दिल्ली : गौतम गंभीर के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा संबंधी मुकदमे पर सुनवाई 23 मार्च को

नेशनल एक्सप्रेस डिजिटल डेस्क
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‘डीपफेक’ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर आधारित प्रौद्योगिकी है, जिसका उपयोग किसी व्यक्ति की छवि, आवाज या वीडियो का इस्तेमाल कर ऐसा फर्जी वीडियो, फोटो या ऑडियो बनाने के लिए किया जाता है।

नयी दिल्ली, भाषा। दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर की उस याचिका को 23 मार्च को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जिसमें ‘डीपफेक’ सामग्री तैयार करने और व्यावसायिक लाभ के लिए उनकी छवि, आवाज तथा उनके व्यक्तित्व से जुड़ी अन्य विशेषताओं के दुरुपयोग और शोषण पर रोक लगाए जाने का अनुरोध किया गया है।

‘डीपफेक’ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर आधारित प्रौद्योगिकी है, जिसका उपयोग किसी व्यक्ति की छवि, आवाज या वीडियो का इस्तेमाल कर ऐसा फर्जी वीडियो, फोटो या ऑडियो बनाने के लिए किया जाता है जो बिल्कुल असली लगता है।गंभीर के वकील ने शुक्रवार को न्यायमूर्ति ज्योति सिंह के समक्ष कहा कि यह केवल उनके व्यक्तित्व से जुड़े अधिकारों के उल्लंघन का मामला नहीं है, बल्कि उनकी गरिमा का भी प्रश्न है।

अधिवक्ता जय अनंत देहाद्राई ने दावा किया कि आपत्तिजनक सामग्री का गंभीर पर अत्यधिक असर पड़ा है क्योंकि मनगढ़ंत वीडियो में उन्हें मैच में खराब प्रदर्शन के बाद मुख्य कोच पद से इस्तीफा देते हुए या किसी साथी खिलाड़ी पर हमला करते हुए दिखाया गया है।देहाद्राई ने कहा, ‘‘कुछ चीजों के गंभीर परिणाम होते हैं। जरा कल्पना कीजिए कि ‘डीपफेक’ के जरिये भारतीय टीम के मुख्य कोच के मुंह से ये शब्द बुलवाए जा रहे हैं कि वह टीम से इस्तीफा दे रहे हैं।इससे बहुत सारे मुद्दे पैदा हो गए हैं।’’

वकील ने कहा, ‘‘उनकी व्यावसायिक क्षमता सिद्ध हो चुकी है। बड़े-बड़े ब्रांड ने विज्ञापन के लिए उनके साथ अनुबंध किए हैं।’’देहाद्राई ने अदालत को यह भी बताया कि इस्तीफे वाला वीडियो प्रसारित करने वाले व्यक्ति ने मुकदमा दायर होने के बाद उसे हटा लिया और माफी मांग ली। इस वीडियो को 29 लाख बार देखा गया।

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उन्होंने कहा कि गंभीर ने एक खिलाड़ी के रूप में 23 वर्षों तक देश की सेवा की है और अब वह कोच हैं। उन्होंने अदालत से इस स्तर पर अंतरिम आदेश देने का अनुरोध किया ताकि अज्ञात प्रतिवादियों समेत कई संस्थाओं को उनके व्यक्तित्व से जुड़े अधिकारों के दुरुपयोग से रोका जा सके।अदालत ने याचिका में कुछ विसंगतियां देखने के बाद मामले की सुनवाई स्थगित कर दी और वकील को उन्हें दूर करने का समय दिया।

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