आयुष्मान भारत योजना में कैंसर के मरीजों के इलाज के लिए विशेष व्यवस्था की मांग उठी रास में
राज्यसभा में सोमवार को भारतीय जनता पार्टी के सदस्य संजय सेठ ने देश में कैंसर के मामलों में वृद्धि पर चिंता जताते हुए सरकार से आयुष्मान भारत योजना में इस रोग के मरीजों के इलाज के लिए विशेष व्यवस्था करने की मांग की।
नयी दिल्ली, भाषा। राज्यसभा में सोमवार को भारतीय जनता पार्टी के सदस्य संजय सेठ ने देश में कैंसर के मामलों में वृद्धि पर चिंता जताते हुए सरकार से आयुष्मान भारत योजना में इस रोग के मरीजों के इलाज के लिए विशेष व्यवस्था करने की मांग की। शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए सेठ ने कहा कि कैंसर एक जानलेवा बीमारी है और महंगे इलाज से परिवार को भी आर्थिक रूप से पूरी तरह तबाह कर देती है। सेठ ने कहा कि साल 2021 में देश में कैंसर के 14.26 लाख मामले थे जो 2025 में बढ़कर 15 लाख से अधिक हो गए। उन्होंने कहा कि ‘‘इस रोग से मौत का आंकड़ा भी 7.8 लाख से बढ़कर 8.6 लाख तक पहुंच गया है।’’
उन्होंने कहा कि सरकार ने कैंसर के इलाज को वहनीय एवं किफायती बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि 2025-26 के बजट में 297 डे केयर कैंसर सेंटर को मंजूरी दी गई ताकि मरीजों को कैंसर के इलाज के लिए जिले में आसानी से कीमोथैरेपी की सुविधा मिल सके। सेठ ने कहा कि 2026-27 के बजट में कैंसर की 17 जीवन रक्षक दवाइयों पर से सीमा शुल्क हटा दिया गया जिससे कैंसर के मरीजों को लाभ होगा। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन कुछ सुधार जरूरी हैं। कैंसर के शुरुआती इलाज में करीब 5 से 7 लाख रुपये खर्च होते हैं और बीमारी बढ़ने पर 15 से 20 लाख रुपये लगते हैं।’’
उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना में पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज का प्रावधान है लेकिन कैंसर के इलाज का खर्च बहुत ही महंगा है। सदस्य ने कहा, ‘‘इस योजना में कैंसर के मरीजों के इलाज के लिए विशेष व्यवस्था की जानी चाहिए।’’ सेठ ने कहा कि कीमोथैरेपी वायल्स का दुरुपयोग रोकने के लिए दवा निर्माताओं को ये दवाएं अलग-अलग साइज के पैकेटों में बनाने के लिए कहा जाना चाहिए ताकि इन दवाओं की बर्बादी को रोका जा सके। उन्होंने कहा, ‘‘कीमोथैरेपी के लिए आवश्यक खुराक मरीज की स्थिति के अनुसार तय होती है और शेष दवा को फेंक दिया जाता है।’’
शून्यकाल में ही कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने कहा कि चार महीने पहले जीएसटी दर घटाई गई थी, लेकिन उत्पादों का उत्पादन कुछ इस तरह बढ़ाया गया कि करीब 200 उत्पादों में जीएसटी दरें बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा कि साबुन, शैम्पू, तेल से लेकर गैस सिलेंडर तक का दाम बढ़ गया है। ‘‘डॉलर की तुलना में रुपया कई गुना नीचे गिर चुका है और पश्चिम एशिया में जारी संकट का असर भी पड़ रहा है।’’
भाजपा की मेधा विश्राम कुलकर्णी ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू हुए 17 साल हो गए लेकिन निरक्षरता दूर नहीं हुई। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम के तहत प्रवेश नीति में सुधार की जरूरत है क्योंकि देश में निरक्षरता 19 प्रतिशत है और छह से सत्रह साल की आयु के 16 फीसदी बच्चे स्कूल से बाहर हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार नीति में अगर सुधार किया जाए तो अधिक से अधिक बच्चों को स्कूलों में प्रवेश दिया जा सकता है। शून्यकाल में ही भाजपा के महाराजा संजोबा लेशंबा और जग्गेश ने भी अपने अपने मुद्दे उठाए।

