धामी ने अंकिता हत्याकांड की सीबीआई जांच की सिफारिश की

नेशनल एक्सप्रेस डिजिटल डेस्क
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मुख्यमंत्री ने कहा कि अंकिता भंडारी के माता–पिता के अनुरोध एवं उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए इस प्रकरण की सीबीआई से जांच कराये जाने की संस्तुति की गयी है।

देहरादून, भाषा। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2022 में हुए अंकिता भंडारी हत्याकांड की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराए जाने की शुक्रवार को सिफारिश करते हुए कहा कि सरकार की मंशा पूरी तरह स्पष्ट है और किसी भी तथ्य या साक्ष्य की अनदेखी नहीं की जाएगीे ।मुख्यमंत्री ने कहा कि अंकिता भंडारी के माता–पिता के अनुरोध एवं उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए इस प्रकरण की सीबीआई से जांच कराये जाने की संस्तुति की गयी है ।

धामी ने कहा कि हाल में उन्होंने अंकिता भंडारी के माता–पिता से मुलाकात की थी और इस दौरान उन्होंने मामले की सीबीआई जांच कराये जाने का अनुरोध किया था ।अंकिता हत्याकांड में कथित 'वीआईपी' को लेकर हाल में हुए खुलासों के बाद राज्य की राजनीति में तूफान आ गया है और कांग्रेस समेत तमाम राजनीतिक दल एवं सामाजिक संगठन सीबीआई जांच की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।

इसका जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोगों ने इस दौरान अपने राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए भ्रामक स्थितियां पैदा करने का प्रयास किया।उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे में सरकार का दायित्व है कि जनता को इस स्थिति से निकाला जाए और उनकी भावनाओं का सम्मान किया जाए।’’उन्होंने कहा कि इसमें सबसे बड़े पीड़ित अंकिता के माता-पिता थे और उनका पक्ष जानने के लिए उन्होंने उनसे बातचीत की थी ।

धामी ने स्पष्ट किया कि सरकार का शुरू से अंत तक उद्देश्य निष्पक्ष, पारदर्शी और संवेदनशील तरीके से न्याय सुनिश्चित करना रहा है एवं आगे भी रहेगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की जानकारी मिलते ही राज्य सरकार ने बिना किसी भेदभाव के पूरी पारदर्शिता के साथ कार्रवाई आरंभ की और मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एक महिला आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया ।

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उन्होंने कहा कि इस प्रकरण से जुड़े सभी आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार किया गया तथा राज्य सरकार की ओर से की गयी प्रभावी एवं सशक्त पैरवी के परिणामस्वरूप मामले के तीनों दोषियों को अधीनस्थ अदालत में उम्रकैद की सजा सुनाई गयी ।धामी ने कहा, ‘‘पूरे प्रकरण में इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि राज्य सरकार ने आरंभ से लेकर अंत तक निष्पक्षता, पारदर्शिता और दृढ़ता के साथ न्याय सुनिश्चित किया।’’

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इस मामले में ताजा विवाद उत्तराखंड के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की पत्नी होने का दावा करने वाली अभिनेत्री उर्मिला सनावर द्वारा हाल में सोशल मीडिया पर राठौर से उनकी कथित बातचीत के ऑडियो जारी करने से पैदा हुआ है, जिसमें सनावर ने आरोप लगाया है कि अंकिता हत्याकांड का ‘वीआईपी’ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का ‘गट्टू’ नाम का एक नेता है। एक अन्य कथित ऑडियो में उस नेता की पहचान भी उजागर कर दी गयी थी।

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इन ‘ऑडियो क्लिप’ का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संबंध में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गयी हैं और उनकी जांच की जा रही है ।उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा पूरी तरह स्पष्ट है और किसी भी तथ्य या साक्ष्य की अनदेखी नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि अंकिता केवल एक पीड़िता नहीं थी, बल्कि वह ‘‘हमारी भी बहन और बेटी थी।’’

धामी ने कहा कि राज्य सरकार पहले भी न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध रही है और आगे भी पूरी दृढ़ता एवं संवेदनशीलता के साथ अंकिता को न्याय दिलाने के लिए संकल्पबद्ध रहेगी ।मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा उनकी सरकार की पहली प्राथमिकता है और उनके खिलाफ किसी प्रकार का अपराध सहन नहीं किया जाएगा ।

उन्होंने कहा, ‘‘अपराधियों को ऐसी सजा मिलेगी जो समाज के लिए भी एक नजीर होगी।’’हत्याकांड की सीबीआई जांच की सिफारिश किये जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस ने इसे अंकिता के माता-पिता समेत राज्य के सभी लोगों के संयुक्त संघर्ष का परिणाम बताया और कहा कि यह जांच उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश की देखरेख में होनी चाहिए।

कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि सीबीआई जांच की मांग को मानकर राज्य सरकार ने यह साबित लिया है कि अतीत में उससे गलती हुई थी।उन्होंने कहा, ‘‘यह अंकिता के मातान्पिता के सब्र और संघर्ष, कांग्रेस सहित उन तमाम राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों एवं लोगों के संयुक्त संघर्ष का परिणाम है जो अंकिता के लिए न्याय की मांग कर रहे थे।’’

गोदियाल ने कहा कि सीबीआई की जांच उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की देखरेख में होनी चाहिए।उन्होंने कहा, ‘‘हमारी यह शुरू से ही मांग है कि उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई जांच करायी जाए।’’कांग्रेस की प्रदेश इकाई के उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने सीबीआई जांच की संस्तुति को न्याय मिलने की शुरुआत का पहला कदम बताया लेकिन कहा कि अगर यह जांच न्यायिक देखरेख में नहीं होती है, तो उस पर किसी को भरोसा नहीं होगा ।

इस बीच भाजपा की उत्तराखंड इकाई के अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि जनभावनाओं के अनुरूप लिया गया सीबीआई जांच का निर्णय विपक्ष के झूठ और दुष्प्रचार का पर्दाफाश कर देगा ।उन्होंने कहा कि सरकार ने मामले की निष्पक्ष जांच कर अंकिता के हत्यारों को सलाखों के पीछे भेजा लेकिन विपक्ष इस पर शुरू से ही राजनीति करता रहा।

उन्होंने कहा, ‘‘इसमें लेशमात्र भी शक की गुंजाइश न रहे, इसके लिए अंकिता के माता-पिता और लोगों की भावनाओं के अनुरूप सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी गयी है।’’पौड़ी जिले के वनंत्रा रिजॉर्ट में बतौर ‘रिसेप्शनिस्ट’ काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता की रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य ने अपने दो कर्मचारियों सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता के साथ मिलकर हत्या कर दी थी।तीनों को सत्र न्यायालय उम्रकैद की सजा सुना चुका है ।

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