ईरान के तेल संयंत्रों पर हमलों के बाद ‘काली बारिश’ से जनता को खतरा

नेशनल एक्सप्रेस डिजिटल डेस्क
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अमेरिका व इजराइल के ईरान के तेल भंडारों पर किये गये हवाई हमलों कारण उठे जहरीले धुएं के बादल धरती पर ‘काली बारिश’ हुई।

दुबई, भाषा। अमेरिका व इजराइल के ईरान के तेल भंडारों पर किये गये हवाई हमलों कारण उठे जहरीले धुएं के बादल धरती पर ‘काली बारिश’ हुई। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने इसके मद्देनजर जनता के लिए गंभीर खतरों की चेतावनी जारी की है। पिछले हफ्ते ईरान के कई तेल डिपो और एक रिफाइनरी पर हमले के बाद तेहरान के पास काली और तैलीय बारिश हुई, जिससे राजधानी के निवासियों ने आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत की। दो सप्ताह से जारी युद्ध के दौरान क्षेत्र के अन्य हिस्सों में भी काले धुएं के गुबार देखे गए।

ईरान भी फारस की खाड़ी के पड़ोसी देशों के तेल और प्राकृतिक गैस भंडारों पर ड्रोन व मिसाइलों से हमला कर अमेरिकी-इजराइली हवाई हमलों का जवाब दे रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, बारिश अपेक्षाकृत कम समय में वायुमंडल से खतरनाक रसायनों को साफ कर देती है लेकिन काली बारिश के संपर्क में आने वाले लोगों को अल्पकालिक और दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिमों से बचने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए। यह तब होता है, जब राख और जहरीले रसायन वायुमंडल में पानी की बूंदों के साथ मिलकर बारिश के दौरान वापस पृथ्वी पर गिरते हैं।

तेल रिफाइनरियों या तेल क्षेत्रों में आग लगने के बाद यह आम बात है और यह जंगल की आग, ज्वालामुखी विस्फोट व औद्योगिक प्रदूषण के कारण भी हो सकता है। विशेषज्ञों ने बताया कि राख के छोटे कण मानव बाल की चौड़ाई से लगभग 40 गुना छोटे होते हैं और यह फेफड़ों में गहराई तक जम सकते हैं व रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे सांस लेने और हृदय संबंधी समस्याएं हो सकती हैं जो समय से पहले मृत्यु का कारण बन सकती हैं।

पीएएच के संपर्क में आने से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और ईरान के स्वास्थ्य एवं पर्यावरण अधिकारियों ने लोगों को घर के अंदर रहने और मास्क पहनने की सलाह दी। उन्होंने चेतावनी दी कि बारिश का पानी अत्यधिक अम्लीय है और त्वचा को जला सकता है तथा फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है।

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