर्ष 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में इराक युद्ध की निंदा करते हुए संसद द्वारा सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किए जाने का संदर्भ देते हुए मंगलवार को सरकार से ईरान संघर्ष पर इसी तरह का प्रस्ताव लाने की मांग की।

राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान ब्रिटास ने कहा कि अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ किए जा रहे एकतरफा और अवैध युद्ध के खिलाफ संसद की “एकजुट और सर्वसम्मत आवाज” उठना चाहिए और भारत को इस मुद्दे पर मौन नहीं रहना चाहिए।

ब्रिटास ने लोकसभा में सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संबोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें आर्थिक चिंताओं और प्रवासी भारतीयों के मुद्दों को उठाया गया, लेकिन व्यापक संघर्ष का जिक्र नहीं किया गया, जिस पर भारत को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।

ब्रिटास ने कहा, “जो बात गायब थी, वह अमेरिका और इज़राइल द्वारा शुरू किए गए इस एकतरफा, अनैतिक और अवैध युद्ध पर चुप्पी थी।”उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने संसद से एकजुट और सर्वसम्मत आवाज उठाने की अपील की थी।

Read More पालम में बहुमंजिला इमारत में लगी भीषण आग, तीन बच्चों सहित एक ही परिवार के सात लोगों की मौत

राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन को संबोधित करते हुएउन्होंने कहा कि वर्ष 2003 में, जब वाजपेयी प्रधानमंत्री थे, तब संसद के दोनों सदनों ने इराक के खिलाफ अमेरिका के युद्ध की निंदा करते हुए संयुक्त सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया था। राधाकृष्णन 2003 में लोकसभा सदस्य थे।

Read More ठाणे नगर निगम ने नए रेलवे स्टेशन का नाम आनंद दिघे के नाम पर रखे जाने का समर्थन किया

उन्होंने कहा, “मैं चाहता हूं कि भारतीय संसद, जैसा कि प्रधानमंत्री ने कहा, एकजुट होकर अपनी आवाज उठाए। सरकार एक प्रस्ताव लाए, जिसे दोनों सदन पारित करें।”ब्रिटास ने कहा कि भारत ने खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों को गंभीर बताया है, लेकिन संकट की जड़ पर भी विचार किया जाना चाहिए।

Read More ईद के मौके पर उत्तम नगर में शांतिपूर्ण माहौल सुनिश्चित किया जाए: दिल्ली उच्च न्यायालय

उन्होंने कांग्रेस नेता शशि थरूर की टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि सरकार को ‘मौन ही कूटनीति है’ की सलाह नहीं माननी चाहिए, बल्कि मल्लिकार्जुन खरगे की राय पर विचार करना चाहिए।उन्होंने कहा कि खरगे ने ईरान युद्ध और उसके भारत पर प्रभाव को लेकर संसद में अल्पकालिक चर्चा की मांग बार बार उठाई है।

ब्रिटास ने कहा, “गुटनिरपेक्ष देशों के नेता के रूप में भारत को यह समझना चाहिए कि मौन समाधान नहीं है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारी आवाज सुनी जाए। यह केवल राष्ट्रीय हित के लिए नहीं, बल्कि व्यापक मानवता के हित में भी जरूरी है। इसलिए मेरा सरकार से एक प्रस्ताव लाने का आग्रह है।”

उन्होंने स्थिति से प्रभावित भारतीयों, विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे लगभग 700 नाविकों को लेकर चिंता जताई और उनके परिवारों से संपर्क सुनिश्चित करने के लिए तंत्र स्थापित करने की मांग की।

साथ ही, उन्होंने खाड़ी देशों से लौटने वाले भारतीयों के लिएपुनर्वास पैकेज की मांग करते हुए कहा कि भारत को मिलने वाली आय का बड़ा हिस्सा केरल की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि केरल को लगभग 2.2 लाख करोड़ रुपये की आय प्राप्त होता है, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग एक-तिहाई है।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को लोकसभा में अपने संबोधन में ईरान युद्ध के आर्थिक प्रभाव, आपूर्ति शृंखला में व्यवधान, आम लोगों के जीवन पर असर, एलपीजी क्षेत्र की गंभीर स्थिति और प्रवासी भारतीयों के हालात का जिक्र किया था।

उन्होंने हालांकि 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों का उल्लेख नहीं किया, जिनसे क्षेत्र में व्यापक संघर्ष भड़का।

संबंधित समाचार