वरिष्ठ नागरिकों, पत्रकारों, दिव्यांगजनों के लिए रेल किराये में छूट बहाल करने की लोकसभा में उठी मांग

नेशनल एक्सप्रेस डिजिटल डेस्क
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जनता दल (यूनाइटेड) के एक सांसद ने सोमवार को लोकसभा में सरकार से वरिष्ठ नागरिकों, पत्रकारों, दिव्यांगजनों और 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं एवं 55 साल से अधिक आयु के पुरूषों के लिए रेल किराये में छूट को बहाल करने की मांग की।

नयी दिल्ली, भाषा। जनता दल (यूनाइटेड) के एक सांसद ने सोमवार को लोकसभा में सरकार से वरिष्ठ नागरिकों, पत्रकारों, दिव्यांगजनों और 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं एवं 55 साल से अधिक आयु के पुरूषों के लिए रेल किराये में छूट को बहाल करने की मांग की। इन वर्गों के लिए ट्रेन किराये में यह छूट कोविड-19 महामारी के दौरान रेल मंत्रालय ने बंद कर दी थी। जद(यू) के कौशलेंद्र कुमार ने वर्ष 2026-27 के लिए रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदान की मांगों पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि कोरोना महामारी के बाद ट्रेनों में ‘थ्री टियर’, ‘स्लीपर’ डिब्बों की संख्या आधी कर दी गई थी, जिन्हें बढ़ाने की जरूरत है।

उन्होंने अनुदान की मांगों का समर्थन करते हुए उल्लेख किया कि वरिष्ठ नागरिकों, पत्रकारों, दिव्यांगजनों तथा 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं और 55 साल से अधिक आयु के पुरुषों के लिए कोविड-19 महामारी से पहले किराया कम था। उन्होंने रेल मंत्री से मांग की, ‘‘इन वर्गों को रेल किराये में (कोविड-19 महामारी से पहले) जो छूट दी जाती थी, उसे फिर से शुरू करने पर विचार करने की जरूरत है।’’

तृणमूल कांग्रेस की सांसद जून मालिआ ने भी रेल किराये में यह छूट बहाल करने की मांग की। कांग्रेस के बेनी बेहनान ने कहा कि कोरोना काल के दौरान ट्रेनों के कई ठहराव (स्टोपेज) बंद कर दिये गए थे, जिन्हें अब तक फिर से शुरू नहीं किया गया है। उन्होंने इन ठहराव को बहाल करने की मांग की। कांग्रेस सांसद ने केरल में रेल परियोजनाओं के कार्यान्वयन में देरी होने का दावा करते हुए कहा कि राज्य के लोग समान व्यवहार की उम्मीद करते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘आप केवल रेल मंत्री ही नहीं हैं, बल्कि भारतीय रेलवे के चीफ लोको पायलट हैं। आप प्रिसिंपल चीफ ऑपरेटिंग मैनेजर हैं। आप प्रिंसिपल सिग्नल एवं टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर हैं। आप पूरी रेल प्रणाली को नियंत्रित करते हैं।’’ कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘‘रेलवे में दो सिग्नल होते हैं, एक है ‘रेड सिग्नल’ और दूसरा है ‘ग्रीन सिग्नल’। ‘रेड सिग्नल’ होने पर ट्रेन आगे नहीं बढ़ती है। केरल में हमें केवल ‘रेड सिग्नल’ दिखता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं माननीय मंत्री से आग्रह करता हूं कि केरल में ‘रेड सिग्नल’ को बंद कर ‘ग्रीन सिग्नल’ ऑन किया जाए।’’

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उनकी इस टिप्पणी पर, सदन में बैठे रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और सत्ता पक्ष सहित विपक्ष के कुछ सदस्य भी हंसते नजर आए। शिवसेना (उबाठा) के अरविंद सावंत ने मुंबई की लोकल ट्रेनों में यात्रियों की अत्यधिक भीड़ का हवाला देते हुए कहा कि मुंबई उपमहानगरीय रेल नेटवर्क के तहत जब तक छह लाइन नहीं बनेंगी, इस समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए एलिवेटेड ट्रेन चलाने पर भी रेल मंत्री से विचार करने का आग्रह किया। सांवत ने कोंकण रेलवे का मध्य रेलवे में विलय करने की भी मांग की।

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उन्होंने रेलवे स्टेशनों का नाम बदले जाने संबंधी मुद्दा उठाते हुए कहा कि 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले यह जोर-शोर से प्रचार किया गया था कि रेल मंत्रालय ने मुंबई के कई स्टेशन के नाम बदल दिये हैं। सावंत ने दावा किया किया कि करी रोड स्टेशन का नाम ‘लालबाग का राजा’ के नाम पर लालबाग आज तक नहीं किया गया है। उन्होंने घोषणा में शामिल कई अन्य स्टेशन के नाम भी अब तक नहीं बदले जाने का उल्लेख किया।

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राकांपा (शरदचंद्र पवार) के अमर शरदराव काले ने महाराष्ट्र में कोरोना काल में कई रेलवे स्टेशनों पर ट्रेनों के ठहराव बंद किये जाने का उल्लेख किया। उन्होंने इन्हें फिर से चालू करने की मांग की। शिवसेना के श्रीरंगअप्पा बारणे ने रेल मंत्रालय के लिए अनुदान की मांगों का समर्थन करते हुए, मुंबई लोकल रेल नेटवर्क में लाइन बढ़ाने में कई चुनौतियां होने का हवाला देते हुए भूमिगत या एलिवेटेड रेल लाइन बिछाने की मांग की।

तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के जी. एम. हरीश बालयोगी ने कहा कि अनुदान की मांगों में रेलवे के आधुनिकीकरण, विस्तारीकरण और क्षमता निर्माण पर जोर दिया गया है। उन्होंने रेल कनेक्टिविटी अंतिम छोर तक पहुंचाने और इसे प्राथिमकता दिये जाने की जरूरत बताई। उन्होंने भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन की तर्ज पर देश के अन्य रेलवे स्टेशन का भी सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत आधुनिकीकरण करने की मांग की।

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