मजबूत क्रेडिट मूल्यांकन से भारत की विकास यात्रा को नई दिशा

नेशनल एक्सप्रेस डिजिटल डेस्क
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बड़ी कंपनियाँ और सूचीबद्ध संस्थान नियमित रूप से अपनी वित्तीय स्थिति का विश्लेषण कराते हैं। लेकिन छोटे और मध्यम उद्योग (MSME), जो रोजगार और उत्पादन की रीढ़ हैं, अक्सर बिना किसी व्यवस्थित वित्तीय समीक्षा के काम करते हैं।

आज भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। नए उद्यम, स्टार्ट-अप और छोटे-मध्यम उद्योग देश के विकास में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। लेकिन इस विकास की मजबूती एक बहुत जरूरी बात पर टिकी है, जिस पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता—क्रेडिट मूल्यांकन (Credit Evaluation)।

बड़ी कंपनियाँ और सूचीबद्ध संस्थान नियमित रूप से अपनी वित्तीय स्थिति का विश्लेषण कराते हैं। लेकिन छोटे और मध्यम उद्योग (MSME), जो रोजगार और उत्पादन की रीढ़ हैं, अक्सर बिना किसी व्यवस्थित वित्तीय समीक्षा के काम करते हैं। इससे उन्हें अपने ही व्यवसाय की सही स्थिति का स्पष्ट आकलन नहीं मिल पाता।

MSME में आम समस्या क्या है?

कई MSME मालिक अपने खातों और वित्तीय विवरणों को साझा करने से झिझकते हैं। उन्हें लगता है कि इससे गोपनीयता प्रभावित होगी या खर्च बढ़ जाएगा। इसलिए वे अक्सर अंशकालिक अकाउंटेंट पर निर्भर रहते हैं, जिनका मुख्य काम सिर्फ रिटर्न भरना या बैंक के कागज़ तैयार करना होता है।

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इस तरीके से काम करने में कई जोखिम होते हैं—

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- खातों में गलतियाँ रह जाती हैं

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- डेटा असंगत होता है

- वास्तविक मुनाफा और नकदी स्थिति साफ दिखाई नहीं देती

बिना सही मूल्यांकन के, व्यवसाय की कमजोरियाँ समय रहते सामने नहीं आतीं। यही कमजोरियाँ आगे चलकर बैंक लोन, निवेश या पार्टनरशिप में बड़ी रुकावट बन जाती हैं।

क्रेडिट मूल्यांकन क्यों जरूरी है?

क्रेडिट मूल्यांकन सिर्फ बैंक की शर्त नहीं है। यह व्यवसाय के लिए एक आईना है।

इससे उद्यमी यह समझ पाते हैं कि:

- उनका कर्ज कितना सुरक्षित है

- कार्यशील पूंजी (Working Capital) सही तरह से उपयोग हो रही है या नहीं

- मुनाफा और मार्जिन मजबूत हैं या कमजोर

- बाहरी निवेशक उनके बिजनेस को कैसे देखते हैं

यह रिपोर्ट उद्यमी को निवेशक और बैंक की नजर से अपने बिजनेस को देखने का मौका देती है।

आंकड़े क्या कहते हैं?

Reserve Bank of India और SIDBI के अनुसार, भारत में 25% से भी कम MSME नियमित रूप से ऑडिटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट रखते हैं या स्वतंत्र क्रेडिट समीक्षा कराते हैं।

इसका नतीजा यह होता है कि कई अच्छे और मुनाफे वाले व्यवसाय भी सिर्फ कागज़ी कमजोरी के कारण बैंक फाइनेंस से वंचित रह जाते हैं।

असल में, सही तरीके से तैयार किए गए वित्तीय विवरण विश्वसनीयता का प्रमाण होते हैं, न कि केवल कानूनी औपचारिकता।

आंतरिक नियंत्रण काफी नहीं हैं

अधिकतर MSME में आंतरिक नियंत्रण सिर्फ GST, आयकर या ROC तक सीमित रहते हैं।

लेकिन क्रेडिट मूल्यांकन व्यवसाय को मजबूर करता है कि वह:

- वित्तीय अनुशासन अपनाए

- सही और भरोसेमंद डेटा रखे

- भविष्य की फंडिंग और ग्रोथ के लिए खुद को तैयार करे

इसे आप व्यवसाय की ग्रोथ-रेडीनेस की जांच भी कह सकते हैं।

सरकार और बैंकों की भूमिका

अगर उद्योग संगठन, SIDBI और राज्य वित्त निगम मिलकर ऐसे MSME को प्रोत्साहन दें जो स्वेच्छा से क्रेडिट मूल्यांकन कराते हैं, तो बड़ा बदलाव आ सकता है। उदाहरण के लिए:

- तेज़ लोन प्रोसेसिंग

- बेहतर ब्याज दर

- आसान डिजिटल स्कोरिंग

जिस तरह आज क्रेडिट रेटिंग सामान्य बात हो गई है, उसी तरह MSME के लिए नियमित क्रेडिट मूल्यांकन भी सामान्य बनना चाहिए।

निवेशकों के लिए भी फायदेमंद

आज के निवेशक—चाहे वे वेंचर कैपिटल हों, प्राइवेट इक्विटी या एंजेल निवेशक—पारदर्शी और सत्यापित डेटा चाहते हैं।

अगर MSME एक समान और भरोसेमंद क्रेडिट मूल्यांकन ढाँचा अपनाएँ, तो निवेश प्रक्रिया कहीं आसान और भरोसेमंद बन जाएगी।

उद्यमियों के लिए संदेश

क्रेडिट मूल्यांकन को जांच या डर के रूप में नहीं, बल्कि खुद को मजबूत बनाने के साधन के रूप में देखना चाहिए।

यह बताता है कि:

- आपकी ताकत क्या है

- आपकी कमजोरी कहाँ है

- आपको आगे क्या सुधार करना चाहिए

जब अंदर से भरोसा बनता है, तो बाहर की दुनिया—बैंक, निवेशक और पार्टनर—भी भरोसा करती है। आज के समय में, विश्वसनीयता ही सबसे बड़ी पूंजी है।

निष्कर्ष

अगर MSME समय-समय पर स्वतंत्र और पेशेवर क्रेडिट मूल्यांकन कराएँ, तो:

- निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा

- बैंक फाइनेंस आसान होगा

- देश का कारोबारी माहौल ज्यादा पारदर्शी और मजबूत बनेगा

जब हर छोटा-बड़ा उद्यम क्रेडिट की भाषा समझने लगेगा, तब पूंजी सही जगह और सही समय पर पहुँचेगी।

भारत की अगली बड़ी छलांग सिर्फ नए आइडिया या बड़े कारोबार से नहीं आएगी, बल्कि मजबूत वित्तीय विश्वसनीयता से आएगी। जितनी जल्दी हमारे उद्यम इसे समझेंगे, उतनी जल्दी भारत एक ऐसा देश बनेगा जहाँ हर अच्छा व्यवसाय निवेश के लायक होगा।

लेखक परिचय

अंकित अवस्थी चार्टर्ड अकाउंटेंट, क्रेडिट ड्यू-डिलिजेंस विशेषज्ञ, रोटेरियन और फ्रीमेसन। वे नई दिल्ली में स्थित हैं और MSME, वित्तीय संस्थानों व कॉरपोरेट्स के साथ मिलकर गवर्नेंस, क्रेडिट मूल्यांकन और जोखिम प्रबंधन को मजबूत करने का कार्य करते हैं।

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