मप्र मंत्रिमंडल की बैठक में मंत्रियों ने किया इलेक्ट्रॉनिक टैबलेट का इस्तेमाल, स्पेसटेक नीति मंजूर

नेशनल एक्सप्रेस डिजिटल डेस्क
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मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल ने मंगलवार को कागज के इस्तेमाल को अलविदा कहते हुए कागजरहित कामकाज की दिशा में नयी शुरुआत की।

भोपाल, भाषा। मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल ने मंगलवार को कागज के इस्तेमाल को अलविदा कहते हुए कागजरहित कामकाज की दिशा में नयी शुरुआत की। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में मंत्रियों ने पहली बार एजेंडे के लिए उपलब्ध कराए गए इलेक्ट्रॉनिक टैबलेट का उपयोग किया और इस बैठक में मध्यप्रदेश स्पेसटेक नीति-2026 के कार्यान्वयन सहित कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

मंत्रिमंडल के अन्य निर्णयों में दूसरे चरण के तहत 1,000 छात्रों की क्षमता वाले सांदीपनि स्कूलों की स्थापना के लिए 3,660 करोड़ रुपये का प्रावधान तथा ग्वालियर और उज्जैन में आयोजित होने वाले प्रमुख व्यापार मेलों में ऑटोमोबाइल बिक्री पर मोटर वाहन कर में 50 प्रतिशत की छूट शामिल है।

बैठक में मंत्रियों ने कागजरहित शासन की दिशा में राज्य सरकार के प्रयासों के तहत टैबलेट के माध्यम से एजेंडे का अध्ययन किया। ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने, समय बचाने और कागजी कार्रवाई को कम करने के उद्देश्य से छह जनवरी को मुख्यमंत्री और मंत्रियों को टैबलेट वितरित किए गए थे।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि प्रदेश में उपलब्ध 322 औद्योगिक पार्क, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर, 31 गीगावाट बिजली आपूर्ति, उत्कृष्ट शैक्षणिक संस्थानों और अनुकूल वातावरण को देखते हुए अंतरिक्ष-ग्रेड विनिर्माण की संभावनाओं को ध्यान में रखकर ‘मध्यप्रदेश स्पेसटेक नीति-2026’ लागू करने की स्वीकृति दी गई है।बयान के अनुसार यह नीति उपग्रह निर्माण, भू-स्थानिक विश्लेषण और अन्य क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देगी।

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एक अधिकारी ने बताया कि इसके माध्यम से अगले पांच वर्षों में करीब 1,000 करोड़ रुपये का निवेश और लगभग 8,000 रोजगार सृजित होने की संभावना है, जबकि इस पर अनुमानित वित्तीय भार 628 करोड़ रुपये होगा।

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उन्होंने कहा कि नीति के लागू होने से मध्यप्रदेश अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी (स्पेसटेक) क्षेत्र में एक मजबूत केंद्र के रूप में उभर सकेगा। इसके तहत विशेष प्रोत्साहन, बुनियादी ढांचा और अनुसंधान सहायता के माध्यम से अंतरिक्ष उद्योग को आकर्षित करने की रणनीति बनाई जाएगी।

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अधिकारी ने बताया कि यह नीति कृषि, आपदा प्रबंधन और शहरी नियोजन जैसे क्षेत्रों में उपग्रह आधारित अनुप्रयोगों के विकास को भी प्रोत्साहित करेगी, जिससे आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी।

मंत्रिमंडल ने दूसरे चरण में पूरी तरह सुसज्जित 200 सांदीपनि स्कूलों की स्थापना के लिए 3,660 करोड़ रुपये के अनुमानित व्यय को भी मंजूरी दी। प्रस्तावित स्कूलों की क्षमता 1,000 से अधिक छात्रों की होगी। इसके अलावा राजगढ़ और रायसेन जिलों में सिंचाई परियोजनाओं के लिए 898 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए।

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