एआई के दुरुपयोग से उत्पन्न खतरों से निपटने के लिए सरकार से की गई कठोर कानून की मांग

नेशनल एक्सप्रेस डिजिटल डेस्क
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कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के दुरुपयोग से उत्पन्न होने वाले खतरों पर चिंता जताते हुए बुधवार को राज्यसभा में कांग्रेस के सदस्य अखिलेश प्रताप सिंह ने सरकार से इस संबंध में कठोर कानून बनाने सहित कड़े कदम उठाने की मांग की।

नयी दिल्ली, भाषा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के दुरुपयोग से उत्पन्न होने वाले खतरों पर चिंता जताते हुए बुधवार को राज्यसभा में कांग्रेस के सदस्य अखिलेश प्रताप सिंह ने सरकार से इस संबंध में कठोर कानून बनाने सहित कड़े कदम उठाने की मांग की। शून्यकाल में सिंह ने एआई का मुद्दा उठाया और कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दुरुपयोग से गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है क्योंकि इन तकनीकों का उपयोग झूठी जानकारी फैलाने, जनमत को प्रभावित करने, निजता के उल्लंघन, नागरिकों को परेशान करने एंव लोकतांत्रिक संस्थानों को कमजोर करने के लिए किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि एआई तकनीक, खास कर डीपफेक के जरिये वास्तविक लगने वाले नकली ऑडियो, वीडियो और तस्वीरें तैयार किए जाते हैं जिससे पूरी शासन व्यवस्था एवं लोकतांत्रिक जवाबदेही के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। सिंह के अनुसार, विश्व स्तर पर डीपफेक का उपयोग राजनीतिक हेरफेर, वित्तीय धोखाधड़ी, पहचान की चोरी, उत्पीड़न एवं सामाजिक भ्रम फैलाने के लिए किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि एक रिपोर्ट के अनुसार 2026 तक साइबर अपराध के लिए इस्तेमाल की जाने वाली ऑनलाइन सामग्री का 90 फीसदी हिस्सा डीपफेक का हो सकता है। उन्होंने कहा कि विश्व आर्थिक मंच की ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट में एआई आधारित गलत सूचनाओं को दुनिया का सबसे बड़ा खतरा बताया गया है। सिंह ने कहा कि कई देशों के चुनावों में एआई तथा डीपफेक का इस्तेमाल जनमत को प्रभावित करने के लिए किया गया। स्लोवाकिया के 2023 के संसदीय चुनाव से ठीक पहले डीपफेक से एक उम्मीदवार का फर्जी वीडियो आया जिसमें चुनाव की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए गए।

अमेरिका में 2024 में चुनाव के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडन की आवाज में डीपफेक से तैयार वीडियो में मतदाताओं से मतदान न करने की अपील की गई। सिंह ने कहा कि इन मामलों की जांच की जा रही है। लेकिन ये घटनाएं बताती हैं कि एआई के जरिये सूचना तेजी से फैलती है और तथ्यों की जांच के बिना ही परिणामों को प्रभावित कर देती है। सिंह ने मांग की कि भारत में भी इस खतरे को देखते हुए कठोर कानून बनाये जाने चाहिए और कड़े कदम उठाए जाने चाहिए।

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कांग्रेस की ही जे बी माथेर हीशम ने केरल में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) स्थापित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि देश में अभी 22 एम्स हैं और कुछ राज्यों में तो दो एम्स हैं। उन्होंने कहा कि केरल लगातार एम्स की मांग कर रहा है, और हमने इस संबंध में सरकार से बार-बार अनुरोध किया है। इसी पार्टी के डॉ सैयद नसीर हुसैन ने कर्नाटक की पंचायतों की आर्थिक समस्या का जिक्र करते हुए कहा कि अब तक यह राशि नहीं मिल पाने की वजह से पंचायतों के लिए काम कर पाना मुश्किल हो रहा है।

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भारतीय जनता पार्टी के डॉ अजीत माधवराव गोपछड़े ने यौन क्षमता बढ़ाने के दावे वाली दवाओं की खुलेआम बिक्री होने का मुद्दा उठाया और इन्हें सेहत के लिए खतरनाक बताते हुए इन पर रोक लगाने की मांग की। भाजपा के ही कणाद पुरकायस्थ ने पूर्वोत्तर में रेल संपर्क बढ़ाने का मुद्दा उठाया और सरकार से जानना चाहा कि सिलचर रेलवे डिवीजन कब परिचालन शुरू करेगा। बीआरएस के बी पार्थसारथी रेड्डी ने हैदराबाद में जल संकट का मुद्दा उठाया। तृणमूल कांग्रेस के समीरुल इस्लाम तथा नेशनल कॉन्फ्रेंस के सज्जाद अहमद किचलू ने भी अपने-अपने मुद्दे उठाए।

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